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सेतो मच्छेन्द्रनाथ के रथ निर्माण की प्रक्रिया शुरू, चैत 12 को राष्ट्रपतिद्वारा दर्शन होगा

समाचार सारांश

समीक्षा पश्चात तैयार।

  • चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से दरबारमार्ग स्थित तीनधारा पाठशाला में सेतो मच्छेन्द्रनाथ के रथ निर्माण का कार्य शुरू किया गया है।
  • चैत्र 12 को दोपहर 4 बजे से तीनधारा पाठशाला से रथ यात्रा आरंभ होगी और असन में पूजा सम्पन्न की जाएगी।
  • रथ यात्रा के दौरान राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल असन में दर्शन कर प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा है।

8 चैत्र, काठमांडू। दरबारमार्ग स्थित तीनधारा पाठशाला से चैते दशैं के दिन से शुरू होने वाली वर्षा और सहकाल के देवता सेतो मच्छेन्द्रनाथ की रथयात्रा के लिए रथ का निर्माण जारी है।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से रथ निर्माण कार्य शुरू होने की जानकारी गुठी संस्थान ने दी है। संस्थान के प्रवक्ता जनक पोखरेल ने बताया कि चैत्र शुक्ल सप्तमी अर्थात् चैत्र 11 तक रथ का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा।

इस वर्ष भी चैत्र 12 को दोपहर 4 बजे तीनधारा पाठशाला से सेतो मच्छेन्द्रनाथ की रथयात्रा शुरू होगी। प्रत्येक वर्ष चैत्र शुक्ल अष्टमी से दशमी तक राजधानी में सेतो मच्छेन्द्रनाथ की रथयात्रा का आयोजन किया जाता है।

इस वर्ष भी पहला दिन चैत्र 12 को रथ असन पहुंचाया जाएगा। रथ असन पहुंचने के बाद पूजा-अर्चना की जाएगी। राजधानी के अंदर तीन दिनों तक रथयात्रा आयोजित होगी। असन, वसंतपुर, जैसीदेवल, लगन होते हुए रथयात्रा पुनः मच्छेन्द्रबहाल में समाप्त होगी। रथ निर्माण के लिए लकड़ी सहित अन्य सामग्री की व्यवस्था संस्थान द्वारा की जाती है।

चैत्र शुक्ल अष्टमी के दिन यानी चैत 12 को कुमारी को भी तीनधारा पाठशाला परिसर में लाकर रथयात्रा शुरू करने की परंपरा है, जो सेतो मच्छेन्द्रनाथ के पुजारी, समिति के संयोजक तथा काठमांडू महानगरपालिका वार्ड संख्या 25 के पूर्व अध्यक्ष नीलकाजी शाक्य ने दी।

चैत 12 की रात राष्ट्रपति करेंगे दर्शन

असन में इसी चैत 12 की रात लगभग 10 बजे राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल रथ का दर्शन करेंगे और प्रसाद ग्रहण करेंगे।

सेतो मच्छेन्द्रनाथ का रथ खींचकर असन पहुंचाने के बाद रात को राष्ट्रपति वहां आकर पूजा-अर्चना एवं दर्शन करके प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा है।

तीनधारा पाठशाला के सामने 32 हाथ लंबा रथ बनाकर चैते दशैं से खींचा जाता है। यह रथ नागराज का प्रतीक माना जाता है। प्रत्येक वर्ष इस जात्रा के बाद वर्षा और सहकाल होती है ऐसा धार्मिक विश्वास है। रथ के दूसरे दिन यानी चैत्र 13 को असन से वसंतपुर स्थित कालभैरव मंदिर की ओर ले जाया जाता है।

तीसरे दिन चैत्र 14 को वसंतपुर से लगन तक रथयात्रा की जाती है। लगन में सेतो मच्छेन्द्रनाथ की माता के मंदिर में रथ को तीन बार घुमाने की परंपरा है। राजधानी में सेतो मच्छेन्द्रनाथ की रथयात्रा समाप्त होने के बाद रातो मच्छेन्द्रनाथ की रथयात्रा भी आयोजित होती है।