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सिर्फ कर्ज़ा के लिए बैंक शाखाएँ, भुगतान मोबाइल से – नवीन आँकड़े

समाचार सारांश

  • नेपाल राष्ट्र बैंक के अध्ययन के अनुसार देश में वित्तीय पहुंच 67.3 प्रतिशत जनसंख्या तक पहुंच गई है और जमा खातों की संख्या जनसंख्या के लगभग दोगुनी है।
  • चालू वित्तीय वर्ष के माघ तक बैंक और वित्तीय संस्थानों की शाखाओं की संख्या 11,490 पहुंच गई है और प्रति शाखा जनसंख्या 2,538 रह गई है।
  • डिजिटल लेनदेन के बढ़ने से बैंक शाखाओं का कार्य घट रहा है और ग्राहक अब मुख्यतः केवल कर्ज़ा लेने के लिए शाखा कार्यालय जाते हैं।

10 चैत्र, काठमांडू। बैंकिंग क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के बढ़ते प्रयोग के साथ ग्राहक अब बैंक और वित्तीय संस्थाओं की शाखा कार्यालयों में मुख्यत: केवल कर्ज़ा लेने के लिए ही पहुंचते हैं।

शाखा से चेक या नकद लेनदेन होना बंद नहीं हुआ है, लेकिन तकनीक के सहारे शाखा से लेनदेन न करने की संभावना व्यापक रूप से विकसित हुई है।

वित्तीय पहुंच की स्थिति को शाखा आधार पर देखने पर पता चलता है कि देश के सभी 753 स्थानीय तहों में वाणिज्य बैंक की शाखाएं मौजूद हैं।

नेपाल राष्ट्र बैंक ने 2076 साल में वित्तीय पहुंच संबंधी एक अध्ययन किया था, जिसमें देश भर में वित्तीय पहुंच 67.3 प्रतिशत पाई गई थी।

अध्ययन के बाद तकनीक के विकास ने बैंकिंग लेनदेन को हर व्यक्ति के मोबाइल तक पहुंचा दिया है और जमा खातों की संख्या जनसंख्या से लगभग दोगुनी हो गई है, यह केंद्रीय बैंक ने बताया है।

तकनीक के व्यापक उपयोग से बैंक शाखाओं के काम घटने के कारण राष्ट्र बैंक के गवर्नर प्रो. डॉ. विश्वनाथ पौडेल बताते हैं कि बैंक और वित्तीय संस्थाओं में प्रति दिन औसतन 150 ग्राहक सेवा लेने आते थे, जबकि अब यह संख्या 20 से 30 तक सीमित हो गई है।

‘शाखाएं केवल बढ़ा देने से काम नहीं चलेगा,’ पौडेल ने कहा, ‘शाखाएं कम करके खर्च घटाना होगा ताकि पूंजी लागत और ब्याज दरों को कम करने में मदद मिले।’

इसलिए बैंक और राष्ट्र बैंक दोनों डिजिटलाइजेशन योजना के अनुसार काम कर रहे हैं। वे लोग चाहते हैं कि लोगों को बैंक या राष्ट्र बैंक जाने की जरूरत न पड़े, यह उनके काम को आगे बढ़ाने का मकसद है।

2076 के अध्ययन के अनुसार नेपाल के बैंक और वित्तीय संस्थाओं की प्रति शाखा जनसंख्या लगभग 3,300 थी। उस समय जारी जमा खातों की संख्या 2 करोड़ 78 लाख और कर्ज़ा खातों की संख्या 14 लाख 40 हजार थी।

इसी तरह मोबाइल बैंकिंग के उपयोगकर्ता 83 लाख 47 हजार और डेबिट कार्ड धारकों की संख्या 67 लाख 9 हजार थी।

चालू वित्तीय वर्ष के माघ तक आते-आते, केंद्रीय बैंक के अनुसार इन आंकड़ों में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। माघ 2082 तक ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ श्रेणी के बैंक तथा वित्तीय संस्थाओं में जमा खातों की संख्या 6 करोड़ 18 लाख 51 हजार 230 तक पहुंच गई और कर्ज़ा खातों की संख्या 20 लाख 34 हजार 946 तक पहुंच गई है।

माघ तक बैंक और वित्तीय संस्थाओं की कुल शाखाओं की संख्या 11,490 हो गई है, जबकि प्रति शाखा जनसंख्या 2,538 रह गई है।

राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरुप्रसाद पौडेल ने डिजिटल लेनदेन की बड़ी उपलब्धि की पुष्टि की है। उन्होंने कहा, “हर 10 किलोमीटर पर कम से कम एक बैंक शाखा होने से डिजिटल लेनदेन और बढ़ेगा।”

यदि किसी स्थान पर कई शाखाएं हों तो उनमें से कुछ को हटाना आवश्यक है, लेकिन वित्तीय पहुंच और जागरूकता के लिए शाखाएं आवश्यक हैं, उनका यह तर्क है।

8 असार 2077 को 8 लाख 55 हजार से क्यूआर भुगतान संख्या चालू वित्तीय वर्ष के माघ तक बढ़कर 4 करोड़ 62 लाख हो गई है, यह केंद्रीय बैंक ने बताया।

मोबाइल बैंकिंग लेनदेन पांच साल पहले 1 करोड़ 37 लाख था, जो चालू वर्ष के माघ तक बढ़कर 6 करोड़ 73 लाख हो गया है।

माघ तक क्यूआर के माध्यम से निर्णायक रूप से 1 खरब 25 अरब रुपये और मोबाइल बैंकिंग द्वारा 5 खरब 58 अरब रुपये के बराबर भुगतान किया गया है।

राष्ट्र बैंक की नई नीतियों और डिजिटल लेनदेन की वृद्धि के बावजूद शाखाओं की संख्या घट रही है। 2079/80 से बैंक एवं वित्तीय संस्थाओं की शाखाएं घटनी शुरू हुई हैं, जो मर्जर प्रक्रिया का भी प्रभाव है।

तीन साल पहले 11,580 शाखाएं थीं, जो अब घटकर 11,490 तक सीमित हो गई हैं।

फाइनेंशियल एक्सेस को अब भुगतान, सेवा केंद्र और जमा एवं कर्ज खातों के आधार पर समीक्षा की जाएगी। केंद्रीय बैंक के निदेशक सुशील पौडेल के अनुसार भुगतान, जमा, कर्ज और बीमा आधारित पहुंच देखी जा सकती है।

नेपाल में वित्तीय पहुंच में विस्तार के साथ-साथ गुणवत्ता में कमी भी रह गई है। पौडेल ने कहा, ‘जमा खाते, शाखा और भुगतान लेनदेन के आधार पर लगभग 90 प्रतिशत वित्तीय पहुंच है, लेकिन कर्ज लेने की प्रवृत्ति कम है, लोग कर्ज़ा लेने से डरते हैं और वित्तीय स्रोतों के परिचालन में सुधार नहीं हो पाया है।’

पहले वित्तीय साक्षरता की स्थिति भी कमजोर थी और उपभोक्ता संरक्षण के मानक भी कमजोर हैं। 2076 के बाद आर्थिक पहुंच के सामान्य सर्वेक्षण नहीं किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि धोखाधड़ी की घटनाओं में वृद्धि हुई है और वित्तीय जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। वित्तीय लेनदेन सामान्य रूप से हो जाता है, लेकिन क्रेडिट के सहज होने का सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण है, जिसमें गिरवी और कर्ज चुकौती उपायों की सरलता मुख्य भूमिका निभाती है।

क्यूआर प्रणाली ने सेवा केंद्रों की संख्या अनंत बनाने में सफलता हासिल की है। डिजिटल युग में यह पहुंच किसी खास स्थान तक सीमित नहीं रहती, इसका उनका कहना है। दुकान पर जाकर मोबाइल से भुगतान करने की सुविधा ने हर दुकान को वित्तीय सेवा केंद्र के समान बना दिया है।

‘कर्ज़ा लेने के लिए अब भी शाखा जाना पड़ता है, लेकिन भविष्य में यह डिजिटल डिलीवरी के माध्यम से संभव होगा,’ उन्होंने कहा, ‘इसके लिए भी केंद्रीय बैंक जरूरी नीतिगत व्यवस्थाओं की तैयारी कर रहा है।’