आंतरिक संघर्ष, विशेष महाधिवेशन में नेतृत्व परिवर्तन और २१ फागुन के चुनाव में पार्टी को मिली हार के कारण कांग्रेस के भीतर का ‘संकटकाल’ अभी भी जारी दिख रहा है। इस संकट का समाधान आगामी महाधिवेशन से करने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन वैशाख महीने में इसके आयोजन को लेकर कोई निश्चितता नहीं है।