Skip to main content

मधेश के बजट में १२ अरब रुपैयाँ कटौती का अनुमान, सरकार को आर्थिक जोखिम का सामना

समाचार सारांश

सम्पादकीय रूप से समीक्षा की गई।

  • मधेश सरकार के चालू वित्तीय वर्ष 2082/083 के बजट में 12 अरब रुपैयाँ कटौती होने का अनुमान है।
  • सरकार आर्थिक जोखिम का प्रबंधन करने के लिए मंत्रालयों को टूटी-फूटी, अनुपयुक्त और क्रियान्वयन न हो सकने वाली योजनाएं प्रस्तुत करने को पत्राचार कर रही है।
  • अर्थमंत्री महेशप्रसाद यादव ने बजट में घाटा दिखने एवं मंत्रालयों द्वारा योजना न प्रस्तुत करने की बात कही है।

११ चैत, जनकपुरधाम। मधेश सरकार के चालू वित्तीय वर्ष 2082/083 के बजट में 12 अरब रुपैयाँ कटौती होने का अनुमान लगाया गया है। सदन से पारित और कार्यान्वित बजट में कुछ महीनों के बाद 12 अरब रुपैयाँ की कटौती हो सकती है।

पूर्व जनमत पार्टी के सतिश कुमार सिंह नेतृत्व वाली सरकार के अर्थमंत्री सुनिलकुमार यादव ने आम तौर पर ४६ अरब ५८ करोड़ ३३ लाख ५१ हजार का बजट सदन में असार १ गते प्रस्तुत किया था।

जिसमें चालू खर्च के लिए 16 अरब 72 करोड़ 5 लाख 17 हजार (35.89 प्रतिशत) और पूंजीगत खर्च के लिए 30 अरब 26 करोड़ 28 लाख 34 हजार रु. का आर्थिक विनियोजन था। लेकिन अब यह स्पष्ट हुआ कि बजट 12 अरब रुपियों से अधिक रखा गया था।

असामर्थ बजट लाने से सरकार आर्थिक जोखिम में है। योजना कार्यान्वयन होने पर ठेकेदार और उपयोगकर्ताओं को समय पर भुगतान न कर पाने का खतरा है।

जोखिम से बचने के लिए सरकार ने मंत्रालयों को हर योजना में 20 प्रतिशत कटौती कर आगे बढ़ने को पत्राचार किया है। साथ ही अर्थ मंत्रालय ने संचालन में असमर्थ, अनुचित और विखरित योजनाओं को त्यागने का निर्देश दिया है।

‘सरकार वर्तमान में आर्थिक जोखिम में है। इसे व्यवस्थित करने के लिए प्रक्रियाएं शुरू की गई हैं। मंत्रालयों को पत्राचार किया गया है। चलने में असमर्थ और अनुचित योजनाओं के साथ-साथ टूटी-फूटी योजनाओं को समर्पित करने को कहा गया है,’ मधेश के अर्थमंत्री महेशप्रसाद यादव ने कहा।

मंत्री यादव के अनुसार, 30 अरब बजट की क्षमता होने के बावजूद सरकार ने 55 अरब की अनुमानित बजट लाने की तैयारी की थी, पर बाद में कटौती कर 47 अरब पर कायम किया गया। 10 प्रतिशत विविध कोषों में रखी गई राशि आवंटित हो चुकी है, इसलिए बजट घाटा दिख रहा है।

बजट व्यवस्थित बनाने के लिए मंत्रालयों को विखरित, अनुचित और चलने में असमर्थ योजना समर्पित करने को कहा गया है, लेकिन अभी तक कोई मंत्रालय योजना नहीं समर्पित कर पाया है।

‘अब तक किसी मंत्रालय ने योजना समर्पित नहीं की है। यदि कोई ठोस योजना प्रस्तुत करना चाहता है तो हम अनुमति देंगे, इसलिए जोखिम बना हुआ है,’ यादव ने जोड़ा।

दिलचस्प बात यह है कि तत्कालीन जनमत सरकार के नेतृत्व में अर्थमंत्री सुनिल यादव थे, वहीं अब कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार ने जनमत पार्टी के महेशप्रसाद यादव को अर्थमंत्री बनाया है।

पूर्व अर्थमंत्री सुनिलकुमार यादव ने कहा था कि संघीय सरकार से मिलने वाले विभिन्न अनुदान के आधार पर बजट बनाया गया है, और अब कटौती की संभावना है।

‘संघीय सरकार से मिलने वाले अनुदान को सम्मिलित करके बजट तैयार किया जाता है, लेकिन जनजातीय, निजात तथा जनजीविका आंदोलन के कारण संघीय सरकार 20 प्रतिशत बजट कटौती कर सकती है, जिससे बजट घट सकता है,’ उन्होंने कहा। उन्होंने आर्थिक अनुशासन का पालन करते हुए बजट कटौती को सकारात्मक रूप में लेने की आवश्यकता बताई।

पूर्व मुख्यमंत्री और जसपा नेपाल संसदीय दल के नेता सरोजकुमार यादव इस घाटे वाले बजट से प्रदेश को नुकसान होने का अनुमान लगाते हैं। ‘12 अरब के घाटे वाले बजट से प्रदेश को ही नुकसान होगा, कोई फायदा नहीं होगा,’ उन्होंने कहा। ‘जितना पैसा था, उतना ही अनुमानित बजट बनाना चाहिए था।’

पिछले पांच वर्षों में तत्कालीन जसपा नेपाल के मुख्यमंत्री लालबाबु राउत के नेतृत्व वाली सरकार ने कभी ऐसा घाटे वाला बजट नहीं बनाया था।

कैसे आया क्षमता से अधिक बजट?

अर्थ मंत्रालय में पिछले वर्ष की मौज्दात रकम 10 अरब अनुमानित थी, लेकिन केवल 4 अरब प्राप्त हुई। इससे 6 अरब की कमी आई। इसी तरह राजस्व संग्रह का अनुमान 9.5 अरब था, पर लगभग 5 अरब ही संग्रह हुआ।

आंतरिक ऋण 2 अरब लेने का अनुमान था, लेकिन आवश्यक तैयारी न होने की वजह से यह संभव नहीं हुआ। आंतरिक ऋण लेने के लिए नेपाल सरकार की अनुमति आवश्यक है, और यह ऋण केवल रोजगार एवं उत्पादनमुखी प्रयोजनों के लिए उपलब्ध होता है। ये सब कारण बजट 12 अरब कम होने के संकेत हैं, बताता है अर्थ मंत्रालय।

मंत्रालय के सचिव रामकुमार महतो के अनुसार, अनुमानित बजट में लक्षित राजस्व संग्रह नहीं होने से बजट कम होने की संभावना है, जो स्वाभाविक है।

‘अनुमान से राजस्व लक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ। असार १ तारिक तक अनुमान होता है, लेकिन बजट असार मास के अंत तक खर्च होता रहता है,’ उन्होंने कहा। ‘इस वर्ष अत्यधिक खर्च हुआ, मौज्दात कम रहा। पिछले वर्षों में यदि बजट अधिक खर्च नहीं हुआ तो मौज्दात पूरा होता था। इसलिए अनुमानित मौज्दात घटने से बजट कम होने की संभावना है।’

उन्होंने दूसरा कारण बताते हुए कहा कि स्थानीय तह से अपेक्षित राजस्व वितरण नहीं हो रहा है। ‘राजस्व वितरण में स्थानीय तह कमजोर हैं और कानून के अनुसार अपेक्षित राजस्व प्रदेश को नहीं मिला, घर-जमीन के कारोबार कम हो जाने से गिट्टी-बालू से राजस्व बकाया है। ये सब कारण राजस्व संग्रह को प्रभावहीन बना रहे हैं, इसलिए बजट कम होगा।’

हालांकि बजट कम होने के बावजूद उपभोक्ता समितियों से काम शुरू करने की तैयारी सरकार को और अधिक आर्थिक जोखिम में डाल रही है। एक सांसद के अनुसार, कुछ दिन पहले सत्ता गठबंधन के बैठक में कटौती बजट की समस्या सुलझाने के लिए २५ लाख तक की योजनाएं समर्पित करने की बात उठी थी। चर्चा के बाद कांग्रेस, जसपा नेपाल, नेकपा और जनमत के नेताअें २५ लाख तक की योजनाओं को उपभोक्ता समितियों के माध्यम से जोरजबरजस्ती कराने का प्रयास कर रहे हैं।