‘बालेन लहर’ की तुलना कांग्रेस (आई) से करते हुए शंकर पोखरेल ने लिखा– लहर स्थायी नहीं होती

समाचार सारांश
- नेकपा एमाले के महासचिव शंकर पोखरेल ने चुनावी जीत से दीर्घकालीन राजनीतिक सफलता सुनिश्चित न होने की बात कही है।
- पोखरेल ने भारत के सन् 1984 के चुनाव में कांग्रेस की सफलता को उदाहरण देते हुए बताया कि दीर्घकालीन सफलता संगठन और निरंतर जनसमर्थन पर निर्भर रहती है।
- नेपाल में भी चुनावी लहर से ज्यादा जनअपेक्षा को पूरा करने की क्षमता और संगठन मजबूत करने को दीर्घकालीन सफलता का आधार बताया है।
काठमांडू। नेकपा एमाले के महासचिव शंकर पोखरेल ने एक बार की चुनावी जीत से दीर्घकालीन राजनीतिक सफलता सुनिश्चित नहीं होने की टिप्पणी की है। पोखरेल ने यह विचार आज अपने फेसबुक पेज पर साझा किया।
भारत के 1984 के आम चुनाव का उदाहरण देते हुए, उस समय की ‘राजीव लहर’ की तुलना वर्तमान नेपाल में देखे जा रहे ‘बालेन लहर’ से करते हुए उन्होंने लिखा है, ‘‘चुनावी लहर या एक बार की बड़ी जीत से ही दीर्घकालीन राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित नहीं होती।’’
पोखरेल के अनुसार, 1984 में भारत के लोकसभा चुनाव में राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस (आई) ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की थी। लेकिन बाद के वर्षों में कांग्रेस कमजोर होती गई और भाजपा धीरे-धीरे सशक्त हो गई। उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा के लगातार तीसरे कार्यकाल तक सरकार में आने का उदाहरण देते हुए कहा कि दीर्घकालीन सफलता संगठन, कार्यक्षमता और लगातार जनसमर्थन पर निर्भर करती है।
नेपाल के संदर्भ में भी, केवल चुनावी ‘लहर’ निर्णायक नहीं होती, पोखरेल ने कहा, ‘‘जनअपेक्षा पूरा करने की क्षमता, संगठन का सुदृढ़ीकरण और निरंतर जनसमर्थन बनाए रखने की रणनीति ही दीर्घकालीन सफलता की आधारशिला हैं।’’
उन्होंने यह सीख जीतने और हारने दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण होने का भी उल्लेख किया है।






