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प्रदीप ने मुद्दा सुलझाने के लिए जेनजी के साथ दोनों हाथों में ५ लाख रुपये दिए थे

समाचार सारांश

  • निलंबित क्यान महानिर्देशक प्रदीप अधिकारी ने भ्रष्टाचार के मामले को सुलझाने के लिए जेनजी के साथ संपर्क किया है।
  • अधिकारी ने जेनजी सुलझाने वाले व्यक्ति से बैठक और रकम का लेनदेन डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट में दर्ज पाया गया है।
  • अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार, संगठित अपराध तथा आपराधिक साजिश से जुड़ी जांच चल रही है।

३० चैत, काठमांडू। भ्रष्टाचार के आरोप में न्यायिक प्रक्रिया के लिए फिलहाल डिल्लीबजार कारागार में बंद नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (क्यान) के निलंबित महानिर्देशक प्रदीप अधिकारी ने मुद्दा सुलझाने के लिए अंतिम समय में जेनजी का भी साथ खोजा है।

अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान कार्यालय ने भक्तपुर के नलिन्चोक में बने हेलिपोर्ट और पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में हुई भ्रष्टाचार की जांच अंतिम चरण में पहुंचा दी थी और मामले की दायर करने की प्रक्रिया शुरू करने वाला था। इससे बचने के लिए उन्होंने जेनजी नेताओं से संपर्क किया।

शुरुआती दिनों में भैरहवा में टैक्सी वे और एप्रोन के ठेका लेकर काम कर चुके अधिकारी ने अपने पुराने परिचित नवीनराज बस्नेत के जरिए अख्तियार में मामला सुलझाने की कोशिश की थी।

उस समय बस्नेत ने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के निजी सचिव राजेश बज्राचार्य के माध्यम से अख्तियार प्रमुख प्रेमकुमार राई से मामले निपटाने का संवाद भी किया था, जो पहले ही सार्वजनिक हो चुका है।

लेकिन यह प्रयास विफल होने पर अधिकारी ने भारतीय तांत्रिक बाबा ४३ वर्षीय सरया किन्नेरा (जय जगद्ब्बे) का इस्तेमाल किया। उस तांत्रिक बाबा को अख्तियार प्रमुख की तस्वीर भेजकर तांत्रिक विधि से नुकसान पहुंचाने की योजना बनाई गई थी।

जैसे-जैसे प्रयास असफल हुए, राई को हत्या की धमकी देकर इस्तीफा देने के लिए दबाव बनाया गया था, जिसके लिए फिलीपींस में रहने वाले अधिकारी के पूर्व साथी प्रकाश पाठक की मदद ली गई थी। धमकी देकर इस्तीफा दिलाने में सफलता मिलने के बाद १० करोड़ तक देने की बात कही गई और २ करोड़ की सुपारी भेजने का पता चला है।

लेकिन राई ने इस्तीफा नहीं दिया और मामला रुका नहीं, इसलिए अधिकारी ने जेनजी कार्यकर्ता की मदद भी मांगी।

अधिकारी द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल की डिजिटल फॉरेंसिक लैब रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने एक व्यक्ति से जेनजी सुलझाने के लिए बातचीत की है।

अधिकारी ने एक जेनजी नेता का नाम लेते हुए कहा, “इनको क्या चाहिए मैं तैयार हूं।”

जवाब में कहा गया, “मैं मिलाता हूं” और अधिकारी ने उस जेनजी नेता से मिलने के लिए भी कहा।

जेनजी सुलझाने वाले ने कहा – “ओके।”

अधिकारी ने कहा, “थोड़ा जल्दी।”

जेनजी सुलझाने वाले ने जवाब दिया – “मैं सेट करता हूं।”

इसके बाद अधिकारी ने कहा – “मेरे बारे में बात करते हैं, ऐसे व्यक्ति चाहिए।”

मिलाने वाले ने कहा – “लंबी ड्राइव पर लेकर बात करूंगा, २ दिन में आपसे मिलूंगा।”

फिर अधिकारी ने दो जेनजी का नाम लेते हुए कहा – “उनके जरिए उसे काम करवाऊंगा।” (यहां प्रदीप अधिकारी द्वारा बताए गए जेनजी नेताओं के नाम नहीं खोले गए हैं क्योंकि जांच जारी है और सबूत नहीं मिले हैं।)

अधिकारी ने पूछा – “ऑफिस में ही लेकर आओ।”

जेनजी सुलझाने वाले ने कहा – “परसों लाऊंगा।”

इस संवाद की सत्यता पुष्टि होना बाकी है, लेकिन एक जेनजी नेता अधिकारी के कार्यालय पहुंचते भी देखे गए हैं।

अधिकारी ने दो जेनजी नेताओं के नाम लेकर पूछा – “कौन पावरफुल है?”

जवाब में उस व्यक्ति ने एक नाम लिया और अधिकारी ने फिर पूछा – “कौन-कौन हैं, लड़कों को लेकर सड़क पर ले आएंगे?”

जेनजी सुलझाने वाला व्यक्ति एक और नाम भी लेकर आया है।

ऐसे ही, क्यान से जेनजी सुलझाने वाले ने ५ लाख नगद भी लिया।

क्यान की कर्मचारी चाँदमाला श्रेष्ठ ने वह रकम नगद लेकर भेजी थी।

रकम लेने कार्यालय पहुंचने पर चाँदमाला श्रेष्ठ ने प्रदीप को मेसेज किया – “…को देने वाला? पाँच तो दिया, पर छह की उम्मीद थी।”

अधिकारी ने जवाब दिया – “ओके।”

चाँदमाल ने पूछा – “एक मैं दूं?”

अधिकारी ने कहा – “इतना तो है! अब इतनी महंगाई हो गई है। सर को दिक्कत हुई है। बाद में करेंगे, कॉल कर।”

जेनजी सुलझाने वाले ने क्यान कार्यालय में दूसरे व्यक्ति को भी भेजकर पैसा लिया। क्यान कर्मचारी विष्णुप्रसाद पौडेल के माध्यम से चाँदमाला श्रेष्ठ के कार्यालय में ५ लाख नगद लेने का प्रमाण मिला है।

इस संदिग्ध ५ लाख के लेनदेन के बारे में अधिकारी कहते हैं कि यह उनका व्यक्तिगत पैसा है। उनका कहना है, ‘अपने खिलाफ आई झूठी खबरों का खंडन करने और जनमानस तक सही संदेश पहुंचाने के लिए में उन लोगों के साथ काम कर रहा हूँ। मैंने अपनी व्यक्तिगत सैलरी, भत्ते और अन्य आय से यह पैसा खर्च कर उपलब्ध करवाया है। क्यान ने इस मामले में कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया है।’

वहीं, जेनजी कार्यकर्ता कहलाने वाले अर्जुनबहादुर शाही ने भी क्यान कार्यालय निरीक्षण करने का बहाना बना कर अधिकारी को धमकी दी थी। यह घटना भी संशयास्पद मानी जा रही है। क्यान पहुंचने के बाद अख्तियार कार्यालय जाकर अख्तियार प्रमुख राई से इस्तीफा मांगने की घटना की भी जांच चल रही है।

२७ मंसिर को भ्रष्टाचार के आरोप में अख्तियार ने गिरफ्तार किए अधिकारी २१ मंसिर को न्यायिक प्रक्रिया के लिए जेल भेजे गए थे। उस दौरान पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में हुए भ्रष्टाचार के मामले में भी उन पर विधिक कार्रवाई शुरू हुई।

अभी उन पर संपत्ति शुद्धीकरण, संगठित अपराध, आपराधिक लाभ न लेने और आपराधिक साजिश रचने जैसी धाराओं में जांच चल रही है।

टिप्पणी: जेनजी सुलझाने वाली बातचीत करने वाला व्यक्ति रवि सिंघल है, जिसने दिवाकर ढुंगाना को क्यान भेजकर रकम ली है।