
ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इतिहास में पहली बार हीलियम के परमाणुओं को एक साथ दो भिन्न स्थानों पर मौजूद होने का प्रमाण दिया है। इस खोज ने लगभग एक शताब्दी पुरानी क्वांटम भविष्यवाणी की पुष्टि की है, जो ‘नेचर कम्युनिकेशन’ जर्नल में प्रकाशित हुई है। यह सफलता क्वांटम मैकेनिक्स और गुरुत्वाकर्षण के बीच संबंध को समझने में मदद करेगी और ‘थ्योरी ऑफ एवरीथिंग’ की खोज के लिए प्रभावशाली आधार मानी जा रही है। 17 चैत, Kathmandu।
ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी (एएनयू) के क्वांटम भौतिकविदों ने ब्रह्मांड के अत्यंत जटिल और अनोखे नियमों का प्रत्यक्ष अवलोकन कर विज्ञान में नया क्रांति ला दी है। उन्होंने इतिहास में पहली बार ‘हीलियम’ के परमाणुओं को एक साथ दो अलग-अलग स्थानों (इनटैंगल्ड अवस्था) पर पाए जाने का पता लगाया। ‘नेचर कम्युनिकेशन’ जर्नल में प्रकाशित इस अनुसंधान के मुख्य लेखक योगेश श्रीधर और डॉ. सिन हजम्यान के अनुसार, इसने लगभग एक शताब्दी पुरानी क्वांटम भविष्यवाणी को सत्यापित किया है।
पहले इस प्रकार का प्रयोग केवल ‘फोटोन’ (प्रकाश के कण) के साथ सफल हुआ था, लेकिन हीलियम के परमाणु बड़े कण होने के कारण गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में आते हैं, इसलिए यह खोज और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। डॉ. हजम्यान ने कहा, ‘कणों का एक साथ दो जगहों पर उपस्थित हो कर अंदर आपस में इंटरफेयर कर सकते हैं, यह बात आमतौर पर पाठ्यपुस्तकों में पढ़ी जाती थी, लेकिन इसे प्रत्यक्ष रूप में देखना वास्तव में सुंदर और अद्भुत अनुभव है।’ यह अनुसंधान छोटे स्तर पर होने वाली क्वांटम मैकेनिक्स और बड़े स्तर के गुरुत्वाकर्षण के बीच संबंध को समझने में मदद करेगा तथा विज्ञान की प्रतीक्षित ‘थ्योरी ऑफ एवरीथिंग’ की खोज में मजबूत आधार प्रदान करेगा।





