रजनी का बयान: केवल खिलाड़ी बनकर नहीं चलेगा, राजनीति से देश के लिए कुछ करना होगा

वह कहती हैं, ‘जिस प्रकार व्यायाम ने मुझे नया जीवन दिया, उसी प्रकार अब मैं राजनीति के माध्यम से देश के लिए कुछ करना चाहती हूं।’
समाचार सारांश
समीक्षा करके तैयार किया गया।
- राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी से समानुपातिक सांसद बनी बॉडीबिल्डर रजनी श्रेष्ठ ने जेनजी आंदोलन के बाद राजनीति में प्रवेश किया है।
- रजनी ने अंतरराष्ट्रीय बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिताओं में नेपाल को पदक दिलाए हैं और खेल क्षेत्र के विकास पर जोर दे रही हैं।
- सांसद बनने के बाद रजनी ने खिलाड़ियों के लिए देश में ही खेलने वाले वातावरण बनाने और सुकुम्बासी समस्या के समाधान की योजना बनाई है।
3 चैत्र, काठमांडू। गत भदौ 23-24 तक बॉडीबिल्डर रजनी श्रेष्ठ को राजनीति में खास दिलचस्पी नहीं थी। वह केवल यह सोचती थीं कि किस तरह नेपाल को अंतरराष्ट्रीय पदक दिलाया जाए। लेकिन भदौ में हुए जेनजी आंदोलन के बाद राजनीति में आकर कुछ करने की इच्छा जागी।
वह कहती हैं, ‘आंदोलन में कई बच्चे घायल हुए और कई ने अपनी जान गंवाई। यह देखकर मैंने महसूस किया कि मैं केवल खिलाड़ी बनकर नहीं रह सकती, अब देश के लिए कुछ करना होगा।’
इसके बाद रजनी ने राजनीति में कदम रखा। वह राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) की समानुपातिक सूची से राजनीति में आईं। ‘खिलाड़ी, कलाकार और व्यापारी भी राजनीति में आना चाहिए। भ्रष्टाचार को खत्म करना चाहिए और जेनजी की मांगें पूरी करनी चाहिए, इसलिए मैं रास्वपा से जुड़ी हूं,’ वह कहती हैं।
जेनजी आंदोलन के बाद राजनीति में आई रजनी 21 फागुन को चुनाव के बाद संसद में प्रवेश कर गईं। वह रास्वपा की समानुपातिक सूची से सांसद बनीं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं से नेपाल को पदक दिलाने वाली रजनी सांसद बनने के बाद देश में ही खिलाड़ियों के खेलने का वातावरण बनाने की सोच रही हैं। खेल क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहते हुए उन्होंने विदेश जाने वाले खिलाड़ियों की कठिनाइयाँ भी समझीं।
इसलिए फुटबॉल, क्रिकेट ही नहीं, सभी खेलों को प्राथमिकता देते हुए रजनी अपने गृह जिले मोरङ के गांव-गांव जाकर मतदाताओं से बातचीत की। इससे उन्हें स्थानीय समस्याएँ समझने में मदद मिली और संवेदनशीलता बढ़ी।
‘चाहे नगरपालिका हो या अन्य जगहें, सड़क और फोन नेटवर्क सब जगह नहीं है और सुकुम्बासी समस्या मैंने सीधे देखी,’ वह बताती हैं।
‘गांव-गांव की समस्याएं देख कर राजनीति में आकर परिवर्तन के लिए और ऊर्जा मिली है,’ रजनी कहती हैं।
खेल के साथ-साथ वे इन समस्याओं को भी हल करना चाहती हैं। उनकी इच्छा है, ‘केवल खेल क्षेत्र में ही नहीं, सुकुम्बासी की आवाज भी उठानी होगी। लैंगिक हिंसा जैसी समस्याएं हैं और बहुत से खिलाड़ी व युवा विदेश चले गए हैं।’
वह प्राथमिक स्तर से विद्यार्थियों को आत्मरक्षा के लिए व्यायाम और विशेष प्रशिक्षण देने की योजना बना रही हैं, जिससे महिलाएं हिंसा से बच सकें और स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके, उनकी ऐसी उम्मीद है।
रोग पर काबू पाकर बनीं बॉडीबिल्डर रजनी
रजनी खेल क्षेत्र में सफल होने से पहले गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। उनकी गर्दन में मांसपेशियों में गांठ होने के कारण अस्पताल जाने लगीं लेकिन समस्या ठीक नहीं हुई। दो साल तक डिप्रेशन झेल रही थीं तब उनके पति समीर श्रेष्ठ ने उन्हें जिम जाने की सलाह दी।
जिम जाने के बाद उनकी सेहत में काफी सुधार हुआ। ‘पति के साथ मित्रपार्क के जिम गई और वजन प्रशिक्षण पर ध्यान दिया। एक-डेढ़ महीने में गांठ कम होने लगी,’ रजनी याद करती हैं।

इसके बाद जिम उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया। जिम संचालक अंजन शाहि ने काठमांडू स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने की सलाह दी। पति भी सहमत हुए और यहीं से उनका बॉडीबिल्डिंग करियर शुरू हुआ। बीमारी को हराकर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया।
रजनी ने पहली बार महिला फिजिक्स वर्ग में प्रतिस्पर्धा की। साल 2017 में मिस्टर काठमांडू में महिला फिजिक्स में प्रथम स्थान प्राप्त किया। फिर 2019 में इंडोनेशिया के बातम में हुए 53वें एशियन बॉडीबिल्डिंग एवं फिजिक्स स्पोर्ट्स चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर दो पदक जीते।
साल 2023 में नेपाल में हुए 55वें एशियन बॉडीबिल्डिंग चैंपियनशिप में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। महिला फिजिक्स वर्ग से शुरू करके रजनी ने बॉडीबिल्डिंग में प्रतिस्पर्धा करते हुए सफलता की श्रृंखला बनाई।
रजनी ने राष्ट्रीय, दक्षिण एशियाई, एशियाई और विश्व स्तरीय प्रतियोगिताओं में नेपाल को पदक दिलाए हैं। सांसद बनने के बाद उन्होंने कहा, ‘जिस प्रकार व्यायाम ने मुझे नया जीवन दिया, उसी प्रकार मैं राजनीति के माध्यम से देश के लिए कुछ करना चाहती हूं।’ उन्होंने सांसद बनने के बाद भी खेल क्षेत्र को लगातार विकसित करने का भरोसा जताया।
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