
तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक प्लस ने मई महीने में दैनिक 2 लाख 6 हजार बैरल तेल उत्पादन बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह निर्णय मध्यपूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने के बीच लिया गया है। सऊदी अरब, रूस, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान के प्रतिनिधियों की वर्चुअल बैठक के बाद यह घोषणा की गई।
मध्यपूर्व में जारी सैन्य संघर्ष के बीच इन आठ देशों ने ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर दिया है। उन्होंने ऊर्जा पूर्वाधार पर हमलों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षतिग्रस्त ऊर्जा संरचनाओं की पुनर्स्थापना एक महंगी और समय लेने वाली प्रक्रिया है। ओपेक प्लस ने आगामी कदमों पर चर्चा के लिए 3 मई को पुनः बैठक करने का भी कार्यक्रम बनाया है।
ओपेक 1960 में स्थापित तेल उत्पादक देशों का संगठन है, जिसके मुख्य सदस्य सऊदी अरब, इराक, ईरान, कुवैत, वेनेजुएला आदि देश हैं। ओपेक के अलावा कुछ बड़े तेल उत्पादक देश जैसे रूस और कजाकिस्तान भी इस समूह से जुड़े हैं, जिस वजह से इसे ‘ओपेक प्लस’ कहा जाता है। ये देश तेल उत्पादन नीतियों का निर्धारण करते हैं, सदस्य देशों के हितों की रक्षा करते हैं और विश्व बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों के मूल्य निर्धारण में अहम भूमिका निभाते हैं।
फरवरी 28 से अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद मध्यपूर्व में संघर्ष तेज हुआ है, जिसने कच्चे तेल और परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति में उल्लेखनीय कमी लाई है और इसने वैश्विक आर्थिक हालात पर नकारात्मक प्रभाव डाला है।





