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नेविसंघ सिनेट की बैठक में निर्णय: कांग्रेस का भ्रातृ संगठन नहीं रहेगा, बीपी कोइराला के सिद्धांतों का करेंगे पालन


६ चैत, काठमाडौं। नेपाली कांग्रेस के निकट संबंध रखने वाले नेपाल विद्यार्थी संघ (नेविसंघ) ने अपने संगठन को कार्यात्मक रूप से स्वायत्त बनाने के लिए पार्टी का भ्रातृ संगठन न रहने का निर्णय लिया है। शुक्रवार को हुई नेविसंघ की सिनेट बैठक में संगठन को स्वायत्त बनाने के उद्देश्य से आगामी दिनों में पार्टी के भ्रातृ संगठन के रूप में नहीं रहने का फैसला किया गया।

नेविसंघ के प्रवक्ता सुरज सेजुवाल ने कहा, ‘नेविसंघ ने अपनी कार्यात्मक स्वायत्तता मांगी है। पार्टी का भ्रातृ संगठन होने के नाते हर निर्णय पार्टी के निर्देशानुसार लेना पड़ता था, जिससे छात्र आंदोलनों में प्रभावी भूमिका निभाना असंभव हो जाता था। इसलिए नेविसंघ के अधिकार सम्पन्न सिनेट की बैठक ने यह निर्णय लिया है।’

उन्होंने आगे कहा, ‘हम कांग्रेस के भ्रातृ संगठन न रहने का मतलब यह नहीं है कि हमने पार्टी के प्रति आस्था छोड़ दी है। हम कांग्रेस से अलग या पर नहीं होंगे। हम पार्टी के मूल्यों को अपनाएंगे और बीपी कोइराला द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत हमारे मार्गदर्शक बने रहेंगे।’

नेविसंघ के पदाधिकारियों ने पार्टी का भ्रातृ संगठन रहने पर छात्र आंदोलनों के विषय में आवाज उठाने में बाधित होने और अपने संगठन को स्वतंत्र रूप से संचालित न कर पाने की शिकायत भी की है।

सुरज सेजुवाल ने बताया, ‘यहां तक कि हमारे अधिवेशन भी समय पर स्वायत्त रूप से नहीं हो पाते थे। समिति चयन के लिए पार्टी के अध्यक्ष और कार्यस्थानीय समिति के निर्णय की आवश्यकता पड़ती थी, जिससे हम और भी कमजोर हो जाते थे। विधान संशोधन के लिए पार्टी की अनुमति लेना भी जरूरी होता था। इसलिए नेविसंघ प्रभावशाली रूप से काम नहीं कर पाया, यह हमारी समीक्षा है।’

उन्होंने बताया कि नेपाली कांग्रेस के सरकार संचालन के दौरान लिए गए गलत निर्णयों और अकर्मण्यता का भार भी नेविसंघ को उठाना पड़ा, जिससे संगठन की प्रतिष्ठा पर असर पड़ा है। ‘भ्रष्टाचार पार्टी के नेताओं के कारण होता है और इसका भार नेविसंघ को भी उठाना पड़ता है। विरोध प्रकट करने का अवसर भी नहीं मिला, इसलिए हमारी अच्छी उपलब्धियां भी छिप गईं,’ सेजुवाल ने कहा, ‘अब नेविसंघ के लिए छात्र एवं देश के मुद्दे निडर होकर उठाने का यह निर्णय है।’

अध्यक्ष दुजाङ शेर्पा ने बताया कि संगठन की स्वायत्तता न होने की वजह से समय पर महाधिवेशन करना भी कठिन हो गया था। उन्होंने कहा, ‘हम गतिशील संगठन बनाना चाहते हैं, लेकिन पार्टी के निर्देश के बिना कोई कदम नहीं उठा सकते थे, जिससे स्वतंत्रता बाधित हो गई। बाहर से ऐसा लगता था कि हम अधिवेशन नहीं करना चाहते क्योंकि पार्टी को महाधिवेशन की कार्यसूची भिजवाने पर उसे पारित नहीं किया जाता और विधान संशोधन नहीं होता। इसलिए हमने स्वायत्तता के लिये यह निर्णय लिया है।’

नेविसंघ एक ऐसी संगठन है जो छात्र राजनीतिक विरासत को साथ लेकर चलती है, इसलिए पदाधिकारी यह चाहते हैं कि इसे मौलिक रूप से स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिले। ‘पंचायती शासन के दौरान जब पार्टी प्रतिबंधित थी तब भी नेविसंघ सक्रिय रहा और उसी आधार पर लोकतंत्र आया,’ अध्यक्ष शेर्पा ने कहा, ‘अब नेविसंघ भी आंदोलन के रूप में आगे बढ़ेगा।’