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आम जनता से लेकर ट्रैफिक पुलिस तक ट्रैफिक टिपर की परेशानी में گرفتار

समाचार सारांश

  • जनकपुरधाम के सिक्स लेन सड़क पर टिपर द्वारा गिट्टी बिखेरने से यातायात में समस्या उत्पन्न हो रही है।
  • फागुन ११ को जनकपुर में टिपर की ठोकर से ट्रैफिक पुलिस जवान चन्द्रकला महतो की मौत हुई थी।
  • धनुषा पुलिस ने बताया कि आर्थिक वर्ष २०८२/०८३ में टिपरों पर कार्रवाई कम हुई और जेनजी आंदोलन इसका कारण रहा है।

५ चैत, जनकपुरधाम। जनकपुरधाम के पीडारी चौक स्थित सिक्स लेन सड़क पर गुरूवार की सुबह गिट्टी भर-भरकर फैली हुई थी। करीब १०० मीटर तक तीन लेनों में फैली गिट्टी के कारण आम जनता और वाहनों के आवागमन में बाधा उत्पन्न हुई थी।

एक पैदल यात्री ने कहा, ‘ट्रैफिक पुलिस और टिपर चालकों के बीच चल रही सेटिंग का नतीजा यही है। टिपर जो चाहे कर सकता है और कानून उन्हें छू नहीं पाता।’

दूसरे दिनों की तुलना में दोपहर में ट्रैफिक पुलिस ने स्वयं उस गिट्टी को साफ किया।

जनकपुर में टिपर द्वारा लोगों को टक्कर देना और ओवरलोड करके सड़क पर गिट्टी-रेत फैलाना सामान्य हो गया है। गत पुस ३० और फागुन ११ की दुर्घटनाएँ इसका प्रमाण हैं, जिनमें आम जनता से लेकर ट्रैफिक पुलिस तक इस समस्या के शिकार हुए हैं।

फागुन ११ को दोपहर जनकपुर विश्वकर्मा चौक पर तेज गति से आ रहे टिपर ने पीछे से टक्कर मारी, जिससे ट्रैफिक पुलिस जवान चन्द्रकला महतो की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। महतो २६ वर्षीया थीं और महोत्तरी के बर्दिवास स्थित ट्रैफिक पुलिस कार्यालय में कार्यरत थीं। वे काम के सिलसिले में प्रदेश पुलिस कार्यालय आई हुई थीं।

पुलिस के अनुसार, पुलिस निरीक्षक विजयकुमार यादव द्वारा चलाए जा रहे प्रदेश २-०२,००२ प ७३५२ नंबर के मोटरसाइकिल पर वह पीछे सवार थीं। जिरोमाइल की ओर जाते समय प्रदेश २-०३,००१ क ०१०४ नंबर के टिपर ने पीछे से टक्कर मारी। इस दुर्घटना में निरीक्षक यादव सामान्य घायल हुए।

टिपर द्वारा सड़क पर फैलाई गई गिट्टी–पथर। तस्वीर: अनलाइनखबर

पहले भी पुस ३० को जनकपुर के व्यस्त बाजार क्षेत्र में दो अलग-अलग घटनाओं में तेज गति से आ रहे टिपरों ने पीछे से टक्कर मारी थी। मिल्स एरिया में ना८ख ८२५७ नंबर के टिपर ने टक्कर दी, जिससे ज७प २८३७ नंबर के मोटरसाइकिल चालक करीब ४५ वर्ष के पुरुष की मौत घटनास्थल पर ही हो गई।

उसी दिन सुबह प्रदेश २-००३१ क ०७७५ नंबर के टिपर से टक्कर लगने पर मिथिला विहारी नगरपालिका-७ की २७ वर्षीय नितु साह गंभीर रूप से घायल हुईं।

टिपर की लापरवाही बढ़ती जा रही है और ट्रैफिक पुलिस सक्रिय नहीं होने के कारण स्थानीय लोग शिकायत करते हैं। ओवरलोड करना, बालू उड़ाना और पानी लीक होना तो पुरानी प्रवृत्ति है, लेकिन सिक्स लेन सड़क पर ओवरलोड टिपरों से उडती बालू मोटरसाइकिल, साइकिल चालकों और पैदल यात्रियों को प्रभावित कर रही है। इससे कपड़े गंदे होने के अलावा आंखों में बालू पड़ने से दुर्घटना की संभावना भी बढ़ गई है।

दैनिक साइकिल चलाने वाले महोत्तरी के पीपरा गाउँपालिका-१ के जयनाथ झाले धूल और बालू के कारण स्वास्थ्य प्रभावित होने की शिकायत की।

‘टिपर और ट्रैक्टर ओवरलोड बालू-गिट्टी लेकर चलते हैं, लेकिन उन्हें ठीक से ढ़कते नहीं। बालू उड़कर आंखों में पड़ता है और शरीर पर भी धूल लगती है,’ उन्होंने कहा, ‘श्वास–प्रश्वास पर भी असर पड़ता है। यहां सभी को सुरक्षित तरीके से चलने देना चाहिए।’ अधिकांश यात्री इसी शिकायत को लेकर परेशान हैं।

टिपर और ट्रैक्टर के ओवरलोड की वजह से सड़क के कुछ लेन पूरी तरह बालू और गिट्टी से ढक गए हैं, जिनमें समय-समय पर दुर्घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन किसी की भी सुध नहीं लेता।

ढल्केवर की ओर से अवैध ओवरलोड करके आने वाले कई टिपर ट्रैफिक पुलिस के चेकपोस्ट पार कर जनकपुरधाम बाजार तक पहुंच जाते हैं। मोटरसाइकिल की जांच के समय पुलिस का ध्यान ओवरलोड ट्रैफिक पर नहीं जाता, जिससे ये समस्याएं बढ़ती हैं। पुलिस सेटिंग के कारण टिपरों की गलत हरकतों पर अंकुश नहीं लगा पाती, यह सूचना स्रोतों से मिली है।

‘ट्रैफिक पुलिस मासिक रूप से टिपर और ट्रैक्टर मालिकों से रकम सेटिंग के नाम पर लेती है,’ एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने बताया, ‘इसलिए वे जो चाहे कर जाते हैं। कभी-कभी नाम मात्र की ही कार्रवाई होती है। हर चालक का नंबर ट्रैफिक के पास है।’

टिपर के कारण सड़क जलमग्न हुई। तस्वीर : अनलाइनखबर

एक टिपर चालक ने भी बताया कि ट्रैफिक पुलिस मासिक तौर पर पैसा लेती है।

टिपर चालक अपने पक्ष में कहते हैं कि उपभोक्ताओं की मांग के अनुसार ही ओवरलोड बालू-गिट्टी ले जाते हैं। ‘ग्राहक अधिक सामान लाने को कहते हैं, कम लाने पर सामान स्वीकार नहीं करते। इसलिए ओवरलोड करना पड़ता है,’ मुजेलिया के ट्रैफिक पुलिस कार्यालय के सामने मिले टिपर चालक ने कहा।

धनुषा महेन्द्रनगर के रहने वाले दूसरे टिपर चालक श्याम यादव ने क्रसर में लाइन लगाकर बालू लेने पर पानी के लीक होने की समस्या बताई।

‘लाइन लगाकर बालू लेना पड़ता है। लोड किए दस घंटे बाद भी पानी लीक होना बंद नहीं होता। इसलिए सभी को समस्या होती है,’ उन्होंने कहा।

टिपर का आतंक बढ़ रहा है और कार्रवाई के आंकड़े कम होने से ट्रैफिक पुलिस पर संदेह भी बढ़ रहा है।

जिला ट्रैफिक पुलिस कार्यालय धनुषा के अनुसार चालू आर्थिक वर्ष २०८२/०८३ (साउन से माघ तक) में सात महीनों में १५३८ टिपर, ट्रैक्टर और ट्रकों को कार्रवाई किया गया, जबकि पिछले वर्ष २०८१/०८२ में मात्र ४८५६ कार्रवाई हुई थी। इससे पता चलता है कि टिपरों के खिलाफ कार्रवाई कम हुई है।

धनुषा के पुलिस प्रमुख सूर्यबहादुर साही ने बताया कि जेनजी आंदोलन के कारण पिछले कार्यकाल की तरह वह कार्रवाई नहीं कर सके।

‘जेनजी आंदोलन के कारण ३-४ महीने कार्रवाई प्रभावित हुई। इसलिए संख्या कम हुई,’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन हम टिपरों की बदमाशी को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।’

उन्होंने कहा, ‘समय-समय पर टिपर चालकों और साहूओं से संवाद करते हैं, जागरूकता कार्यक्रम भी होते हैं। सड़क रोक-थाम के कार्य भी किए जा रहे हैं। फिर भी प्रयास जारी हैं।’

धनुषा के दूसरे पुलिस प्रमुख रुगमबहादुर कुँवर के मुताबिक हाल की २-३ घटनाओं के कारण जनकपुरधाम बाजार में दोपहर के समय टिपरों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।