न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल ने बार और बेन्च के बीच संवाद के महत्व पर दिया ज़ोर

वरिष्ठतम न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल ने न्यायपालिका की जनआस्था बनाए रखने के लिए बार और बेन्च के बीच निरंतर संवाद आवश्यक बताया है। उन्होंने आगामी चैत 18 तारीख से बार और बेन्च के बीच संवाद को जारी रखने की घोषणा की। न्यायपालिका में मौजूद अवरोधों को हटाने में संवाद सहायक होगा और जनता केंद्रित न्याय प्रणाली की स्थापना करना जरूरी है, यह उनकी राय है।
6 चैत, काठमांडू। सर्वोच्च न्यायालय की वरिष्ठतम न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल ने न्यायपालिका की जनआस्था बनाए रखने और संस्थागत सुधार के लिए बार और बेन्च के बीच निरंतर संवाद का महत्त्व बताया है। शुक्रवार को भक्तपुर में आयोजित कानून व्यवसायी महिलाओं के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वे चैत 18 से बार और बेन्च के बीच अपने संवाद को जारी रखेंगे।
उन्होंने विश्वास जताया कि यह संवाद न्यायपालिका में मौजूद अवरोधों को दूर करने में मदद करेगा। न्यायालय वर्तमान में जटिल परिस्थितियों और संकट प्रबंधन की योजना से गुजर रहा है, इस बात को स्वीकार करते हुए उन्होंने जनता केंद्रित न्याय प्रणाली के निर्माण पर ज़ोर दिया।
‘अभी कुछ विषम परिस्थितियाँ हैं, और कुछ स्वार्थी समूह सक्रिय हैं जो न्यायपालिका के प्रति जनआस्था को घटाने तथा इसे कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। किसी की क्षमता और निष्ठा पर प्रश्न उठाना उचित है, लेकिन न्यायपालिका की मूलभूत न्यायिक आस्था और संस्थान को कमजोर करना कोई भी पक्ष स्वीकार नहीं करेगा। यहां पूरे बार, महिला कानून व्यवसायी और अदालत को मिलकर काम करना चाहिए,’ उन्होंने कहा। उन्होंने सुशासन के लिए न्याय परिषद को प्रभावी बनाने और सूक्ष्म निगरानी को जारी रखने की योजना की भी जानकारी दी। न्यायाधीश मल्ल ने न्यायक्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के बावजूद बार-बार उनकी क्षमताओं पर सवाल उठाए जाने को लेकर असंतोष भी व्यक्त किया।





