
समाचार सारांश
- राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी से तनहुँ निर्वाचन क्षेत्र-२ से इंजीनियर श्रीराम न्यौपाने 32,687 वोट लेकर भारी मताधिकार से प्रतिनिधि सभा सदस्य बने हैं।
- न्यौपाने ने तनहुँ में लोहे के प्रसंस्करण उद्योग, हरित हाइड्रोजन ऊर्जा संयंत्र और सुरक्षित राजमार्ग जैसी विकास योजनाएं प्रस्तुत की हैं।
- ऊर्जा, जल स्रोत और अवसंरचना विशेषज्ञ होने के नाते उन्होंने 24 घंटे निर्माण कार्य चलाकर विकास बजट का 90 से 100 प्रतिशत खर्च करने के पक्ष में होने का बयान दिया है।
3 चैत्र, काठमांडू। राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के उम्मीदवार इंजीनियर श्रीराम न्यौपाने तनहुँ निर्वाचन क्षेत्र-२ से भारी मतों के अंतर से प्रतिनिधि सभा सदस्य चुने गए हैं। उन्होंने 32,687 मत प्राप्त कर नेपाली कांग्रेस के शंकर भंडारी को दोगुने से अधिक वोटों से परास्त किया और विजय हासिल की।
न्यौपाने के अनुसार, यह सफलता रास्वपा के तनहुँ में बढ़ते प्रभाव और नई पीढ़ी के नेतृत्व के प्रति जनता की आकांक्षा का स्पष्ट संकेत है। जिस तरह बालेन शाह और रास्वपा की केंद्रीय लहर ने देशव्यापी समर्थन पाया था, ठीक उसी तरह तनहुँ में न्यौपाने की व्यक्तिगत छवि ने जीत सुनिश्चित की है।
न्यौपाने ने 14 फागुन 2079 को डॉ. स्वर्णिम वाग्ले के साथ रास्वपा में प्रवेश किया। इससे पहले वे किसी भी राजनीतिक दल से संबद्ध नहीं थे। रास्वपा में शामिल होने के बाद उन्होंने तनहुँ-1 के अंतिम उपचुनाव में निर्वाचन परिचालन समिति संयोजक के रूप में काम किया और स्वर्णिम को तनहुँ में मुखर भूमिका निभाने में सहायता दी।
इस बार स्वर्णिम द्वारा तनहुँ-1 में निरंतरता बनाए रखने के बाद न्यौपाने ने तनहुँ-2 से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। उम्मीदवार बनने से पहले उन्होंने स्थानीय तह में सर्वेक्षण कर अपनी स्वीकार्यता की जांच भी की।
उन्होंने पृथ्वी राजमार्ग पर ओवरहेड क्रॉसिंग, लेनिंग और लाइटिंग द्वारा दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए सुरक्षित राजमार्ग की अवधारणा भी पेश की।
चुनाव के लगभग डेढ़ महीने पहले से तनहुँ-2 के 43 वार्डों में जाकर लोगों से मिले न्यौपाने ने टिकट मिलने से पहले सामाजिक कार्यों में सक्रियता दिखाई। उन्होंने सिक्लेस जलविद्युत आयोजन का अवलोकन कराया, दूर-दराज के सरकारी स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड लगाकर काठमांडू के स्कूलों के साथ लाइव कक्षाएं संचालित कीं।
ऐसे प्रयासों ने उनकी व्यक्तिगत छवि मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, न्यौपाने का दावा है। इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि के कारण वे तनहुँ के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कई संभावनाएं देखते हैं। रिसिङ-घिरिङ क्षेत्र में 10,000 हेक्टेयर से अधिक समतल सूखा टार है, जिसे कालीगण्डकी कॉरिडोर, 432 केवी ट्रांसमिशन लाइन, उपलब्ध पानी और धौबादी लोहे के खदानों से जोड़कर औद्योगिक केंद्र बनाया जा सकता है।
न्यौपाने की मुख्य अवधारणा लोहे के प्रसंस्करण उद्योग की है, जो धौबादी लोहे की खदान से कच्चा माल लाकर स्टील उत्पादन करेगा। वे दावा करते हैं कि यहां सैकड़ों वर्षों तक के लिए पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध है।

साथ ही, कालीगण्डकी के पानी का उपयोग कर हरित हाइड्रोजन ऊर्जा संयंत्र स्थापित करके रासायनिक खाद, विस्फोटक और अमोनिया का उत्पादन करने की योजना उन्होंने प्रस्तुत की है। वे कहते हैं कि बड़े सीमेंट उद्योग और रासायनिक खाद कारखाने भी सौर, पवन और जल ऊर्जा से चलाए जा सकते हैं। तनहुँ हाइड्रो के 21 किलोमीटर लंबे जलाशय को नेपाल का सबसे बड़ा बनाने, पर्यटन स्थलों, होमस्टे और गिट्टी-बालू उत्खनन द्वारा बहुउद्देश्यीय उपयोग का भी प्रस्ताव उन्होंने रखा है।
पृथ्वी राजमार्ग पर ओवरहेड क्रॉसिंग, लेनिंग और लाइटिंग कर दुर्घटना कम करने वाले सुरक्षित राजमार्ग की अवधारणा भी उन्होंने पेश की है।
ये सभी योजनाएं उन्होंने उम्मीदवार बनने से पहले ऊर्जा मंत्री कुलमान घिसिंह और छह मंत्रालयों के सचिवों को प्रस्तुत की थीं। मंत्रालयों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद भी उन्हें अनुभव हुआ कि काम में तेजी नहीं आई।
इसलिए अब वे रास्वपा की स्थिर सरकार, स्थिर नीति, ईमानदार नेतृत्व और निवेश-स्नेही माहौल में इन महत्वाकांक्षी सपनों को पूरा होने की उम्मीद रखते हैं।
ऊर्जा, जल स्रोत और अवसंरचना विशेषज्ञ न्यौपाने विकास बजट का 90 से 100 प्रतिशत खर्च करने के लिए तीन शिफ्टों में 24 घंटे निर्माण कार्य चलाकर रोजगार सृजन और सुशासन लाने के पक्षधर हैं।
ऐसी योजनाएं प्रस्तुत करने के पीछे उनकी गहरी इंजीनियरिंग और ऊर्जा क्षेत्र की विशेषज्ञता है। तनहुँ में जन्मे न्यौपाने ने गोर्खा के अमरज्योति जनता माव से एसएलसी किया और पोखरा के डब्ल्यूआरसी से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा तथा पुल्चोक कैम्पस से बीई सिविल और जल स्रोत इंजीनियरिंग में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है।
छात्र जीवन में स्वतंत्र विद्यार्थी यूनियन और नेविसंघ में सक्रिय रहते हुए भी वे तत्कालीन छात्र राजनीति के चरित्र को अपना नहीं मानते हुए कुछ समय बाद व्यावसायिक जीवन में लौटे। 25 वर्ष की आयु में सरकारी नौकरी छोड़ी और प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज खोला। 29 वर्ष की उम्र में एडवांस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट की स्थापना की और उसके प्राचार्य बने।
मेलम्ची जल परियोजना की सुरंग और नागढुंगा सुरंग मार्ग जैसे बड़े कार्यों का प्रबंधन कर चुके न्यौपाने को नेपाल सरकार ने प्रबल जनसेवा श्री से सम्मानित किया है। बावजूद इसके वे कहते हैं कि सम्मान के अभाव, भ्रष्टाचार और सुस्त शासन व्यवस्था के कारण राजनीति में आए हैं।
2062/63 के आन्दोलन के बाद 601 संविधान सभा सदस्यों को नि:शुल्क इंटरनेट एवं ईमेल प्रशिक्षण दिया गया था, पर अपेक्षित भागीदारी न होने से तकनीक और नेतृत्व के बीच अंतर स्पष्ट हुआ। वे मानते हैं कि वर्तमान जेनरेशन जेड के आंदोलन को तकनीक से जोड़ने में नेतृत्व असफल रहा है।
ऊर्जा, जल स्रोत और अवसंरचना विशेषज्ञ न्यौपाने विकास बजट का 90 से 100 प्रतिशत खर्च कर तीन शिफ्टों में 24 घंटे निर्माण कार्य संचालित करके रोजगार और सुशासन लाने के पक्ष में हैं।






