
२८ चैत, काठमांडू। पाकिस्तान ने शनिवार को युद्धरत अमेरिका और ईरान को वार्ता के मेज पर लाते हुए इस्लामाबाद में वार्ता की मेजबानी करने का फैसला किया है। ईरानी सभ्यता को नष्ट करने की धमकी देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के मध्यस्थता में ईरान के साथ नए प्रस्ताव के बाद दो सप्ताह के युद्ध विराम के लिए सहमति जताई थी। लेकिन अभी तक शांति वार्ता के सभी मुद्दे सुलझाए नहीं जा सके हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर बताया कि ईरान की तरफ से १० सूत्रीय प्रस्ताव आया है, जिसे उन्होंने ‘वार्ता का व्यवहारिक आधार’ कहा है। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि अमेरिकी पक्ष से १५ सूत्रीय प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में आज शुरू हो रही वार्ता में ट्रंप ने अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी व्हान्स को नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी है। उनके सहायक के रूप में ट्रंप ने अपने विशेष दूत स्टीव व्हिटकॉफ और जेरेड कुशनर को भी भेजा है। उनकी टीम शनिवार ही इस्लामाबाद पहुंच चुकी है। पाकिस्तान ने वार्ता और वार्ता स्थल की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और दोनों पक्षों को निश्चिंत रहने का आश्वासन दिया है।
क्या परिणाम सामने आएंगे? ट्रंप के शीर्ष वार्ताकार सहमति बनने के प्रति आशावादी हैं। उन्होंने इस वार्ता से समझौता होने और युद्ध समाप्ति की उम्मीद जताई है। अभी तक आधिकारिक तौर पर दोनों पक्षों के प्रस्ताव सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन अनौपचारिक तौर पर प्रस्ताव जारी हो रहे हैं। इसके बावजूद वैश्विक समुदाय के बीच संदेह बरकरार है। यूएई के राष्ट्रपति के वरिष्ठ कूटनीतिक सलाहकार अनवर गर्गश ने कहा कि कई तथ्य अभी स्पष्ट नहीं हुए हैं। ‘ईरान, अमेरिका और पाकिस्तान से विरोधाभासी बयान आ रहे हैं,’ उन्होंने कहा, ‘हमें इन बयानों का सामंजस्य स्थापित करना होगा और आगे बढ़ने के उचित रास्ते की पहचान करनी होगी।’
इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता में मुख्य रूप से चार विषयों पर चर्चा होगी, जिन पर वैश्विक समुदाय की गहरी रुचि है। अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हमेशा से परमाणु हथियार विकास का आरोप लगाता रहा है और वर्तमान युद्ध का मुख्य कारण यही बताते आया है। हालांकि ईरान ने इस आरोप को बार-बार नकारा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, पिछले १२ दिनों चले युद्ध और अमेरिका-इज़राइल के हमले में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भारी क्षति पहुंची है। अमेरिका दावा करता है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूर्व स्थिति में लौटाने में लंबा समय लगेगा। ईरान के पास मौजूद अनुमानित ४४० किलोग्राम अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भविष्य को लेकर भी संदेह जारी है। अमेरिका ने पिछले वर्ष इसफहान स्थित परमाणु अनुसंधान केंद्र पर हमला किया था, जिससे वह यूरेनियम भग्नाशेष में परिवर्तित हो सकता है। अमेरिकी रक्षा सचिव पिट हेगसेथ ने बुधवार को बताया, ‘उस यूरेनियम को २४ घंटे तक गहराई में दबाकर सुरक्षित रखा गया था। वर्तमान में ईरान के पास कोई परमाणु हथियार नहीं हैं, और यही इस कार्य की सफलता है।’





