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कार्यविधि में नया उपधारा जोड़ने से 10 हजार से अधिक युवा उद्यमियों को राहत

समाचार सारांश

  • उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्रालय ने स्टार्टअप उद्यम कर्जा संचालन कार्यविधि 2082 में नया उपधारा जोड़कर 10 हजार से अधिक युवा उद्यमियों को अब काठमांडू आने की आवश्यकता से मुक्त किया है।
  • वर्तमान आर्थिक वर्ष 2082/83 में स्टार्टअप कर्जा के लिए 10,244 परियोजना प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में दोगुना हैं।
  • कार्यविधि में प्रस्तुति की बजाय स्थानीय स्तर के उद्यम विकास सहजकर्ता से प्राप्त स्थल निरीक्षण विवरण, फोटो, वीडियो और दस्तावेजों के आधार पर मूल्यांकन समिति द्वारा उद्यमियों का चयन किया जाएगा।

9 चैत्र, काठमांडू। कार्यविधि में नया उपधारा जोड़ने से एक बार में 10 हजार से अधिक युवा उद्यमियों को लाभ मिला है। उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्रालय द्वारा स्टार्टअप उद्यम कर्जा संचालन कार्यविधि 2082 में किए गए सुधार से अब उद्यमियों को प्रस्तुतीकरण के लिए काठमांडू आने की बाध्यता नहीं है।

मंत्रालय के प्रवक्ता नेत्र प्रसाद सुवेदी के अनुसार इस आर्थिक वर्ष स्टार्टअप उद्यम कर्जा के लिए 10,244 परियोजना प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। 2081 साल तक कार्यविधि के अनुसार प्रत्येक प्रस्तावक को स्वयं काठमांडू आकर 10-10 मिनट प्रस्तुतीकरण देना अनिवार्य था, लेकिन इस वर्ष कार्यविधि में किए गए संशोधन से उद्यमियों को काठमांडू आने की जरूरत नहीं है।

2082 साल के लिए लागू कार्यविधि के दफा 24 में नया उपधारा 2 जोड़ा गया है, जिसके तहत कर्जा के लिए प्रदेश सरकार और स्थानीय तह के उद्यम विकास सहजकर्ता की सहायता ली जा सकती है।

2082 साल की कार्यविधि में जोड़ा गया नया प्रावधान।

इस प्रावधान के तहत इस वर्ष मंत्रालय के अधीन औद्योगिक व्यवसाय विकास प्रतिष्ठान ने स्टार्टअप उद्यम कर्जा कार्यक्रम में परियोजना प्रस्तावों का स्थल निरीक्षण स्थानीय तह की सहायता से किया है।

प्रवक्ता सुवेदी के अनुसार इस वर्ष उन उद्यम विकास सहजकर्ताओं द्वारा प्राप्त स्थल निरीक्षण विवरण, फोटो, वीडियो और प्रतिष्ठान द्वारा निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर मूल्यांकन समिति अंक प्रदान करेगी।

कार्यविधि में प्रस्तुतीकरण के लिए अंक निर्धारित थे, लेकिन अब केवल प्रस्तुत विवरण और दस्तावेजों के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। प्रारंभिक सूची में शामिल परियोजनाओं में से 50 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले उद्यमियों को प्राथमिकता के आधार पर बैंक के माध्यम से क्रेडिट जांच कर कर्जा सिफारिश की जाएगी।

2081 साल की कार्यविधि के दफा 23 के अनुसार प्रतिष्ठान संचालित कार्यक्रमों में प्रदेश सरकार, स्थानीय तह, निजी क्षेत्र, प्राज्ञिक क्षेत्र और विश्वविद्यालय के साथ लागत साझेदारी की जा सकती थी।

2081 साल की कार्यविधि के तहत मौजूद प्रावधान

इस वर्ष इस प्रावधान को और स्पष्ट करते हुए नया उपधारा जोड़ा गया है, जिसमें कहा गया है कि ‘प्रतिष्ठान कर्जा सिफारिश एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन की प्रभावशीलता बढ़ाने, आवश्यक सूचना संग्रहण और कर्जा प्रवाह के निगरानी एवं मूल्यांकन के लिए प्रदेश सरकार और स्थानीय तह के समन्वय में उद्योग पंजीकरण करने वाले निकाय और स्थानीय तह में कार्यरत उद्यम विकास सहजकर्ताओं की सहायता ले सकता है।’

यह प्रावधान लागू करने में आसानी लाने हेतु औद्योगिक व्यवसाय विकास प्रतिष्ठान के कार्यकारी निदेशक ई. उमेश कुमार गुप्ता ने गत माघ मास में मंत्रालय को पत्र लिखा था। उसी पत्र के आधार पर 28 माघ 2082 को उद्योग मंत्रालय ने संघीय मामिला एवं सामान्य प्रशासन मंत्रालय को पत्र लिखकर सहजीकरण का अनुरोध किया था।

संघीय मामिलाने 29 माघ को सभी नगरपालिकाओं और गाउँपालिकाओं को पत्र भेजकर प्रतिष्ठान के अनुरोध के कार्यान्वयन के लिए सूचित किया था। इस प्रक्रिया में स्टार्टअप उद्यम कर्जा 2082 के परियोजना प्रस्तावों के स्थलगत निरीक्षण फॉर्म भी उपलब्ध कराया गया था।

पिछले वर्ष से दोगुना प्रस्ताव

वर्तमान आर्थिक वर्ष 2082/83 में स्टार्टअप कर्जा के लिए 10,244 उद्यमियों ने प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं, जो पिछले आर्थिक वर्ष 2081/82 के 5,158 की तुलना में दोगुना है। सरकार नवाचार, ज्ञान, सोच, कौशल और क्षमता को व्यवसाय में बदलने के लिए युवाओं को स्टार्टअप उद्यम में आकर्षित करने हेतु हर वर्ष स्टार्टअप कर्जा प्रदान करती है।

उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्रालय के अनुसार इस वर्ष इस कार्यक्रम के लिए 86 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। स्टार्टअप उद्यम कर्जा कार्यविधि 2082 के अनुसार चयनित उद्यमी 3 प्रतिशत ब्याज दर पर बिना जमानत के कर्जा प्राप्त करेंगे। प्रत्येक उद्यमी न्यूनतम 5 लाख से अधिकतम 20 लाख रुपये तक का कर्जा ले सकता है।

औद्योगिक व्यवसाय विकास प्रतिष्ठान ने 19 कार्तिक को स्टार्टअप उद्यम के लिए सहज कर्जा प्रवाह संबंधी प्रस्ताव पूर्ण करने का आग्रह किया था।

मंत्रालय के अनुसार निर्धारित समयावधि में कुल 2,041 भौतिक रूप में और 8,203 इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से कुल 10,244 परियोजना प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उद्यम विकास सहजकर्ताओं ने भौतिक अवस्था का स्थल निरीक्षण किया है।

सहजकर्ताओं ने प्रत्येक उद्यमी के प्रस्ताव विवरण सहित फोटो और उद्यम द्वारा संचालित कार्य या उत्पाद दिखाने वाले एक मिनट के वीडियो साथ फार्म में प्रस्तुत किए हैं। अब प्रस्तुतीकरण के बजाय इन विवरणों और प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर मूल्यांकन समिति उद्यमी छांटेगी। इस वर्ष 77 जिला और 713 स्थानीय तह से प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

प्रारंभिक स्क्रिनिंग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद

मंत्रालय के अनुसार इस वर्ष प्रतिष्ठान के माध्यम से प्राप्त परियोजना प्रस्तावों का अध्ययन विशेषज्ञों की संमिश्रित समिति द्वारा किया जा रहा है। इसके साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्क्रिनिंग सॉफ्टवेयर द्वारा भी प्रारंभिक जांच की जा रही है, जिसमें करीब 80 प्रतिशत सटीकता होने का विश्वास है। कार्यविधि की मापदंडों को पूरा करने वाले प्रस्तावों को शामिल कर प्रतिष्ठान प्राथमिक सूची प्रकाशित करेगा।

सूची में चयनित प्रस्तावों को व्यवसायिक प्रस्तुतीकरण करना सामान्यतः अधिक खर्च, जटिल प्रक्रिया, अधिक समय और आर्थिक वर्ष के भीतर कार्यक्रम सम्पन्न कराना कठिन होता है। इसलिए इस वर्ष उद्यम विकास सहजकर्ताओं द्वारा प्राप्त स्थल निरीक्षण विवरण, फोटो, वीडियो और आधिकारिक दस्तावेजों को मापदंड मानकर मूल्यांकन करने का निर्णय लिया गया है, जैसा कि प्रवक्ता सुवेदी ने बताया है।