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रवि लामिछाने के जिम्मेदार बयानों की प्रवृत्ति

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा के बाद AI द्वारा तैयार।

  • रास्वपा के अध्यक्ष रवि लामिछाने ने दो-तिहाई के करीब बहुमत मिलने के बाद अपनी शैली को शांत, संयमित और जिम्मेदार बनाने की बात कही है।
  • लामिछाने ने पार्टी के सांसदों से जनता के सेवक बनने और सरकारी अस्पतालों में उपचार सेवाएं लेने का आग्रह किया है।
  • अध्यक्ष लामिछाने ने विपक्षी पर तुच्छ शैली में आक्रमण न करने और सोशल मीडिया पर आक्रामकता बंद कराने का निर्देश दिया है।

४ चैत्र, काठमांडू। आम चुनाव के सन्दर्भ में रास्वपा अध्यक्ष रवि लामिछाने के बयान संतुलित और तथ्यपरक नजर आते हैं। लगभग दो-तिहाई के करीब अभूतपूर्व बहुमत मिलने के बाद उन्होंने अपनी शैली को शांत, संयमित और जिम्मेदार बनाते हुए व्यवस्थित किया है।

निर्वाचन से पहले दिए गए भाषणों में वे अपने निर्वाचन क्षेत्र के दौरे करते हुए मतदाताओं से अंतिम इच्छा जताने का आग्रह कर रहे थे। पत्रकारों के प्रति भी कुछ आक्रामक प्रतिक्रिया प्रकट हुई थी, और उन्होंने कहा था, ‘प्रश्नों की जिम्मेदारी हमने किसी को नहीं दी है।’

पूर्व में संचारकर्मी रहे लामिछाने ने अपने शब्दों को चुस्त रखते हुए आक्रामक अभिव्यक्तियां दीं, जबकि प्रधानमंत्री पद के लिए प्रस्तावित नेता बालेन शाह कम बोलकर अपनी पहचान बना रहे थे।

बुधवार को रास्वपा के सांसदों को दो दिवसीय अभिमुखीकरण प्रशिक्षण के समापन समारोह में अध्यक्ष लामिछाने की शैली में पूर्ण बदलाव देखा गया। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष के रूप में राष्ट्रीय जीवन के विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों को अपने नेतृत्व पर विश्वास करने का आग्रह किया।

उन्होंने व्यावसायिक क्षेत्र, अंतरराष्ट्रीय समुदाय और निवेशकों के साथ भी विश्वास स्थापित करने का प्रयास किया।

लामिछाने ने अपनी पूर्व आक्रामक शैली को नई जिम्मेदारी के साथ बदलने का संकेत दिया। उन्होंने समर्थकों को सोशल मीडिया पर देखे जाने वाले आक्रमण और तनाव को कम करने का निर्देश दिया और विपक्ष के साथ तुच्छ शैली में जुड़ने से रोकने का आग्रह किया।

पार्टी के सांसदों से स्पष्ट रूप से शासक बनने के बजाय जनता के सेवक बनने का आह्वान किया। उन्होंने लोगों के साथ समानुभूति बनाए रखते हुए आगे बढ़ने का निर्देश दिया। सरकारी अस्पतालों में इलाज करवाने के विषय में भी सांसदों से अपील की गई।

लामिछाने ने कांग्रेस, UML और माओवादी के नाम लिए बिना ही उन पार्टियों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा, “इतिहास के योगदान का सम्मान करते हैं, अब भविष्य की जिम्मेदारी रास्वपा उठाएगा।”

पार्टी की स्थापना से तीन साल और छह महीने के लंबे समय में चुनौतियों के बावजूद जनता का सम्मान पाने की बात कही।

सरकार में आकर अपनी उपलब्धियों के आधार पर मूल्यांकन करवाने की प्रतिबद्धता जताई।

उन्होंने कहा कि भले ही जनता नेतृत्‍व से असंतुष्ट हो, उन्होंने ३५ वर्षों तक प्रतीक्षा की, किंतु पार्टी को ३५ दिन भी इंतजार नहीं करवाना चाहिए। सही और स्पष्ट कार्य करने की अपील की। सांसदों को निजी जीवन की स्वतंत्रता वापिस छोड़ने का निर्देश भी दिया। उन्होंने कहा, ‘पार्टी के अंदर स्वतंत्रता है, लेकिन अनुशासन भी वहीं होता है।’ “इस बार हम राइट टू रिकॉल (प्रत्याह्वान) कड़ाई से लागू करेंगे।”

मंत्री बनने की प्रतिस्पर्धा में न जाने वाले सांसदों से व्यावहारिक और सतर्क रहने को कहा। स्वयं के स्वार्थी समूह विभिन्न बहानों से प्रभाव डालने की कोशिश कर सकते हैं, इसलिए सतर्क रहने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, “यहां आनंद या उत्सव का माहौल नहीं है, यहां शहीद की माता भी हैं जिन्होंने अपने बेटे को खो दिया और संसद पहुंचीं।”

पूर्व में सरकार गठन के अनुभव को याद करते हुए कहा, “सरकार बनने के दिन से ही उस पर प्रहार होता है, हमें सतर्क रहना चाहिए।”

वर्तमान संविधान और व्यवस्था में दृढ़ विश्वास है, इसलिए आशंकित न होने का निर्देश दिया। नेपाली जनता, जो कभी किसी पर भरोसा नहीं करती थी, अब रास्वपा पर विश्वास कर रही है, सांसदों को इसके महत्व को समझना चाहिए।

वरिष्ठ नेता बालेन शाह इस कार्यक्रम में अनुपस्थित रहे, और लामिछाने ने अपने भाषण में उनका नाम लेने से बचा।

बालेन स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं, पार्टी ने भी जानकारी दी है। फिर भी पार्टी की मुख्य बैठक में उनकी उपस्थिति से प्रश्न उठे हैं।

अब तक बालेन एक बार छोड़कर पार्टी कार्यालय या सचिवालय की किसी बैठक में शामिल नहीं हुए। उन्हें कार्यक्रम में विशेष सीट दी गई थी।