नेशनल प्याब्सन के उपाध्यक्ष पराजुली का कहना है- सप्ताह में दो दिन की छुट्टी से शैक्षिक कैलेंडर प्रभावित हो सकता है

२३ चैत, काठमाडौं। पेट्रोलियम पदार्थों की खपत कम करने और विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए सरकार द्वारा सप्ताह में दो दिनों की सार्वजनिक छुट्टी देने के फैसले के बाद शैक्षिक कैलेंडर प्रभावित होने की चिंता व्यक्त की गई है।
राष्ट्रीय निजी तथा आवासीय विद्यालय एसोसिएशन नेपाल (नेशनल प्याब्सन) के उपाध्यक्ष विष्णु पराजुली ने शनिवार और रविवार को छुट्टी देने पर वर्ष के कुल छुट्टियाँ १०४ दिन हो जाने और अन्य धार्मिक तथा सांस्कृतिक छुट्टियों को मिलाकर कार्यदिवसों से ज्यादा छुट्टियां होने से सरकार द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम समय पर पूरा न होने की संभावना जताई।
‘नेपाल का पाठ्यक्रम अंतरराष्ट्रीय स्तर का और विस्तृत है। कार्यदिवस घटाने तथा शैक्षिक सत्र को देर से शुरू करने पर हमारे निर्धारित शैक्षिक लक्ष्य पूरे नहीं होंगे। वर्तमान युवा नेतृत्व वाली सरकार को पेट्रोलियम आपूर्ति सुगम होने पर इस निर्णय पर पुनर्विचार कर सप्ताह में केवल एक दिन की छुट्टी का प्रावधान करना चाहिए,’ पराजुली ने न्यूज एजेंसी नेपाल से बातचीत में कहा।
उपाध्यक्ष पराजुली ने बताया कि शैक्षिक सत्र शुरू होने के दिन को १५ दिन तक आगे बढ़ाने के निर्णय से अतिरिक्त दबाव पैदा होगा। ‘पठन-पाठन के दिन कम हुए हैं और शैक्षिक सत्र १ वैशाख से १५ वैशाख तक बढ़ाने पर अतिरिक्त १५ दिन मुक्त होंगे, जिससे खर्च भी बढ़ेगा,’ उन्होंने तर्क दिया। वे मानते हैं कि समस्या का समाधान छुट्टियां बढ़ाने के बजाय दीर्घकालीन उपायों में खोजा जाना चाहिए।
साथ ही, सार्वजनिक सेवा प्रदान करने का वक्त सुबह ९ बजे से शाम ५ बजे तक निर्धारित किया गया है, जो व्यवहारिक दृष्टि से उचित नहीं है, पराजुली ने कहा। सुबह के समय घरेलू कार्य और बच्चों की देखभाल करनी होती है, जिससे कर्मचारी और सेवा ग्रहण करने वालों दोनों के लिए ९ बजे कार्यालय पहुंचना चुनौतीपूर्ण होगा, उनका अनुमान है।
‘इस निर्णय का एक गंभीर पहलू सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी है,’ उन्होंने कहा, ‘दैनिक मजदूरी पर काम करने वाले मजदूरों और कामकाजी अभिभावकों के लिए सप्ताह में दो दिन की छुट्टी बोझ बन गई है। बच्चों में मोबाइल की लत बढ़ेगी, अभिभावकों की निगरानी न होने के कारण वे गलती कर सकते हैं और सुरक्षा जोखिम बढ़ेगा। साथ ही, बच्चों की देखभाल के लिए एक अभिभावक घर पर रहने पर उनकी दैनिक आय पर भी प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ रहा है।’





