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नारायणगढ-मुग्लिन सड़क के 43 स्थान भू-स्खलन के खतरे में

फाइल तस्वीर


संपादकीय सारांश

  • नारायणगढ-मुग्लिन सड़कखंड के 43 स्थान भू-स्खलन के जोखिम में हैं, जिनमें आठ स्थान अत्यधिक जोखिम वाले हैं।
  • सड़क डिविजन कार्यालय भरतपुर ने तुइन, काली और नाम्सी नदियों को उच्च जोखिम के रूप में चिन्हित किया है।
  • भू-स्खलन रोकथाम के लिए 25 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं और मानसून से पहले कार्य आरंभ करने की तैयारी है।

४ चैत, चितवन। नारायणगढ-मुग्लिन सड़कखंड के 43 स्थान भू-स्खलन के जोखिम में हैं। सड़क डिविजन कार्यालय भरतपुर के अध्ययन के अनुसार, आठ स्थान अत्यधिक जोखिम में, 22 स्थान जोखिम में और 13 स्थान सामान्य जोखिम में हैं। इस अध्ययन में सर्वाधिक जोखिम वाले स्थान तुइन नदी के किनारे पाए गए हैं।

कार्यालय के इंजीनियर अर्जुन घिमिरे के अनुसार, तुइन के साथ-साथ काली और नाम्सी नदियाँ भी उच्च जोखिम में हैं। उन्होंने बताया कि तुइन नदी से लेकर चिसेन्जी के बीच का भाग, चार किलो क्षेत्र के दो स्थान, मौरी नदी और सेती दोभान में भी भू-स्खलन का अत्यधिक खतरा है।

इंजीनियर घिमिरे ने कहा, “तुइन और चिसेन्जी के बीच पत्थर गिरने की समस्या बनी हुई है। तुइन, काली और नाम्सी नदियों के किनारों पर भू-स्खलन की जोखिम अधिक है। चार किलो क्षेत्र के दो स्थानों में से एक में भू-स्खलन और दूसरे में कीचड़ गिरने की समस्या है। मौरी नदी और सेती दोभान में भी दलदलों के साथ भू-स्खलन का खतरा है।” उन्होंने बताया कि 16 किलो, 17 किलो, डुम्रे नदी, सिमलताल आदि स्थल भी जोखिम में हैं।

पिछले वर्ष से इन स्थलों में भू-स्खलन का खतरा बना हुआ है। कार्यालय के प्रमुख नारायण लामिछाने के अनुसार, तुइन, काली और नाम्सी नदियों पर भू-स्खलन रोकथाम के लिए खरीद योजना माघ 23 को सड़क विभाग को स्वीकृति हेतु भेजी जा चुकी है।

उन्होंने बताया कि विभाग ने डिज़ाइन कार्य अंतिम चरण में पहुँचाया है। इन क्षेत्रों में 25 करोड़ रुपये की आपदा फंड से भू-स्खलन रोकने की तैयारी चल रही है।

प्रमुख लामिछाने के अनुसार अन्य क्षेत्रों में भू-स्खलन रोकथाम के लिए 20 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। टेंडर आमंत्रण की तैयारी पूरी हो चुकी है और मानचित्रण भी पूर्ण होने के कारण कुछ ही दिनों में टेंडर जारी कर मानसून से पहले जोखिम क्षेत्रों पर काम शुरू किया जाएगा। बारिश शुरू होने पर सड़क पर भू-स्खलन का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए कार्यालय आवश्यक तैयारी कर रहा है।

कुछ वर्ष पहले सड़क विस्तार के दौरान भित्ति काटी गई थी। भित्ति कटने और नए स्थलों पर दलदल सहित भू-स्खलन के कारण मानसून के दौरान इस सड़क पर समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इस सड़क मार्ग से दैनिक 10 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। इसे राजधानी काठमांडू के लिए जीवनरेखा माना जाता है।