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आयल निगम के घाटे की पूर्ति कोष समाप्त, बालेन सरकार क्या करेगी?

२० चैत, काठमाडौं। अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के कारण ईंधन की मूल्य वृद्धि से नेपाल आयल निगम आर्थिक संकट में डूब गया है। बालेन्द्र शाह (बालेन) नेतृत्व वाली सरकार ने इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की है। पेट्रोलियम उत्पादों के एकमात्र आधिकारिक बिक्री और वितरण एजेंसी के रूप में संचालित निगम आर्थिक घाटे में फंसा हुआ है, जबकि संबंधित उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मन्त्रालय ने भी इस विषय में कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। यह मन्त्रालय प्रधानमन्त्री शाह स्वयं संभाल रहे हैं। मन्त्रालय के सचिव मधुसूदन बुर्लाकोटी ने बताया कि निगम इसका समाधान करेगा, जो निगम के संचालक समिति के अध्यक्ष की भूमिका निभाते हैं।

नेपाल आयल निगम ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण आर्थिक घाटा बढ़ते देख विदेश से पेट्रोलियम पदार्थ की कीमतों के प्रभाव को पूरी तरह समाप्त नहीं कर पाया है, और इसी के कारण पेट्रोल, डीजल और मट्टितेल पर प्रति लीटर १५ रुपए की मूल्य वृद्धि की गई है। इसके फलस्वरूप, काठमांडू, पोखरा और दिपायल में अब पेट्रोल की खुदरा कीमत प्रति लीटर २०२ रुपए तक पहुंच गई है, जबकि डीजल और मट्टितेल की कीमतें प्रति लीटर १८२ रुपए बनी हुई हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान पेट्रोल की उच्चतम कीमत १९९ रुपए प्रति लीटर थी। निगम ने इस मूल्य स्थिरीकरण के लिए कोष के धनराशि का उपयोग कर मूल्य समायोजन किया है।

ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों से परिवहन और सार्वजनिक यातायात की भाड़ा बढ़ने की संभावना है, जिसका सीधा प्रभाव उपभोक्ताओं पर पड़ेगा और महंगाई में और वृद्धि हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत ११० अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर १५० डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। चैत महीने में लगातार मूल्य वृद्धि के कारण निगम ने इस महीने पेट्रोल की कीमतें प्रति लीटर ४५ रुपए और डीजल की कीमतें ४० रुपए तक बढ़ाई हैं। निगम के जारी विवरण के अनुसार, पेट्रोल पर प्रति लीटर ३४ रुपए ३७ पैसे और डीजल पर १२० रुपए ५४ पैसे का घाटा दर्ज हुआ है।

निगम ने जनता से औपचारिक रूप से ईंधन की खपत घटाने का अनुरोध किया है। प्रवक्ता ठाकुर ने कहा, “मूल्य वृद्धि की प्रवृत्ति रुकने की संभावना नहीं है, इसलिए खपत घटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।” कार्यकारी निदेशक डॉ. चण्डिकाप्रसाद भट्ट ने भी कहा कि निगम के घाटे को कम करने का एकमात्र प्रभावकारी उपाय तेल की खपत कम करना है। उन्होंने बताया कि सरकार बाजार में जोरबिजोर प्रणाली लागू करने, सार्वजनिक क्षेत्रों में दो दिन कार्यालय बंद करने, विद्यालय-कॉलेज बंद करने तथा कोटा प्रणाली लागू करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है और सरकार से इसके लिए अनुरोध किया गया है।