समाचार सारांश
- हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑरबान ने यूक्रेन-रूस संघर्ष में अपने देश के शामिल न होने की स्पष्टता दी है।
- ऑरबान ने यूरोपीय संघ पर संघर्ष को बढ़ावा देने के लिए यूक्रेन को हथियार और पैसे भेजने का आरोप लगाया है।
- उन्होंने कहा है कि आगामी 12 अप्रैल को होने वाले चुनाव में उनकी पार्टी विजयी हुई तो हंगरी को युद्ध से दूर रखेंगे।
हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑरबान ने यूरोप को युद्ध के कगार पर पहुंचने की चेतावनी देते हुए कहा है कि उनका देश किसी भी हालत में यूक्रेन-रूस संघर्ष में शामिल नहीं होगा।
डनाउवाचवारोस शहर में आयोजित एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ऑरबान ने यूरोपीय संघ के नेतृत्व पर संघर्ष को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, “फिलहाल वे यूक्रेन को हथियार और पैसे भेज रहे हैं, लेकिन बाद में यूरोपीय सैनिकों को भी वहाँ भेजने की सहमति बन चुकी है।”
आगामी 12 अप्रैल को होने वाले संसदीय चुनाव के प्रचार के दौरान ऑरबान ने कहा कि उनकी पार्टी के जीतने पर हंगरी को इस युद्ध से दूर रखा जाएगा।
उन्होंने दावा किया कि हंगरी न तो यूक्रेन को हथियार भेजेगा और न ही अपने पैसे या सैनिक परिचालन में लगाएगा। यूरोप में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ऑरबान की यह बात यूरोपीय संघ के अंदर मतभेद को और स्पष्ट करती है।
हंगरी पहले भी यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य सहायता को रोकने के लिए कई बार ‘विटो’ का इस्तेमाल कर चुका है।







