
तस्बिर स्रोत, ANFA
आव्रजन विभाग ने श्रम स्वीकृति के बिना पर्यटक वीजा पर मौजूद विदेशी खिलाड़ियों को राष्ट्रीय लीग के पुरुष/महिला फुटबॉल प्रतियोगिताओं में खेलने से रोकने के लिए पत्र जारी किया, जिसके बाद अखिल नेपाल फुटबॉल संघ (एन्फा) ने काठमांडू में जारी दोनों राष्ट्रीय लीग प्रतियोगिताओं को स्थगित कर दिया है।
एन्फा ने एक विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि तकनीकी कारणों से अगले सूचनाएं आने तक लीग स्थगित की जा रही है।
पुरुष राष्ट्रीय लीग में भाग लेने वाले 17 क्लबों में से चितलांग फुटबॉल क्लब ने कहा है कि उनके विदेशी खिलाड़ियों के पास श्रम स्वीकृति है।
पुरुष लीग में गुरुवार को तीन मैचों का कार्यक्रम था। इनमें से चितलांग एफसी बनाम लालिगुंरास एफसी और त्रिभुवन आर्मी क्लब बनाम सातदोबाटो यूथ क्लब के दो मैच आयोजित हुए। इन दोनों मैचों में विदेशी खिलाड़ी भी शामिल थे।
लेकिन शाम को मच्छिन्द्र क्लब और एपीएफ के बीच होने वाला मैच रोक दिया गया।
महिला लीग में भी आज तयशुदा अनुसार दोनों मैच संपन्न हुए हैं।
आव्रजन विभाग का पत्र
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पहले विदेशी खिलाड़ियों के श्रम स्वीकृति न लेने के कारण राष्ट्रीय खेल परिषद और आव्रजन विभाग में शिकायत दर्ज हुई थी।
इसके बाद राष्ट्रीय खेल परिषद ने चैत 1 तारीख को एन्फा को पत्र जारी कर उन विदेशी खिलाड़ियों की सूची मांगी थी जिनके पास श्रम स्वीकृति नहीं है।
आव्रजन विभाग के निदेशक टीकाराम ढकाल ने आज एन्फा को भेजे गए पत्र में बताया कि निरीक्षण आज से शुरू हो चुका है और श्रम स्वीकृति न लिए विदेशी खिलाड़ियों को वीजा के उद्देश्यों के विपरीत किसी भी खेल में भाग लेते पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। इसी चेतावनी के बाद एन्फा ने कदम पीछे लिया है।
एन्फा के प्रवक्ता सुरेश शाह ने बताया कि तकनीकी कारणों से लीग स्थगित किया गया है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खेल परिषद से दोनों लीगों में विदेशी खिलाड़ियों के श्रम स्वीकृति देने का भी अनुरोध किया गया है।
एन्फा ने राष्ट्रिय खेलकुद परिषद (राखेप) को राष्ट्रीय लीग के लिए २०७९ पुष २८ और एन्फा महिला लीग के लिए फागुन २८ को पत्राचार कर रखा है।
कठिन श्रम स्वीकृति प्रक्रिया
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राष्ट्रीय लीग में खेल रहे भगवती क्लब के सदस्य राम जोशी ने कहा कि क्लब ने श्रम स्वीकृति के लिए राखेप और मंत्रालय को बार-बार पत्राचार किया, लेकिन देरी हुई।
उन्होंने कहा, “हमने बार-बार पत्राचार किया, लेकिन स्वीकृति नहीं मिली। अगर फुटबॉल न हो तो खिलाड़ी बेरोजगार हो जाएंगे। हमने करोड़ों रुपए निवेश कर लीग खेली है। लीग रुकी तो वह राशि वापस पाना मुश्किल होगा। क्लब की पीड़ा कौन समझेगा?”
एन्फा के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार के साथ सहमति के अनुसार विदेशी खिलाड़ियों को खेलने दिया गया है।
उनके अनुसार उस समय युवा तथा खेलकूद मंत्रालय के मंत्री बब्लु गुप्ता, राखेप के सदस्य सचिव और परराष्ट्र मंत्रालय की सहमति से जटिल श्रम स्वीकृति प्रक्रिया को पारदर्शी करने की पहल की जा रही थी और तीन महीने से कम अवधि के वीजा वालों को खेलने की अनुमति दी जाती थी।
“उसी प्रक्रिया के तहत नेपाल प्रीमियर लीग (एनपीएल) में विदेशी खिलाड़ियों को खेलने दिया गया था और वहां कोई प्रतिबंध नहीं था,” उन्होंने कहा।
श्रम स्वीकृति प्रक्रिया बहुत जटिल होने के कारण क्लब अधिकारियों ने बार-बार इस समस्या को उठाया है। उनके अनुसार श्रम स्वीकृति लेने में डेढ़ महीने लग जाते हैं।
भगवती क्लब के सदस्य राम जोशी कहते हैं, “एक विभाग से दूसरे विभाग तक फाइल ले जाने में इतना समय लग जाता है कि खेल समाप्त हो जाता है।”
अतीत में कड़ी कार्रवाई
विसं २०७९ में शहीद स्मारक ए डिविजन लीग में थ्रीस्टार क्लब ने जावलाखेल क्लब के खिलाफ बिना श्रम स्वीकृति लिए विदेशी खिलाड़ी खेलने को लेकर एन्फा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए थ्रीस्टार के जीते हुए मैच का परिणाम उलट दिया था।
नतीजतन, थ्रीस्टार का ग्रेड कम कर दिया गया था।
लेकिन इस बार एन्फा ने ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की है।
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