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सम्पत्ति छानबिन आयोग : अवैध संपत्ति की पहचान से जब्ती तक नई सरकार क्या कदम उठाएगी?

बालेन शाह

तस्बिर स्रोत, EPA/Shutterstock

सरकार ने सम्पत्ति जाँचबुझ छानबिन आयोग का गठन करने के बाद इसके स्पष्ट और विस्तृत कार्यक्षेत्र को लेकर भारी रुचि बढ़ी है।

मन्त्रीपरिषद की बुधवार हुई बैठक में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश राजेन्द्रकुमार भण्डारी की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय आयोग का गठन किया गया है।

सरकार के प्रवक्ता तथा शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, युवा तथा खेल मंत्री सस्मित पोखरेल के अनुसार आयोग को ’२०६२/०६३ से २०८२/०८३ वर्ष तक सार्वजनिक पदों पर कार्यरत प्रमुख राजनैतिक पदाधिकारियों और उच्च पदस्थ कर्मचारियों की सम्पत्ति की जानकारी संकलित, प्रमाणीकरण तथा जांच पड़ताल करने’ का दायित्व सौंपा गया है।

हालांकि सरकार ने सार्वजनिक पद के किन स्तरों तक के व्यक्तियों को ‘प्रमुख राजनैतिक पदाधिकारी एवं उच्चपदस्थ कर्मचारी’ माना जाएगा, इस पर स्पष्टता नहीं दी है।

पहले भी सरकार ने २०५८ साल में तत्कालीन कार्यरत न्यायाधीश भैरवप्रसाद लम्साल के नेतृत्व में न्यायिक जांचबूझ आयोग बनाया था, जिसने २०४७ के बाद विभिन्न क्षेत्रों के व्यक्तियों की सम्पत्ति की जांच की थी।