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माया आश्रय लेने मायके गई थीं, बच्चों समेत भेरी नदी में कूद गईं

५ चैत, सुर्खेत (गुर्भाकोट) । ३ चैत, मंगलवार पूर्वी सुर्खेत के गुर्भाकोट-७, मेहेलकुना में भेरी नदी के किनारे सैकड़ों स्थानीय लोग एकत्रित हुए थे। गुर्भाकोट के मध्य भाग से बहने वाली भेरी नदी चैत में भी उफनाई हुई है। फिर भी नदी किनारे का मैदान सन्नाटे में डूबा हुआ है।

हिमनदी पिघलने से बहने वाली भेरी की साफ पानी पर तैर रही हैं सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस की ३-४ नावें। ‘सलाम साब! हमने ६-७ किलोमीटर नीचे तक खोज लिया है, लेकिन कहीं कुछ नहीं मिला, साहब,’ नाव पर मौजूद एक जवान ने मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी को रिपोर्ट दी।

वे तीन दिनों से अपनी ही मां के साथ भेरी नदी में गिर गए एक पाँच वर्षीय बच्चे की खोज में लगे हुए हैं, लेकिन बच्चे का कोई पता नहीं चल पाया है। भेरी के इस किनारे से ही आइतवार शाम गुर्भाकोट-१२ पिप्ले की ३८ वर्षीय माया कठायत ने अपनी ११ वर्षीय बेटी और पाँच वर्षीय बेटे को लेकर नदी में छलांग लगाई थी।

सोमवार शाम लेकबेसी-३ के पटारे में माया का शव मिला था, जबकि बेटी का शव मंगलवार सुबह गुर्भाकोट-१२ के भेरी किनारे पाया गया। पाँच वर्षीय बेटा अभी भी लापता है।救援 दल चार दिनों से खोजबीन में लगे हुए हैं।

भेरी किनारे जमा भीड़ की एक ही जिज्ञासा थी – माया ने ऐसा कठोर निर्णय क्यों लिया? ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने अपने बच्चों सहित भेरी में छलांग लगा दी?

आत्महत्या के कारणों को लेकर न तो स्थानीय लोग कुछ जान पाए और न ही पुलिस को। माया के पति भी घटना स्थल पर मौजूद थे।

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२९ फागुन शुक्रवार शाम ६ बजे माया गुर्भाकोट-१२ में अपने छोटे पिता के घर पहुंचीं। उनके साथ थीं ११ वर्षीय बेटी आशा और ५ वर्षीय बेटा दीपक कठायत। वह चार वर्षों के बाद वहां गई थीं।

अचानक आई बेटी के कारण पिता का परिवार प्रसन्न था। ‘इतने समय बाद कहाँ से आ गई?’ छोटे पिता अमरदेव गिरी पूछते हैं। माया ने उत्तर दिया कि वह नसों की बीमारी से पीड़ित थीं और नेपालगंज से इलाज करवाकर आई हैं।

अमरदेव गिरी

कुछ देर बाद अमरदेव को माया के पति भूपेन्द्र कठायत ने फोन किया। ‘ससुराल, वहाँ बेटी आई है क्या?’ अमरदेव ने बताया कि बेटी आई है। भूपेन्द्र ने कहा कि वह उसे लेने आने वाला है, इसलिए बेटी को घर के ऊपर रास्ते से भेजो।

लेकिन अमरदेव ने घर आने को कहा। भूपेन्द्र मान गए। माया ने खाना खाकर बच्चों के साथ अपने पति के पास जाने के लिए घर छोड़ दिया। कुछ देर बाद फिर से भूपेन्द्र ने फोन कर कहा, ‘ससुराल, मैं ऊपर हूं, उसे जल्दी भेजो।’ अमरदेव ने जवाब दिया कि वह पहले ही घर से निकल चुकी है।

‘इसके बाद भूपेन्द्र भी आए, हमनें लगभग आधे घंटे तक दूर-दूर तक खोजा, पर कहीं नहीं मिली,’ अमरदेव ने बताया, ‘फिर पता चला कि वह यहीं कहीं छुपी बैठी थी, क्योंकि पति से डरती थी कि वह मार देगा।’ अमरदेव के परिवार ने सबको घर बुलाया।

माया ने अमरदेव को बताया कि भूपेन्द्र हमेशा उन्हें मारता था, दूसरी लड़कियों से संबंध रखता था, घर में एक चाकू रखता था और उस चाकू से मारने की धमकी देता था। यह सुनते हुए भी भूपेन्द्र ने माया को मायके वालों के सामने तीन-चार बार मुक्के मारे, लेकिन अमरदेव का परिवार बीच में आ गया।

भूपेन्द्र कठायत

‘हमें बाद में पता चला कि बेटी नेपालगंज से नहीं, बल्कि बुजुर्गों के बीच हुए झगड़े के बाद घर आई थी,’ अमरदेव ने कहा, ‘फिर मैंने रात में उसे जाने नहीं दिया। पति नशे में था। कहा कि सुबह सब ठीक हो जाएगा, तब बात करेंगे।’

लेकिन भूपेन्द्र ने भांग पिलाकर कहा कि उनका घर नहीं चलेगा और अब वे अलग रहेंगे। पत्नी की बात न मानने पर बोले कि नंगा बेटी (गरीब बेटी) कहा करती है, लेकिन सुरक्षा के लिए चाकू घर में रखा है और उसे दिखाया नहीं।

अमरदेव ने जवाब दिया कि जो भी होगा कल होगा और भूपेन्द्र को घर भेज दिया। वे खुद 10:30 बजे सोने चले गए।

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३० फागुन शनिवार सुबह अमरदेव घर के काम से बाहर गए। दोपहर १२ बजे घर आए और खाना खाया। फिर फिर से दूसरे काम के लिए निकले। तब तक माया के साथ कोई बात नहीं हुई थी। शाम को घर आए तो सभी सो चुके थे। सुबह आने वाले भूपेन्द्र रात ९ बजे अमरदेव के घर आए।

अमरदेव ने भूपेन्द्र को समझाया। वह दिन भूपेन्द्र थोड़ा शांत थे। ‘मैंने कहा कि कल सुबह बात करके बेटी को लेकर जाओ। फिर मैं सोने चला गया। भूपेन्द्र को भी सोने को कहा, लेकिन वे 11 बजे चले गए,’ अमरदेव ने बताया।

१ चैत, रविवार सुबह ६ बजे माया अपने पति से बात ठीक होने और मारपीट बंद करने की सहमति के बाद घर जाने के लिए छोटे पिता के घर से गईं। अमरदेव ने भी समझा कि झगड़ा सुलझ गया होगा।

दोपहर लगभग 12:30 बजे भूपेन्द्र अमरदेव के घर आए और पूछा, “आपकी बेटी कहाँ है?”। अमरदेव ने कहा कि बेटी सुबह ही घर से निकल चुकी है। ‘मैं अचंभित रह गया। मैंने पूछा कि क्या आपको उसकी खबर नहीं? वह कराह रही थी,’ अमरदेव ने कहा।

अमरदेव भी खोज में लगे, लेकिन कहीं पता नहीं चला। उसी दिन शाम भूपेन्द्र ने फोन किया और बताया कि भेरी किनारे कपड़े, बैग और चप्पल मिले हैं, पर कहीं कोई नहीं।

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आइतवार शाम करीब ४ बजे आसमान में गरज-चमक रही थी। बारिश शुरू हुई, लोग मेला खत्म करके घर लौट रहे थे। उसी समय माया बच्चों के साथ भेरी किनारे नजर आईं।

भेरी किनारे बकरियां चराने आए स्थानीय ६७ वर्षीय करवीर बुढा ने माया से पूछा, ‘इतने समय पर कहाँ जा रही हो?’ माया ने उत्तर दिया, ‘गाड़ी में आया था, पिता उल्टी कर रहे थे, इसलिए वही याद आ गया।’

मगर माया का जवाब मन को संतोष नहीं दे रहा था। करवीर घर जाकर यह बात अपने परिवार को बताई। उनकी पत्नी ने कहा कि माया का परिवार उनका अपना संबंधी है। माया के पति भूपेन्द्र दोपहर से ही पत्नी और बच्चों को खोज रहे थे।

मृतक के बड़े भाई प्रेमराज गिरी के अनुसार, आइतवार से भांजी आशा की कक्षा पाँच की अंतिम परीक्षा थी। परीक्षा में न आने पर स्कूल ने भिनाजु भूपेन्द्र को फोन किया। स्कूल से फोन आने के बाद भूपेन्द्र ने अमरदेव से पूछा कि ‘आपकी बेटी कहाँ है?’ अमरदेव ने बताया कि वह सुबह घर से निकल चुकी है। ‘फिर खोज शुरू हुई। जांच के दौरान भेरी नदी किनारे कपड़े, मोबाइल और कुछ रुपए मिले।’

भिनाजु को सताए जाने के कारण दीदी ने यह निर्णय लिया, मृतक के बड़े भाई प्रेमराज गिरी बताते हैं। दशकों से बहन पर निरंतर मारपीट हो रही थी।

‘पहले भूपेन्द्र भारत में कमाने जाते थे, साल में एक-दो बार आते थे। बहन के साथ संबंध भी ठीक थे,’ प्रेमराज ने कहा, ‘दशैं में भूपेन्द्र ने अटो खरीदा और फिर नियमित मानसिक व शारीरिक यातना शुरू हो गई। तब यह स्थिति आई।’

मायके पक्ष ने कहा कि ससुराल पक्ष के अत्याचार के कारण बहन और भांजे-भांजी खो दिए और निष्पक्ष जांच कर संबंधितों को कानून के अनुसार सजा देने की मांग की है। ‘मायके में मेरे सामने ही बेटी को मारता था, घर में कितना अत्याचार करता होगा?’ मृतक के छोटे पिता अमरदेव ने कहा, ‘घर लौटने के बाद भी डर था कि फिर यातना होगी, इसलिए बेटी ने नाती-नातिन के साथ मिलकर भेरी में छलांग लगाई।’

इलाका प्रहरी कार्यालय छिन्चु के प्रमुख प्रकाश केसी ने प्रारंभिक जांच में कहा कि पारिवारिक कलह के कारण यह घटना हुई है। ‘पति-पत्नी के झगड़े के कारण मां ने बच्चों सहित भेरी में छलांग लगाई,’ पुलिस निरीक्षक केसी ने कहा।

भूपेन्द्र के खिलाफ आत्महत्या के लिए प्रोत्साहन का मामला दर्ज

बच्चों समेत भेरी में छलांग लगाने वाली माया कठायत के पति भूपेन्द्र कठायत के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है। मृतक माया के पिता और भाई ने गुरुवार को आत्महत्या के लिए उकसाने की शिकायत दी।

शिकायत मिलते ही भूपेन्द्र को गिरफ्तार कर जांच करने की जानकारी इलाका प्रहरी कार्यालय छिन्चु के प्रमुख प्रकाश केसी ने दी। पति के अत्याचार के बाद ही माया ने बच्चों सहित भेरी नदी में छलांग लगाकर आत्महत्या की, यह शिकायत में उल्लेख है।

माया के पिता बालुदेव गिरी ने शिकायत में कहा है कि पति दैनिक शराब पीकर बेटी और नातिन-नातिन को सताता था, इसलिए मजबूर होकर भेरी नदी में कूद गई।