ईंधन मूल्य वृद्धि का बहुआयामी प्रभाव, आर्थिक वृद्धिदर पर लगातार पड़ रहा झटका

समाचार सारांश
समीक्षा करके तैयार किया गया।
- इран-अमेरिका युद्ध के कारण चार महीनों में डीजल का मूल्य प्रति लीटर 136 रुपये से बढ़कर 237 रुपये हो गया है।
- विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने मध्य पूर्व युद्ध के कारण नेपाल की आर्थिक वृद्धि दर को 2.2 से 2.7 प्रतिशत तक सीमित रहने का अनुमान लगाया है।
- मध्यपूर्व युद्ध ने पर्यटन, निर्माण और परिवहन क्षेत्रों में संकट उत्पन्न किया है तथा ईंधन मूल्य वृद्धि से उपभोक्ताओं पर महंगाई का प्रभाव पड़ा है।
6 वैशाख, काठमांडू। चार महीने पहले अर्थात् 16 जनवरी 2026 को डीजल का मूल्य प्रति लीटर 136 रुपये था। इरान-अमेरिका युद्ध के प्रभाव से डीजल की कीमत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
16 अप्रैल 2026 तक डीजल का मूल्य 237 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुका है। नेपाल आयल निगम के अनुसार, ‘हाल के मूल्य समायोजन के बावजूद निगम को प्रति सप्ताह 5 अरब 75 करोड़ रुपये के लगभग घाटा हो रहा है।’
1 जनवरी 2026 को हवाई ईंधन का मूल्य प्रति लीटर 128 रुपये था जबकि 16 अप्रैल को यह बढ़कर 262 रुपये हो गया है। यानी चार महीनों में हवाई ईंधन की कीमत दोगुनी से अधिक बढ़ी है।
साथ ही, 1 जनवरी 2026 को पेट्रोल का मूल्य प्रति लीटर 159 रुपये था जो अब 222 रुपये तक पहुंच चुका है। संबंधित विशेषज्ञों के अनुसार ईंधन की कीमत में वृद्धि का अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
पिछले सप्ताह विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने नई आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान जारी किए। इन सभी संस्थाओं ने चालू वित्त वर्ष में इरान-अमेरिका युद्ध के कारण नेपाल की आर्थिक वृद्धि दर में कमी आने का अनुमान लगाया है।
आईएमएफ ने चालू वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि दर 2.2 प्रतिशत कम होकर लगभग 3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

आईएमएफ के अनुसार मध्यपूर्व में जारी तनाव तथा पिछले सितंबर में हुए युवा आंदोलन के कारण नेपाल की आर्थिक वृद्धि में गिरावट आएगी।
मध्यपूर्व संघर्ष से मूल्य वृद्धि का दबाव भी बनेगा, आईएमएफ एशिया प्रशांत विभाग के उपनिदेशक थोमल हेल्ब्लिंग ने बताया।
आईएमएफ ने बताया कि इस युद्ध के कारण नेपाल जैसे देशों में रासायनिक उर्वरकों की लागत बढ़ेगी और किसानों की आय घटेगी। खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि और पेट्रोलियम उत्पादों के महंगे होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिससे अंतिम रूप में घरेलू खाद्य एवं अन्य वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ेगा।
विश्व बैंक ने भी नेपाल की आर्थिक वृद्धि दर को 2.3 प्रतिशत तक सीमित रहने का अनुमान व्यक्त किया है। ‘नेपाल डेवलपमेंट अपडेट अप्रैल 2026’ में विश्व बैंक ने कृषि उत्पादन में गिरावट और खाड़ी देशों में युद्ध बढ़ने से नेपाल की अर्थव्यवस्था पर प्रत्यक्ष असर पड़ने की बात कही है।

विश्व बैंक ने पिछले भदौ में हुए आंदोलन के असर को भी अर्थव्यवस्था पर दिखने वाला बताया है और इस वर्ष सेवा क्षेत्र को सबसे अधिक प्रभावित होने का अनुमान लगाया है।
पर्यटन क्षेत्र में कमी, परिवहन व्यय में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के कारण नेपाल की अर्थव्यवस्था संकट में आने की आशंका विश्व बैंक ने जताई है। मध्यपूर्व युद्ध लंबा चलता है तो पर्यटक आगमन में कमी, रेमिटेंस में गिरावट और समग्र आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती आएगी।
एडीबी ने भी पिछले भदौ में हुए जनजी आंदोलन, राजनीतिक अस्थिरता और पश्चिमी एशिया में लगातार जारी युद्ध के कारण चालू वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि दर में मंदी आने का अनुमान लगाया है। इस वर्ष आर्थिक वृद्धिदर 2.7 प्रतिशत तक सीमित रह सकती है।
‘एशियन डेवलपमेंट आउटलुक अप्रैल 2026’ में एडीबी ने मध्यपूर्व युद्ध को केवल पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि का कारण नहीं, बल्कि पर्यटन और रेमिटेंस में भी जोखिम पैदा करने वाला बताया है।
चालू वित्त वर्ष में कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्रों में वृद्धि दर में कमी आएगी, एडीबी नेपाल आवासीय मिशन के अर्थशास्त्री मानवरसिंह खड्काले बताया।

उन्होंने कहा, ‘पूंजीगत निवेश में सुस्ती, निवेशकों की आत्मविश्वास में कमी और निर्माण क्षेत्र में मंदी से उत्पादन क्षेत्र की वृद्धि धीमी होगी, केवल विद्युत क्षेत्र उत्पादन-केंद्रित रहेगा। पश्चिमी एशिया के द्वंद्व की वजह से पर्यटन कमजोर होगा जिससे सेवा क्षेत्र भी प्रभावित होगा।’
निर्माण क्षेत्र में संकट
मध्यपूर्व युद्ध के कारण निर्माण उद्योग संकट में है, व्यवसायियों ने बताया। नेपाल निर्माण व्यवसायी महासंघ के महासचिव शिवहरी घिमिरे के अनुसार डीजल, पेट्रोल, मट्टितेल सहित निर्माण में आवश्यक बिटुमिन, सीमेंट, डंडा आदि सामग्री में लगातार मूल्य वृद्धि और कमी बढ़ रही है।

निर्माण सामग्री की बढ़ी हुई कीमत और कमी के कारण निर्माण व्यवसायियों पर बड़ा आर्थिक दबाव पड़ा है। महासंघ ने सार्वजनिक खरीद कानून को अवसंरचना-सुलभ बनाने की भी सरकार से मांग की है।
साथ ही, हर परियोजना में कीमत वृद्धि के अनुसार तत्काल मूल्य समायोजन निर्देशिका-2 जारी करने की सरकार से माँग की गई है।
पर्यटन और हवाई उड़ान क्षेत्र में समान संकट
मध्यपूर्व तनाव ने पर्यटन क्षेत्र को गंभीर संकट में डाल दिया है। मार्च 2026 में पर्यटक आगमन 2025 की तुलना में घट गया है। इसका मुख्य कारण इरान-अमेरिका युद्ध माना जा रहा है। इस सत्र में पदयात्रा और पर्वतारोहण के लिए आने वाले पश्चिमी पर्यटकों की संख्या कम हुई है।
आंकड़े दिखाते हैं कि मार्च 2026 में अमेरिका से 7974 पर्यटक आए, जो मार्च 2025 के 11,092 से 28.1 फीसदी कम है।
यूरोप से भी आगमन में समान रूप से गिरावट आई है। ब्रिटेन से मार्च में 4814 पर्यटक आए जो पिछले वर्ष के 5995 से 19.7 प्रतिशत कम है। यूरोपीय क्षेत्र के कुल आगमन में 18.9 प्रतिशत की गिरावट आई है।

नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपकराज जोशी के अनुसार खाड़ी देशों में युद्ध लंबे समय तक जारी रहने से मध्यपूर्व को ट्रांजिट करते हुए नेपाल आने वाले पर्यटकों की संख्या घट गई है।
‘युद्ध ने यात्रा को अनिश्चित बना दिया है,’ वे कहते हैं, ‘यह हमारे देश के लिए बड़ा झटका होगा।’
युद्ध के कारण ईंधन की आपूर्ति प्रभावित होने से पर्यटन सेवाएं भी महंगी हो गई हैं। हवाई ईंधन की कीमत दोगुनी होने से हवाई यात्राएं महंगी हो गई हैं।
वायुसेवा संचालक संघ के अध्यक्ष प्रतापजंग पांडे के अनुसार हवाई ईंधन मूल्य वृद्धि से हवाई सेवाएं महंगी हुई हैं, टिकट की कीमतें बढ़ीं और समग्र पर्यटन क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, काठमांडू–धनगढी मार्ग का अधिकतम हवाई किराया 23 हजार रुपये से ऊपर पहुंच चुका है।
परिवहन व्यवसायी भी संकट में
मध्यपूर्वी युद्ध के बीच निरंतर ईंधन मूल्य वृद्धि के कारण परिवहन व्यवसायी संकट में हैं। सरकार के साथ लंबी बातचीत के बाद पिछले सप्ताह किराया समायोजित किया गया था, लेकिन उसके बाद आयल निगम ने डीजल के दामों में भारी वृद्धि की।
नेपाल यातायात व्यवसायी राष्ट्रीय महासंघ ने ईंधन मूल्य वृद्धि से सार्वजनिक परिवहन संचालन में और चुनौतियां आई हैं बताई हैं।

महासंघ ने आयल निगम को दाम बढ़ाने के सार्थक विकल्प खोजने का सुझाव दिया है। साथ ही, उन्होंने सरकार से स्वचालित मूल्य समायोजन नीति अपनाने की भी मांग की है।
अंतिम प्रभाव उपभोक्ताओं पर
अर्थव्यवस्था के सभी स्तरों पर पड़े प्रभाव का अंतिम झटका उपभोक्ताओं को ही सहना पड़ रहा है। ईंधन कीमतों में वृद्धि से महंगाई बढ़ी है, जिससे बाजार की सभी वस्तुओं के दाम बढ़े हैं। गैस की समस्या भी बढ़ी है। निजी और सार्वजनिक क्षेत्र दोनों में परिवहन खर्च भी बढ़ गया है।
उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता प्रेमलाल महर्जन के अनुसार, ईंधन की कीमत बढ़ने पर दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम अत्यधिक बढ़ गए हैं। सेवा क्षेत्र पर भी समान प्रभाव पड़ा है। ऐसी स्थिति में भी सरकार उदासीन है, उन्होंने सवाल उठाए।
सरकार ने ईंधन आयात पर लगने वाले करों में 50 प्रतिशत कटौती की घोषणा की, लेकिन उपभोक्ताओं को कोई लाभ नहीं मिला, वे कहते हैं।
‘व्यवसायी हर दिन दाम बढ़ाते हैं और कृत्रिम कमी पैदा करते हैं, जबकि सरकार नियामक की भूमिका नहीं निभा पा रही है,’ उन्होंने कहा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में मूल्य वृद्धि होने पर तुरंत कीमत बढ़ाने, लेकिन घटने पर घटाने से बचने की प्रवृत्ति को वे सरकार का आर्थिक लाभ मानते हैं।
‘बाजार किसके नियंत्रण में है? यदि सरकार दाम नियंत्रित नहीं कर पा रही तो क्या बाजार केवल व्यवसायियों और दलालों के नियंत्रण में है?’ वे प्रश्न करते हैं।





