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‘बालेन शाह के पद और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए वारेस रखने की अनुमति’

सर्वोच्च अदालत ने मुख्यमंत्री बालेन शाह को उनके पदीय जिम्मेदारियों के कारण अवमानना के आरोप में वारेस रखने की सुविधा प्रदान की है। शाह ने प्रधानमंत्री की भूमिका के कारण स्वयं अदालत में उपस्थित न हो पाने की बात कहते हुए वारेस रखने की अनुमति मांगी थी। सामाजिक मीडिया में अदालत की भूमिका से जुड़ी टिप्पणियों के कारण पहले वारेस अनुमति नहीं दी गई थी। ४ वैशाख, काठमांडू।

सर्वोच्च अदालत ने बालेन शाह की पदीय जिम्मेदारी और भूमिका को ध्यान में रखते हुए उनके विरुद्ध अवमानना मामले में वारेस रखने की अनुमति देने का आदेश दिया है। शाह ने भी वारेस रखने के लिए सर्वोच्च अदालत में एक आवेदन दायर किया था। न्यायाधीश हरि फूयाल और शान्तिसिंह थापा की पीठ ने शाह लगातार अदालत में उपस्थित होते रहे हैं इस बात को प्रमाणित करते हुए उनकी वर्तमान पदीय आवश्यकता को स्वीकार करते हुए वारेस प्रदान किया है।

‘२६ असार २०८० को इस अदालत ने निर्धारित तिथि पर उपस्थित होने का आदेश दिया था। उक्त आदेश अनुसार बालेन शाह लगातार अदालत में उपस्थित होते आए हैं,’ सर्वोच्च अदालत ने आदेश में बताया, ‘वर्तमान में बालेन शाह की भूमिका और जिम्मेदारियों को भी ध्यान में रखते हुए आवेदन के अनुसार वारेस रखने की अनुमति दी गई है।’ शाह ने प्रधानमंत्री के रूप में स्वयं उपस्थित होने पर शक्ति पृथक्करण, नियंत्रण और संतुलन के सिद्धांतों पर विपरीत प्रभाव पड़ने का हवाला देते हुए वारेस की अनुमति मांगी थी।

नेपाल से संबंधित विवादास्पद विषय पर आधारित भारतीय फिल्म को काठमांडू महानगरपालिका के मेयर शाह ने सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने से रोका था। इसके खिलाफ उच्च न्यायालय पाटन ने अंतरिम रोक आदेश जारी किया था। ७ असार २०८० को सर्वोच्च अदालत ने सामाजिक मीडिया के माध्यम से अदालत की भूमिका का समर्थक टिप्पणी करने के बाद वर्षा कुमारी झा ने मेयर शाह के विरुद्ध अदालत में अवमानना की कार्यवाही करने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। अपने पक्ष में लिखित जवाब पेश करने के बाद मेयर शाह ने वारेस द्वारा अदालत में उपस्थित होने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया था। पर सामाजिक मीडिया की अभिव्यक्तियों से आम जनता में भ्रम फैलने के कारण पहले वारेस की अनुमति नहीं दी गई थी।