Skip to main content

बुटवल-गोरुसिङ्गे सडक ठेकेदारों की शिकायत: देश में मिट्टी की कमी के कारण विदेश से फंसे हुए सामग्री उपलब्ध नहीं

समाचार सारांश: बुटवल–गोरुसिङ्गे सड़क स्तरोन्नति में मिट्टी, बजरी और नदीजन्य पदार्थों की कमी से निर्माण कार्य बाधित हुआ है। लट १ के लिए आवश्यक 8 लाख 79 हजार घनमीटर मिट्टी में से अब तक केवल 69 हजार ही उपलब्ध हुई है। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण बिटुमिन आयात प्रभावित होने से कालोपत्रे कार्यों में जोखिम देखा जा रहा है। 30 चैत, बुटवल। बुटवल–गोरुसिङ्गे सड़क स्तरोन्नति के निर्माण में नदीजन्य सामग्री की कमी के कारण काम प्रभावित हुआ है। सड़क विस्तार के लिए बड़ी मात्रा में मिट्टी फिलिंग आवश्यक है। लेकिन कपिलवस्तु के कोठी नदी से बुटवल के पाखापानी तक फैले लट १ क्षेत्र में मिट्टी, बजरी और नदीजन्य सामग्री की कमी के कारण निर्माण कार्य ठप पड़ा है। आयोजन ने सभी प्रक्रियागत कार्य पूरे कर लिए हैं, फिर भी कई स्थानीय तहों ने वन क्षेत्र होने का हवाला देकर मिट्टी निकालने पर रोक लगा दी है, जिससे निर्माण कंपनियों को काम रोक देना पड़ा है, ठेकेदारों ने यह बताया। निकासी स्वीकृत और कर दाखिल किए गए क्षेत्रों में भी वन क्षेत्र होने का बहाना बनाते हुए नदीजन्य पदार्थ निकालने नहीं देने से रोजाना सैकड़ों मजदूर बेरोजगार हो रहे हैं और उपकरण चलाने में अक्षम हैं, निर्माण कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट मैनेजर गौरीशंकर महतो ने बताया।

आयोजना के आंकड़ों के अनुसार लट 1 के लिए लगभग 8 लाख 79 हजार 169 घनमीटर मिट्टी तथा बजरी और लगभग 8 लाख 71 हजार 46 घनमीटर नदीजन्य सामग्री आवश्यक है। लेकिन अब तक मिट्टी और बजरी की दिशा में केवल 69 हजार 277 घनमीटर ही उपलब्ध हुई है। नदीजन्य पदार्थ की 62 हजार 597 घनमीटर प्रत्यक्ष गठित की गई है, जबकि अन्य स्रोतों से 60 हजार 410 घनमीटर जुड़ने के बाद कुल 1 लाख 23 हजार 7 घनमीटर ही उपलब्ध हुई है, महतो ने बताया। अभी भी करीब 8 लाख 9 हजार 891 घनमीटर मिट्टी और बजरी तथा 7 लाख 48 हजार 38 घनमीटर नदीजन्य सामग्री की कमी बनी हुई है।

बुटवल उपमहानगरपालिक ने नदीजन्य पदार्थों की निकासी में सबसे अधिक देरी और लापरवाही की है, ठेकेदारों ने शिकायत की। महतो ने कहा, ‘विदेश से आयात की गई सामग्री आवश्यक कार्यों में प्रभाव नहीं डालती, लेकिन देश में उपलब्ध मिट्टी, बजरी और नदीजन्य सामग्री की कमी से काम रुकना विडंबना है।’ लट 1 के लगभग 25 किलोमीटर हिस्से के लिए लगभग 20 लाख घनमीटर मिट्टी आवश्यक होती है, लेकिन अब तक केवल 1 लाख 23 हजार 7 घनमीटर ही उपलब्ध हुई है, इसलिए काम सुचारु गति से नहीं हो पा रहा है, आयोजन की प्रमुख इंजीनियर कुशलता न्यौपाने ने बताया।

जबकि लट 2 क्षेत्र में यह समस्या नहीं है जहां आवश्यक से अधिक सामग्री उपलब्ध हो चुकी है। ‘लट 1 में मिट्टी की कमी सबसे बड़ी चुनौती है। पुल, कॉल्वर्ट और नाली निर्माण के अलावा मिट्टी फिलिंग का काम लगभग रुक सा गया है,’ उन्होंने कहा। ‘अभी भी 8 लाख 10 हजार घनमीटर मिट्टी तथा बजरी और 7 लाख 49 हजार घनमीटर नदीजन्य पदार्थ की जरूरत है, और स्थानीय तहों की देरी से निर्धारित समय में निर्माण संभव नहीं होगा।’

सड़क निर्माण के लिए विभिन्न स्थानीय तह और विभागों के बीच समझौते हो चुके हैं और राजस्व भी जमा किया गया है, फिर भी निकासी प्रक्रिया में अवरोध जारी है, जिसके लिए न्यौपाने ने चिंता जताई। ‘आगामी दो वर्षों में इस आयोजन को पूरा करने की योजना है, लेकिन अब तक केवल 23 प्रतिशत कार्य पूरा हुआ है। आवश्यक सामग्री की कमी के कारण लक्ष्य के अनुसार प्रगति नहीं हो पाई है।’