नेपाल लौटने के लिए कुवैत और क़तर के नेपालीयों के लिए सऊदी मार्ग ‘महंगा’

समाचार सारांश
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- नेपाल सरकार ने कुवैत और क़तर में रहने वाले नेपालीयों को सऊदी अरब के रास्ते नेपाल लौटने के लिए सड़क और हवाई मार्ग की व्यवस्था की है।
- कुवैत और क़तर के नेपालीयों ने उद्धार के नाम पर अत्यधिक शुल्क लेने का आरोप लगाया है।
- प्रवासी नेपाली समन्वय समिति के सलाहकार कुलप्रसाद कार्की ने सरकार से आग्रह किया है कि वे सक्रिय होकर उद्धार प्रक्रिया को सरल बनाएं।
३ चैत, काठमांडू। नेपाल सरकार ने कुवैत और क़तर में रहने वाले नेपालीयों को सऊदी अरब होते हुए नेपाल लौटने की व्यवस्था करने की घोषणा की है।
सऊदी के हवाई मार्ग खुला होने के बावजूद कुवैत और क़तर से सड़क मार्ग के जरिए सऊदी तक पहुंच कर वहां से हवाई मार्ग से नेपाल लौटने की व्यवस्था की गई है।
इजराइल–अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के कारण पश्चिम एशियाई (मध्य पूर्व) देशों में फंसे नेपाली लोग दहशत में हैं। कुवैत और क़तर में फंसे लोगों के बचाव के लिए सऊदी रास्ता अपनाया गया है।
कुवैत और क़तर स्थित नेपाली दूतावासों ने सऊदी के टूरिस्ट वीज़ा के जरिए बचाव की व्यवस्था की है। इसके लिए पहले ऑनलाइन सऊदी अरब का वीज़ा लेने का आह्वान किया गया है।
कुवैत स्थित नेपाली दूतावास ने बताया है कि कुवैत में रेसिडेंसी/सिविल आईडी धारक नेपाली सड़क मार्ग से सऊदी तक पहुंच सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन ट्रांजिट वीज़ा लेने में सहायता दी जा रही है।
ऑनलाइन आवेदन देने के बाद वीज़ा मिलने पर सड़क मार्ग से सऊदी प्रवेश कर वहां से हवाई मार्ग द्वारा नेपाल वापसी संभव है, दूतावास ने कहा।
इसी तरह, क़तर स्थित नेपाली दूतावास ने भी क़तर से सड़क मार्ग से सऊदी पहुंचने के बाद हवाई मार्ग द्वारा नेपाल जाने की सूचना जारी की है। ऑनलाइन क़तर का वीज़ा आवेदन किया जा सकता है।
क़तर की राजधानी दोहा स्थित ताशिर सऊदी वीज़ा सेंटर के जरिए टूरिस्ट वीज़ा के लिए अपॉइंटमेंट बुक कर वीज़ा लेने का अनुरोध किया गया है। वहां पर वीज़ा शुल्क भी जमा करना होगा।
लेकिन इस व्यवस्था और सूचनाओं से वहां रहने वाले नेपाली लोग नाराज़ हैं।
उन्होंने आरोप लगाया है कि नेपाल सरकार उद्धार के नाम पर उल्लंघन कर अत्यधिक शुल्क वसूल रही है।
कुवैत में कार्यरत नेपालीयों ने दूतावास पर अपनी जिम्मेदारी निभाने से मुंह मोड़ने का आरोप लगाया है। दूतावास के अनुसार कुवैत से नेपाल लौटने में लगभग ४ सौ कुवेती दिनार (केडी) खर्च आता है। कुवैत में रहने और खाने के संकट के कारण इतनी राशि चुकाकर लौट पाना संभव नहीं है, वे नाराजगी जताते हैं।
कुवैत के विकास भट्टarai ने कहा कि भोजन और आवास की भी समस्या है और ऐसे में ४ सौ केडी देकर नेपाल जाना संभव नहीं। सिर्जन कार्की ने कहा कि गरीब लोग विदेश में २०-३० हजार तनख्वाह कमाते हैं पर ८०-९० हजार टिकट खर्च करके नेपाल वापसी नहीं कर पाते। उन्होंने उद्धार के नाम पर लूटने की भी आशंका जताई।
‘विदेश जाते वक्त मेहनत से कमाए पैसे ले जाते हैं लेकिन घर लौटने के लिए ५-६ महीने की आमदनी टिकट में खर्च करनी पड़ती है, और इसे वे उद्धार कह रहे हैं?’ उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा है, ‘मानवता के हिसाब से व्यवहार बदलना चाहिए, नहीं तो दलालों को नुकसान उठाना पड़ेगा, विदेशी में मरना बेहतर होगा।’
इसी तरह, ज्ञानबहादुर तामांग ने कहा कि अपने ही देश के नागरिकों को सुझाव देना अच्छा है लेकिन वास्तविक स्थिति को समझना आवश्यक है। कुवैत में दैनिक मजदूरी करने वाले और कर्ज़ में दबे कई नेपाली श्रमिकों के लिए ‘सऊदी वीज़ा लेकर सड़क मार्ग से सऊदी जाओ और विमान से नेपाल लौटो’ कहना आसान है पर व्यवहार में कठिन है।
उनके अनुसार, वीज़ा शुल्क, यातायात खर्च, सीमा पार करने की झंझट और एयर टिकट जैसे खर्चों को कई श्रमिक आसानी से नहीं सहन कर सकते। अधिकांश मजदूर वेतन भी समय पर नहीं पाते जिससे वे मुश्किल में हैं।
‘विदेश में परेशानी होने पर नेपाली नागरिकों के लिए सरकार और दूतावास की जिम्मेदारी होती है, समाधान ऐसा होना चाहिए जो पीड़ित और कमजोर वर्ग को राहत दे, न कि अधिक खर्च और झंझट।’ उन्होंने लिखा।
गरीब श्रमिकों के लिए प्रक्रिया पूरी करना कैसे संभव होगा और दूतावास मदद या राहत के लिए कोई योजना क्यों नहीं बना रहा इसके बारे में उन्होंने सवाल उठाए।
केवल सूचना जारी कर पल्ला झाड़ने की बजाय पीड़ित नेपाली श्रमिकों की वास्तविक स्थिति समझ कर ठोस कदम उठाने का उन्होंने आग्रह किया। विदेश में रहने वाले नेपालीयों को सिर्फ सुझाव नहीं, बल्कि वास्तविक सहायता और समाधान चाहिए, उन्होंने कहा।
नेपाल सरकार के इस निर्णय पर क़तर में रहने वाले नेपाली लोगों ने भी नाराजगी जताई है। वर्तमान जटिल परिस्थिति में घर लौटना चाहने वालों के लिए दूतावास की सूचना और समस्या बढ़ाने वाली बताई जा रही है।
खाड़ी और मध्य पूर्व के नेपाली श्रमिकों को बचाने के नाम पर एयरलाइंस और वीज़ा प्रक्रिया में आम लोगों के लिए सहायता असंभव होती दिख रही है।
प्रवासी नेपाली समन्वय समिति के सलाहकार कुलप्रसाद कार्की ने बताया कि दूतावासों ने जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रखा है। कमाई से ट्रैवल एजेंसी और सरकारी शुल्क चुकाना पड़ता है, जिससे श्रमिकों को भारी समस्या हो रही है।
‘मासिक ७०-८० केडी तनख्वाह पाने वाले मजदूर ४ सौ केडी देकर कैसे नेपाल आएंगे?’ उन्होंने सवाल किया। ‘एक व्यक्ति की ६ से १० महीने की कमाई केवल लौटने की प्रक्रिया पर खर्च हो जाती है।’
सरकार से उन्होंने कहा कि सक्रिय होकर एजेंसियों को बुलाकर चर्चा करनी चाहिए और लौटने वाले नेपाली लोगों को सुगम बचाव का प्रबंध करना चाहिए।
सामान्य तौर पर कुवैत या सऊदी से लौटने में २०-३० हजार नेपाली रूपये खर्च आते थे, अब सिर्फ टिकट ही एक लाख से ऊपर और वीज़ा प्रक्रिया में एक लाख तक अतिरिक्त खर्च हो रहा है, कुल मिलाकर दो लाख से अधिक व्यय हो गया है, कार्की ने बताया।
वर्तमान में उन देशों में सुरक्षा से अधिक महंगे हवाई टिकट की समस्या है, सरकार को ही इस समस्या को सरल बनाना चाहिए, कार्की ने कहा।
‘लोग मानसिक तनाव में हैं, रोजगार खोने का डर है और बचा हुआ पैसा भी खत्म हो रहा है,’ कार्की ने कहा, ‘सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए।’






