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किसानों को नहीं मिला गेहूं का उचित मूल्य, समर्थन मूल्य तय करने की मांग

कैलाली के किसानों को इस वर्ष गेहूं का उचित मूल्य नहीं मिला है और पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दो सौ रुपये कम मूल्य पर बिक्री करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। सरकार द्वारा इस वर्ष गेहूं का समर्थन मूल्य न तय किए जाने के कारण खाद्य सामग्री खरीद-बिक्री केंद्र मिल्स के साथ समन्वय में मूल्य निर्धारण कर रहे हैं। पानी और आंधी-तूफान के कारण गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है और किसानों को समय पर खाद व बीज न मिलने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, टीकापुर के कृषि तकनीशियन मोतिसिंह विक़ ने बताया। २५ चैत्र, कैलाली।

कैलाली के किसानों को इस वर्ष गेहूं का उचित मूल्य प्राप्त नहीं हुआ है। पिछले वर्ष प्रति क्विंटल चार हजार रुपये में गेहूं बेचने वाले इस वर्ष लगभग दो सौ रुपये कम मूल्य पर बिक्री करने को मजबूर हुए हैं। वर्तमान में गेहूं एक क्विंटल लगभग ३८०० रुपये में बिक रहा है। कुछ दिन पहले हुई वर्षा और तूफान की वजह से फसल को नुकसान भी पहुंचा है। किसान रूपलाल चौधरी ने बताया कि उन्होंने मेहनत से खेती की परन्तु उत्पादन का उचित मूल्य न मिलने के कारण वे निराश हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले वर्ष की तुलना में कम दामों पर गेहूं बेचना पड़ा, कुछ ज्यादा मूल्य मिलने की उम्मीद थी, समय पर खाद और बीज न मिलने व कड़ी मेहनत के बावजूद उचित मूल्य न मिलना समस्या है।’’

टीकापुर के मंझित रावल ने बताया कि सरकार ने समय पर गेहूं का समर्थन मूल्य निर्धारित न किया जिससे किसानों को उचित कीमत नहीं मिल सकी। उनके अनुसार किसान खाद व बीज समय पर न मिलने की समस्या के साथ-साथ बिक्री के दौरान भी उचित मूल्य न मिलने की परेशानी झेल रहे हैं। कुछ दिन पहले आया आंधी-तूफान और बारिश ने गेहूं के उत्पादन को कम कर दिया है। वर्तमान में संग्रहण केंद्रों पर भी उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, जिससे किसानों को हर तरफ घाटा हो रहा है। टीकापुर के पहलमान साउद ने बताया कि उन्होंने प्रति क्विंटल ४२०० रुपये की दर से चार क्विंटल गेहूं खरीद किए हैं। पिछले वर्ष भी वे इसी मूल्य पर खरीददारी कर चुके हैं और इस वर्ष की कीमत ठीक लग रही है। ‘‘पिछले वर्ष भी यही मूल्य था, इस वर्ष कीमत बढ़ेगी सोच कर समय पर खरीदने आया था, पर पिछले वर्ष जैसा ही मूल्य मिला है,’’ उन्होंने कहा।

टीकापुर स्थित भीम खाद्य सामग्री खरीद-बिक्री केंद्र के भीमबहादुर ठकुल्ला ने बताया कि वे अच्छी गुणवत्ता वाले (ढलने नहीं वाले) गेहूं को प्रति क्विंटल ३८०० रुपये तक खरीदते हैं। ‘‘अच्छी तरह से साफ नहीं किए गए गेहूं को ३६०० रुपये में खरीद करते हैं, गुणवत्ता देखकर ३९०० रुपये तक भी दे देते हैं,’’ उन्होंने कहा। खाद्य व्यवसायियों के अनुसार कैलाली में खरीदा गया गेहूं नेपालगंज और धनगढी के मैदा मिलों में प्रति क्विंटल करीब ४००० रुपये में बिक्री होता है। ठकुल्ला ने बताया कि उन्होंने अभी तक ४०० क्विंटल गेहूं प्रति क्विंटल ४००० रुपये की दर से बिक्री के लिए नेपालगंज भेजा है। पौडेल राइस मिल के संचालक रामहरी पौडेल ने बताया कि किसान अब गेहूं बिक्री के लिए लाने लगे हैं। ‘‘इस वर्ष पानी और तूफान की वजह से पका हुआ गेहूं गिर गया और छोटे दाने व मिट्टी वाले गेहूं बिक्री के लिए आए हैं,’’ उन्होंने कहा, ‘‘पिछले वर्ष प्रति क्विंटल ४२०० रुपये तक खरीदा था, इस वर्ष ३८५० से ३९०० रुपये प्रति क्विंटल तक खरीद कर रहा हूँ।’’

इस वर्ष सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य तय नहीं किया है। समर्थन मूल्य न निर्धारण के कारण खाद्य सामग्री खरीद-बिक्री केंद्र मिल्स के साथ समन्वय कर मूल्य निर्धारण कर रहे हैं। पिछले वर्ष सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रति क्विंटल ३८६७ रुपये ३८ पैसे निर्धारित किया था। पूर्व वर्षों की तरह हर वर्ष बढ़ाए जाने वाले समर्थन मूल्य इस वर्ष न तय किए जाने से किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। कृषि मंत्रालय ने समर्थन मूल्य निर्धारण के लिए अध्ययन कर प्रस्ताव उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय को भेजा है। टीकापुर नगर पालिका कृषि विकास शाखा के कृषि तकनीशियन मोतिसिंह विक के अनुसार गेहूं का समर्थन मूल्य समय पर निर्धारित होने पर किसानों को राहत मिलेगी। ‘‘समय पर समर्थन मूल्य तय हो तो किसानों को घाटे में बेचने की जरूरत नहीं होगी और दलालों से ठगी का खतरा भी कम होगा,’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस वर्ष मिल संचालक और खरीदारों ने स्वयं मूल्य तय किया है जिससे किसान उचित मूल्य नहीं पा सके हैं।’’