
सर्वोच्च अदालत ने नेपाली कांग्रेस की आधिकारिकता विवाद से संबंधित याचिका पर बहस समाप्त कर दी है। कांग्रेस उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा ने विशेष महाधिवेशन को वैध बताया और कहा कि नेतृत्व चयन का अधिकार महाधिवेशन प्रतिनिधियों के पास है। उन्होंने निर्वाचन आयोग के निर्णय को स्वीकार करते हुए याचिका खारिज करने की मांग की और कांग्रेस की प्रगति के लिए मार्ग प्रशस्त करने का आग्रह किया है। (४ वैशाख, काठमाडौं)
नेपाली कांग्रेस के आधिकारिकता विवाद से जुड़ी याचिका पर बहस पूरी हो चुकी है। सर्वोच्च अदालत के न्यायाधीश शारंगा सुवेदी और नृपध्वज निरौला की संयुक्त पीठ ने आज शुक्रवार याचिकाकर्ता और विपक्ष के वकीलों की बहस सुनवाई की। विपक्ष की ओर से कांग्रेस उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा ने अंतिम बहस में विशेष महाधिवेशन को वैध बताते हुए कहा, “कांग्रेस के विधान की धारा १७(२) के अनुसार, विशेष महाधिवेशन के कारण लिखित रूप में केंद्र को सूचित करते समय ज्यादातर उसी तरह नेतृत्व परिवर्तन और चयन का मुद्दा शामिल किया जाता है। अतः विशेष महाधिवेशन द्वारा नेतृत्व चयन पूरी तरह वैध है।”
विश्वप्रकाश शर्मा ने अदालत में याचिका खारिज करने की माँग करते हुए कहा, “याचिका खारिज हो, श्रीमान्, हम सभी वरिष्ठों को सम्मान के साथ साथ लेकर आगे बढ़ेंगे।” उन्होंने विशेष महाधिवेशन की औचित्य और वैधता के पक्ष में कई तर्क प्रस्तुत किए। उन्होंने ज़ोर दिया, “विशेष महाधिवेशन नेतृत्व चयन कर सकता है या नहीं, यह मुद्दा विवाद का विषय नहीं है। कांग्रेस के विधान की धारा १७(२) के अनुसार विशेष महाधिवेशन का कारण लिखित रूप में केंद्र को सूचित करते समय नेतृत्व परिवर्तन और चयन की बात शामिल की जाती है।”





