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विदेशी रोजगार जाने वालों को अब सरकार देगी अभिमुखीकरण प्रशिक्षण

समाचार सारांश

  • सरकार ने विदेशी रोजगार जाने वाले श्रमिकों को दिया जाने वाला अभिमुखीकरण प्रशिक्षण पूरी तरह से ऑनलाइन प्रणाली में संचालित करने की योजना बनाई है।
  • श्रम मंत्री दीपककुमार साह ने बताया कि पाठ्यक्रम आधारित 15-16 घंटे के वीडियो तैयार कर ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा और श्रमिक भी ऑनलाइन प्रशिक्षण लेंगे।
  • प्रशिक्षण प्रदान करने वाले 153 संस्थान शुल्क लेते हैं, सरकार ने शुल्क मात्र 700 रुपये निर्धारित किया है और अधिक वसूली पर अनुमति रद्द करने की चेतावनी दी है।

18 चैत, काठमांडू। विदेशी रोजगार जाने वाले श्रमिकों को विदेश जाने से पहले दिया जाने वाला अभिमुखीकरण प्रशिक्षण अब सरकार द्वारा संचालित किया जाएगा।

पहले विशेष संस्थानों द्वारा संचालित यह प्रशिक्षण अब श्रम, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय की ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से संचालित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

वर्ष 2003 (वि.सं. 2060) से विदेशी रोजगार जाने वाले श्रमिकों को पूर्व-प्रस्थान अभिमुखीकरण प्रशिक्षण निश्चित संस्थानों के माध्यम से दिया जाता रहा है।

वर्तमान में विदेशी रोजगार विभाग में सूचीबद्ध 153 संस्थान अभिमुखीकरण प्रशिक्षण दे रहे हैं। लेकिन सरकार के माध्यम से जाने वाले श्रमिकों को भैंसेपाटी स्थित राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रतिष्ठान से प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

अन्य श्रमिकों के लिए यह प्रशिक्षण प्रदायक संस्थानों द्वारा संचालित होता रहा है। मंत्रालय अब पाठ्यक्रम आधारित दृश्य सामग्री डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है।

पूर्व-प्रस्थान अभिमुखीकरण प्रशिक्षण (पीडीओटी) को पूरी तरह से ऑनलाइन प्रणाली पर आधारित बनाने की योजना श्रम मंत्रालय की है।

इस योजना के लागू होने के बाद वर्तमान में प्रशिक्षण देने वाले 153 संस्थानों का भविष्य संकट में दिखाई दे रहा है। ये संस्थान विदेशी रोजगार ऐन 2064 और अभिमुखीकरण प्रशिक्षण संचालन कार्यविधि 2076 के मापदंडों के अनुसार प्रशिक्षण दे रहे हैं।

प्रत्येक प्रशिक्षु से ये संस्थान 2,100 रुपए शुल्क लेते हैं। हालांकि विदेशी रोजगार विभाग ने शुल्क केवल 700 रुपए निर्धारित किया है और अधिक शुल्क लेने पर अनुमति निरस्त करने की चेतावनी दी है।

सरकार अपनी 100 दिन की 100 कार्यसूची के तहत अभिमुखीकरण प्रशिक्षण को पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी कर रही है।

श्रम मंत्री दीपककुमार साह ने बताया, “अब अभिमुखीकरण प्रशिक्षण पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाएगा। 15-16 घंटे के पाठ्यक्रम आधारित वीडियो तैयार कर ऑनलाइन रखे जाएंगे और श्रमिक ऑनलाइन ही शिक्षा ग्रहण करेंगे।”

“पाठ्यक्रम अनुसार 15-16 घंटे का वीडियो तैयार किया जाएगा, जो जिस देश में जाना है उसी देश के अनुसार होगा। वीडियो देखने के समय की माप और ऑनलाइन उपस्थिति भी आवश्यक होगी,” मंत्री साह ने कहा।

मंत्रालय प्रशिक्षण को ऑनलाइन नि:शुल्क संचालित करने की भी तैयारी कर रहा है और श्रमिकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

फिलहाल अभिमुखीकरण प्रशिक्षण प्रशिक्षण प्रदायक संस्थानों के माध्यम से ही दिया जा रहा है और जब पूरी तैयारी होगी तभी ऑनलाइन माध्यम से प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा। विदेश रोजगार बोर्ड को भी निर्देश दे दिया गया है।

हालांकि इस योजना से प्रशिक्षण प्रदायक संस्थान चिंतित हैं। विदेशी रोजगार अभिमुखीकरण व्यवसायी महासंघ के अध्यक्ष राजाराम गौतम ने कहा कि कानूनी आधार पर स्थापित संस्थानों के भविष्य के बारे में राज्य को जवाब देना चाहिए।

“अब शायद देश में कानून की जरूरत नहीं रही, हमने जो निवेश किया है, उसे कैमरा लगवाने तक कहा जाता है,” उन्होंने प्रश्न किया, “यह बड़ी पूंजी लगाकर किया गया काम है और अब ऐसा किया जा रहा है। सरकार की रणनीति क्या है? व्यवसायियों की स्थिति क्या होगी? इस पर ध्यान देना होगा।”

उन्होंने कहा, “इस क्षेत्र में लगभग 1,000 से 1,200 रोजगार प्रतिवर्ष प्रदान किए जाते हैं और करोड़ों की पूंजी निवेश है। यदि सरकार विकल्प नहीं देती तो संविधान के रोजगार के मौलिक अधिकार के बाबजूद हमारी रोजगार और निवेश की गारंटी क्या होगी?” उन्होंने अपनी चिंता व्यक्त की।

उन्होंने श्रमिकों के रोजगार, व्यवसायी और उनके परिवारों के भविष्य पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र स्थापना काल से ही अस्थिर रहा है और हाल ही में सरकार के निर्देशों के अनुसार करोड़ों रुपए का निवेश किया गया है।

“हाल ही में कई ने ऋण लेकर निवेश किया है, हम सरकार के मानकों के अनुसार काम कर रहे हैं,” उन्होंने कहा, “पहले सभी प्रशिक्षु प्रशिक्षण के लिए आते थे और व्यवसायिक स्तर पर करने की तैयारी थी, लेकिन वह कभी पूरा नहीं हुआ।”

तत्कालीन श्रम, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्री शरतसिंह भंडारी ने अभिमुखीकरण प्रशिक्षण संचालन कार्यविधि 2076 में संशोधन कर शुल्क 700 से बढ़ाकर 2,100 रुपये किया था और भाषा अध्ययन एवं प्रमाणपत्र परीक्षा शुल्क भी जोड़ा गया था।

नई व्यवस्था के तहत तीन दिन का प्रशिक्षण और अंत में भाषा अध्ययन एवं प्रमाणपत्र परीक्षा अनिवार्य था।

हालांकि प्रशिक्षण प्रदायक संस्थान 2,100 रुपए शुल्क लेकर भी केवल दो दिन का प्रशिक्षण दे रहे थे और वह भी पुराने पाठ्यक्रम के अनुसार।

इस विवाद के बाद विभाग ने 13 असोज 2081 में जारी विज्ञप्ति में प्रशिक्षण शुल्क 700 रुपए ही रहने की पुष्टि की थी।

साल 2018 में तत्कालीन सचिव पूर्णचंद्र भट्टराई की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय विदेशी रोजगार सुधार कार्यदल ने बताया था कि प्रमाणपत्र मिलने के बाद प्रशिक्षण की प्रवृत्ति बढ़ रही है और उचित शिक्षण सामग्री, प्रशिक्षण प्रदायक की ईमानदारी, निगरानी प्रभावकारिता, सीखने के मूल्यांकन प्रणाली एवं गंतव्य देश में प्रभावकारी प्रशिक्षण व्यवस्था का अभाव के कारण प्रशिक्षण प्रभावी नहीं हो पा रहा।

इसी आधार पर श्रम मंत्रालय ने 8 फागुन 2076 को पाठ्यक्रम में संशोधन कर प्रशिक्षण अवधि को दो दिन (10 घंटे) से बढ़ाकर तीन दिन (18 घंटे) कर दिया था और गंतव्य देश के अनुसार वर्गीकरण किया गया था।

अब सरकार प्रशिक्षण प्रदायक संस्थानों के माध्यम से दिया जाने वाला प्रशिक्षण भी ऑनलाइन नि:शुल्क उपलब्ध कराने की व्यवस्था कर रही है।