‘तेज सेवा प्रवाह, डिजिटल शासन प्रणाली व भ्रष्टाचार नियंत्रण अब प्राथमिकता’

समाचार सारांश
- सुव्यवस्था मार्गचित्र अध्ययन समिति ने शासन सुधार हेतु १४ क्लस्टरों में विभाजित कर १७६५ क्रियाकलापों सहित रिपोर्ट सरकार को सौंपा।
- समिति ने तीन स्तरों की सरकारों के बीच समन्वय में कमी, कानून सुधार तथा डिजिटल शासन को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया।
- रिपोर्ट में प्रदेश और स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक क्षमता विकास, वित्तीय अनुशासन व सेवा प्रवाह सुधार आवश्यक बताया गया।
३ चैत्र, काठमांडू। सुव्यवस्था मार्गचित्र अध्ययन समिति ने शासन सुधार के क्षेत्रों में आवश्यक कार्यों का अध्ययन कर सरकार को रिपोर्ट सौंप दी है। जेनजी आंदोलन की मांग और भावना के अनुसार, शासन सुधार के कार्यों की समीक्षा हेतु यह समिति गठित की गई थी।
प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद् कार्यालय के शासन महाशाखा के सचिव गोविन्दबहादुर कार्की के नेतृत्व में यह समिति बनाई गई थी। समिति ने मुख्य सचिव सुमनराज अर्याल को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
समिति के सदस्य सचिव और प्रधानमंत्री कार्यालय के सहसचिव भीष्म भूषाल के अनुसार, जेनजी आंदोलन द्वारा उठाए गए सुव्यवस्था व भ्रष्टाचार नियंत्रण संबंधी मांगों को संबोधित करने हेतु सुधार विषयों का अध्ययन किया गया।
‘हमने ५०० से अधिक व्यक्तियों और विभिन्न हितधारकों के साथ चर्चा की। सात शासकीय संवादों के सुझावों को सम्मिलित कर रिपोर्ट तैयार की है,’ भूषाल ने बताया, ‘विभिन्न क्षेत्रों को १४ क्लस्टरों में विभाजित कर आवश्यक सुधारों की रिपोर्ट बनाई गई है।’
अध्ययन रिपोर्ट में सुधार क्षेत्र की पहचान कर १७६५ क्रियाकलापों को शामिल किया गया है। विभिन्न राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र, उनकी चिंताएं तथा हितों का भी विश्लेषण किया गया है। व्यवस्थापिका और न्याय प्रशासन सुधार के सुझाव भी इसमें सम्मिलित हैं।
मुख्य सचिव सुमनराज अर्याल इस रिपोर्ट को आगामी सरकार के समक्ष प्रस्तुत करेंगे और नई सरकार इसे प्राथमिकता के आधार पर लागू करेगी।
सहसचिव भूषाल ने आगे कहा, ‘सेवा प्रवाह की तेजी, डिजिटल शासन प्रणाली और भ्रष्टाचार नियंत्रण को सबसे अधिक प्राथमिकता दी गई है।’

अध्ययन समिति ने तीन स्तर की सरकारों के बीच समन्वय, सहयोग और सह-अस्तित्व की कमी पर प्रकाश डाला है। स्पष्ट अधिकार और कानूनी सुधार के साथ सक्रिय एवं नियमित अंतरसरकारी समन्वय आवश्यक है।
संघीय सरकार संबंधी रिपोर्ट में कहा गया है कि सेवा प्रवाह को सरल और तकनीक-आधारित बनाना, एक-द्वार सेवा प्रणाली का विस्तार, सार्वजनिक सेवाओं के एकीकृत मानक लागू करना तथा प्रदेश एवं स्थानीय सरकारों की संस्थागत और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करना आवश्यक है।
अध्ययन समिति ने प्रदेश स्तर पर संघीय कानूनों की कमी को मुख्य समस्या बताया। कर्मचारी प्रबंधन के जटिल मामलों, वित्तीय निर्भरता और कमजोर प्रशासनिक क्षमता के कारण प्रदेश सरकारें सेवा प्रदान करने में असमर्थ पाई गई हैं।
समिति ने कहा, ‘प्रदेश सरकारों में जन अपेक्षाओं को पूरा करने हेतु संस्थागत पुनर्गठन, प्रशासनिक क्षमता विकास, वित्तीय अनुशासन, डिजिटल शासन और अंतरसरकारी समन्वय के माध्यम से सुधार आवश्यक है।’
स्थानीय सरकारों में सेवा प्रवाह में प्रक्रियात्मक जटिलताएं, सेवा मानकों में असमानता, डिजिटल अवसंरचना का अभाव और राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण प्रशासनिक निर्णयों में विकृति आई है। समिति ने संघ और प्रदेश सरकारों द्वारा स्थानीय सरकारों में हस्तक्षेप रोकने का सुझाव दिया है।
हालांकि कुछ स्थानीय सरकारों ने अच्छा प्रदर्शन और उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाना चाहिए।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ‘रिपोर्ट के क्रियान्वयन से स्थानीय सरकारें नागरिकों के लिए सबसे निकटतम ‘‘पहली सरकार’’ बनेंगी तथा पारदर्शी, जवाबदेह और परिणाममुखी सेवा प्रदान करना सुनिश्चित किया जा सकेगा।’
राजनीतिक अस्थिरता, सुधार के प्रति नेतृत्व की कमजोर प्रतिबद्धता एवं देरी के कारण राजस्व प्रणाली और बजट प्रबंधन में सुधार नहीं हो पाया है। आर्थिक प्रशासन में गंभीर संरचनात्मक समस्याएं हैं।
बजट प्रणाली में योजना तथा संसाधन प्रबंधन की बजाय वितरण केंद्रित कार्यक्रमों को प्राथमिकता मिलने से बजट अनुशासन कमजोर है। बजट आकार बढ़ाने के लिए क्षमता से अधिक राजस्व का अनुमान लगाने की प्रवृत्ति है, जिसे सुधारने की आवश्यकता है।

समिति ने उद्योग, वाणिज्य, आपूर्ति और निवेश संबंधी विषयों का अध्ययन कर सुझाव दिये हैं। सहकारी क्षेत्र में वित्तीय अनुशासन बनाए रखने एवं प्रभावी नियमन आवश्यक है।
नेपाल उच्च मूल्य वर्ग के पर्यटकों को आकर्षित करने में असफल रहा है। डिजिटल मार्केटिंग और अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग कमजोर पाए गए हैं।
विमानस्थल अवसंरचना का विस्तार न होना और हवाई सुरक्षा में कमजोरियां दर्शाते हुए समिति ने ‘‘अंतरराष्ट्रीय उड्डयन सुरक्षा मानदंडों का पालन करते हुए नागरिक उड्डयन में तकनीकी क्षमता और अवसंरचना को सुदृढ़ करने की आवश्यकता’’ बताई है।
समिति ने सार्वजनिक संस्थानों के कार्य में प्रभावशीलता की कमी, राजनीतिक हस्तक्षेप, नेतृत्व परिवर्तन और पेशेवर प्रबंधन की कमी को भी दर्शाया है। इस कारण सार्वजनिक संस्थानों में व्यापक सुधार आवश्यक है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘सार्वजनिक संस्थानों को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त करते हुए व्यवसायिक, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक संस्थान बनाना आवश्यक है।’
अध्ययन समिति ने खरीददारी कानून में सुधार, लेखा तथा वित्त प्रबंधन में पारदर्शिता और परिणाम असर बढ़ाने का सुझाव भी दिया है।
पूर्वाधार परियोजनाएं धीमी गति से आगे बढ़ रही हैं और तीन स्तरों की सरकारों के बीच जिम्मेदारी और क्षेत्र अस्पष्ट होने के कारण द्वंद्व बढ़ा है।
सरकारी निकायों के बीच समन्वय अभाव के कारण परियोजना कार्यों में बाधाएं आई हैं और सुधार की आवश्यकता बताई गई है।
शिक्षा क्षेत्र में समस्याओं की पहचान कर विद्यालय शिक्षा के गुणवत्ता और पाठ्यक्रम संशोधन के सुझाव दिए गए हैं।
उच्च शिक्षा और अनुसंधान प्रणाली को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए विश्वविद्यालयों को विशिष्टता पर केंद्रित किया जाना आवश्यक है।
स्वास्थ्य प्रणाली को नागरिक-केंद्रित और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए नीतिगत और संरचनात्मक सुधार आवश्यक हैं। नासूर रोग, मानसिक स्वास्थ्य और सड़क दुर्घटना नियंत्रण को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
साथ ही स्वास्थ्य संस्थानों के अवसंरचना विस्तार के अनुपात में दक्ष जनशक्ति, उपकरण, दवाइयां, सुव्यवस्था और वित्तीय स्थिरता में सुधार करना आवश्यक माना गया है।






