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डिजिटल प्रतिपक्ष की शुरुआत: प्रौद्योगिकी के माध्यम से सरकार को जागरूक करने का प्रयास

युवाओं ने रास्वपा नेतृत्व वाली सरकार के १०० दिन की प्रतिबद्धताओं को ट्रैक करने के लिए डिजिटल प्रतिपक्ष शुरू किया है। डिजिटल प्रतिपक्ष सरकार की १०० कार्यसूचियों को तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर ट्रैक करेगा। इसमें सांसदों की उपस्थिति, विधेयक ट्रैकिंग और नागरिक भागीदारी को प्रमुखता दी गई है। २६ चैत, काठमांडू। ‘गवर्नमेंट हंड्रेड प्रॉमिसेस इन हंड्रेड डेज!’ के नारे के साथ रास्वपा नेतृत्व की सरकार की हर प्रतिबद्धता को ट्रैक करने के उद्देश्य से युवाओं ने डिजिटल प्रतिपक्ष की स्थापना की है।

डिजिटल प्रतिपक्ष की पृष्ठभूमि में कहा गया है, ‘हमने देश में बदलाव की उम्मीद के साथ मतदान किया। लेकिन लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है, यह पुनः जागरूकता और सवाल उठाने को प्रेरित करता है। सरकार ने १०० दिन का वचन दिया है, अब हम इसे विपक्षी दृष्टिकोण से देख कर जागरूक करने के लिए डिजिटल प्रतिपक्ष बना रहे हैं।’ इसी प्रकार वेबसाइट पर दिन/घंटा/मिनट/सेकंड के आधार पर सरकार द्वारा निर्धारित समय सीमा का काउंटडाउन दिखता है। वेबसाइट खोलने पर दिखने वाला संदेश ‘स्किप’ करने के बाद विस्तृत जानकारी देखी जा सकती है।

प्रौद्योगिकी के माध्यम से सरकार को जागरूक करना चाहने वाले ये युवा अपनी पहचान छुपाना चाहते हैं। वे तथ्यात्मक प्रश्न पृष्ठभूमि से उठाना चाहते हैं। उनके अनुसार, प्रौद्योगिकी की ताकत से किसी एक व्यक्ति का प्रचार जरूरी नहीं है। ‘हम हर संभव चेतावनी देंगे, लेकिन हम में से कोई नेता बनने का प्रयास नहीं करेगा। निष्पक्ष और पूर्वाग्रह रहित होकर सरकार को प्रश्न और जागरूकता देंगे,’ संचालकों में से एक युवा ने कहा।

संसद में विपक्ष कमजोर होने के बावजूद प्रौद्योगिकी के जरिए आम जनता की आवाज को मजबूत बनाना उनका लक्ष्य है। वे वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में सत्तारूढ़ पार्टी की गणितीय शक्ति अत्यंत प्रबल होने के कारण विपक्षी दलों की भूमिका सीमित होने और सरकार पर उठाए गए प्रश्नों के कमजोर होने का खतरा बढ़ रहा बताते हैं। लोकतंत्र में नागरिकों की ‘वॉचडॉग’ भूमिका को प्रभावी बनाने के लिए ‘डिजिटल प्रतिपक्ष’ शुरू किया गया है।

डिजिटल प्रतिपक्ष का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका ‘१०० वादा ट्रैकर’ है। यह सरकार में सहभागी दलों द्वारा किए गए वादों और प्रतिबद्धताओं को कागज पर ही नहीं बल्कि व्यवहार में लागू किए जाने को तथ्य और प्रमाणों के आधार पर सार्वजनिक करता है। यह सरकार की १०० कार्यसूचियों को ट्रैक कर उनके प्रदर्शन का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करेगा।

डिजिटल प्रतिपक्ष में प्रत्येक सांसद का विवरण रखा जाएगा। नागरिक यह आसानी से जान सकेंगे कि उनके प्रतिनिधि संसद में क्या भूमिका निभा रहे हैं, उनकी हाजिरी कैसी है और उन्होंने कितनी बार जनचाहना के विषय उठाए हैं। इसके लिए वेबसाइट पर आईडी बनाकर लॉगिन करना आवश्यक होगा। इसके अलावा, ‘विधेयक ट्रैकर’ के जरिए संसद में पेश किए गए विधेयकों का मसौदा से लेकर निर्णय प्रक्रिया तक संगठित अध्ययन किया जाएगा। इसका उद्देश्य नीतिगत भ्रष्टाचार और नागरिक-विरोधी कानून निर्माण को रोकने के लिए डिजिटल सतर्कता बनाए रखना है।

डिजिटल प्रतिपक्ष में सरकार द्वारा निर्धारित कार्यसम्पादन पूरा करने के लिए शेष समय काउंटडाउन के रूप में दिखाया जाएगा, जिससे नागरिक केवल देखने वाले नहीं बल्कि सीधे भागीदार बनकर जागरूक करने का अवसर पायेंगे। ‘नागरिक जनमत’ के माध्यम से शासन प्रक्रिया में सीधे भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर जनमत संग्रह कर सरकार और संसद तक विचार पहुंचाने का दावा किया गया है।

एक अन्य प्लेटफॉर्म ‘प्रतिपक्षडॉटकम’ भी सरकार के वादों को ट्रैक करता है और यदि वे सफल नहीं होते या असफल होते हैं तो तथ्य सार्वजनिक करता है। यह ‘जनता की आवाज, सत्ता का जवाब’ के नारे के तहत डिजिटल निगरानी द्वारा सरकार को जागरूक करने का लक्ष्य रखता है। इसमें प्रतिबद्धता, लागू किए गए काम और असफलताएँ शामिल हैं और यह सरकार का ‘प्रॉमिस ट्रैकर’ के रूप में कार्य करेगा।

मजबूत सरकार के साथ मजबूत विपक्ष की आवश्यकता बताते हुए ये युवा डिजिटल प्रतिपक्ष के जरिए सरकार को जागरूक करने की एक नई संस्कृति विकसित कर रहे हैं।