स्थानीय तहों की संख्या और सीमा परिवर्तन प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी

सरकार ने देशभर के स्थानीय तहों की संख्या और सीमा परिवर्तित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए संघीय मामले तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय ने मापदंड का मसौदा तैयार कर सुझाव मांगे हैं। इस मापदंड में जनसंख्या, भूगोल, प्रशासनिक सुगमता, आधारभूत विकास, आर्थिक क्षमता, प्राकृतिक संसाधन तथा भाषाई-सांस्कृतिक स्वरूप को आधार मानकर निर्णय लिए जाने का उल्लेख है। स्थानीय तह की संख्या और सीमा बदलते समय जिला समन्वय समिति के संयोजन में समिति बनाकर तीन महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की व्यवस्था की गई है। ६ वैशाख, काठमांडू।
सरकार ने इस प्रक्रिया के अंतर्गत ग्राम और नगरपालिका के वर्गीकरण की पुनरावलोकन संबंधी मापदंड का मसौदा तैयार कर सुझावों के लिए सार्वजनिक किया है। मापदंड में ‘ग्रामपालिका और नगरपालिका तथा वार्डों की संख्या और सीमाओं में बदलाव करने, उन्हें आपस में विलय करने या नगरपालिका के वर्गीकरण की पुनरावलोकन करने की बातें शामिल हैं। प्रस्ताव के अनुसार सातों प्रदेश सरकारों को इस मापदंड पर सुझाव देने होंगे।
मसौदे में परिवर्तन करते या ग्रामपालिका व नगरपालिकाओं को आपस में मिलाते समय छह महत्वपूर्ण आधार तय किए गए हैं। जिनमें जनसंख्या, भूगोल और प्रशासनिक सुगमता मुख्य आधार माने गए हैं। इसके अतिरिक्त आधारभूत विकास की स्थिति, आर्थिक क्षमता तथा प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता भी संख्या और सीमा परिवर्तन के आधार होंगे। भाषाई, सांस्कृतिक एवं सामुदायिक स्वरूप भी अन्य मुख्य आधारों में शामिल है। नेपाल नगरपालिका संघ के कार्यकारी निदेशक कलानिधि देवकोटा के अनुसार मंत्रालय को इलाम से लेकर बाजुरा के त्रिवेणी नगरपालिका तक के वार्ड विभाजन और सीमा परिवर्तन के लिए ९७ आवेदन प्राप्त हुए हैं।
देवकोटा ने कुछ दिन पूर्व एक लेख में कहा कि एक दशक पहले सीमा परिवर्तन करते समय कई मापदंडों का पालन नहीं किया गया था और कुछ निर्णय तर्कसंगत नहीं थे। उदाहरण के तौर पर हुम्ला के सिमिकोट, मनांग के चामे, मुस्तांग के जोमसोम और रसुवा के धुन्चे जिला मुख्यालय होने के बावजूद ये स्थान अभी भी ग्रामपालिका ही हैं। वहीं, रौतहट जिले में केवल जनसंख्या को आधार बनाकर १६ नगरपालिकाएं बनाई गई हैं। वह कहते हैं कि जिला मुख्यालय वाले स्थानों का ग्रामपालिका बने रहना और केवल कुछ जिलों में जनसंख्या को मापदंड मानकर कई नगरपालिकाओं का गठन होना प्रश्न उठाना स्वाभाविक है।





