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निर्माण व्यवसायी ने मूल्य वृद्धि को सहज बनाने की मांग की

नेपाल निर्माण उद्योग परिषद् गुल्मी के अध्यक्ष धनिश्वर गौतम ने पेट्रोलियम पदार्थ, बिटुमिन, सीमेंट, लोहे से बने सामग्रियों और मजदूरी लागत में ३० से ३६ प्रतिशत तक वृद्धि होने की सूचना दी है। निर्माण व्यवसायियों ने मूल्य वृद्धि को ‘प्राइस एस्केलेशन’ के रूप में तत्काल संबोधित करने और अनावश्यक प्रशासनिक दबाव को समाप्त करने के लिए सरकार से आग्रह किया है। निर्माण क्षेत्र में मूल्य वृद्धि और आपूर्ति की अस्थिरता ने परियोजनाओं की प्रगति पर प्रत्यक्ष प्रभाव डाला है, जिससे राष्ट्रीय विकास प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होने की चेतावनी दी गई है। २७ चैत, गुल्मी।

देश भर में चल रहे विकास एवं निर्माण परियोजनाओं में आवश्यक सामग्रियों के असामान्य मूल्य वृद्धि के कारण संपूर्ण निर्माण क्षेत्र प्रभावित हुआ है। गौतम के अनुसार पेट्रोलियम पदार्थ, बिटुमिन, सीमेंट, लोहे से बने सामान, परिवहन और मजदूरी की लागत में लगातार वृद्धि के कारण औसतन निर्माण लागत में ३० से ३६ प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। आपूर्ति में अस्थिरता और बाहरी कारणों से उत्पन्न इस स्थिति ने अधिकांश परियोजनाओं की प्रगति को सीधे प्रभावित किया है, व्यवसायियों ने बताया।

उनका कहना है कि यह समस्या किसी एक परियोजना या कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशव्यापी साझा चुनौती है। संवेदनशील परिस्थिति में भी विभिन्न संस्थानों द्वारा अनावश्यक प्रशासनिक दबाव, बार-बार स्पष्टीकरण मांगना, सतर्क करना और मानसिक तनाव उत्पन्न करने जैसी गतिविधियां जारी हैं, जिस पर व्यवसायियों ने गंभीर ध्यानाकर्षण कराया है। निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने को आवश्यक बताते हुए उन्होंने अनौपचारिक एवं अनैतिक अपेक्षाएं सरकार के सुशासन के विरुद्ध बताईं।

निर्माण व्यवसायियों ने सरकार से मूल्य वृद्धि को ‘प्राइस एस्केलेशन’ के रूप में तुरंत संबोधित करने, बाहरी एवं नियंत्रण से परे स्थितियों को ‘फोर्स मेजर’ या ‘एक्सेप्शनल कंडीशन’ के रूप में मान्यता देने, व्यवसायियों पर लगने वाले अनावश्यक दबाव को खत्म करने तथा सभी प्रक्रियाओं को पारदर्शी एवं निष्पक्ष रूप में संचालित करने की मांग की है। अध्यक्ष गौतम ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि निर्माण क्षेत्र की वास्तविक स्थिति की उपेक्षा करने से परियोजनाएं और प्रभावित होंगी। उन्होंने राष्ट्रीय विकास प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होने तथा संबंधित संस्थानों के साथ औपचारिक पहल करने के लिए मजबूर होने की चेतावनी भी दी है।