समाचार संक्षेप
- श्रम संस्कृति पार्टी के अध्यक्ष हर्कराज राई ने कहा कि संघीयता से संबंधित सभी विषय प्रधानमंत्री से ही पूछे जाने की स्थिति समाप्त होनी चाहिए।
- राई ने विकास निर्माण के लिए कानून में बड़े बदलावों की आवश्यकता बताई और वन मंत्रालय के द्वारा रोक लगाई जाने जैसी विरोधाभास की स्थिति पर सरकार से समाधान की अपील की।
- उन्होंने सभी संस्कृतियों के सम्मान की बात कही और संघीयता को इसकी मर्मानुसार लागू करने पर जोर दिया।
६ वैशाख, काठमांडू। श्रम संस्कृति पार्टी के अध्यक्ष हर्कराज राई ने कहा कि संघीयता सम्बंधित सभी विषय प्रधानमंत्री से ही पूछे जाने की स्थिति नहीं बनेगी।
रविवार पार्टी द्वारा ललितपुर में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए राई ने कहा कि संघीयता के मर्मानुसार कार्य नहीं किया जा रहा है, अतः इस स्थिति का अंत होना चाहिए। उन्होंने विकास निर्माण के लिए कानून में तुरंत बड़े बदलावों की आवश्यकता बताते हुए सरकार से आग्रह किया।
‘कानून में बड़े बदलाव करने होंगे। मैंने कल कानून मंत्री से भी मिला, उन्होंने भी कहा कि टिप्पणी आने चाहिए। हमारी समझ में कानून में बदलाव के बिना काम आगे नहीं बढ़ेगा,’ उन्होंने कहा, ‘उदाहरण के लिए, सड़क निर्माण करने वाला मंत्रालय सड़क बनाना चाहता है, वन मंत्रालय रोक लगाता है। जल आपूर्ति करने वाला मंत्रालय टैंक बनाना चाहता है, वन मंत्रालय फिर रोक लगाता है। ऐसा विरोधाभास हमारे देश में है।’
विकास निर्माण के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए कानून में बड़े बदलाव आवश्यक हैं, अध्यक्ष राई की धारणा है।
उन्होंने कहा कि भौतिक पूर्वाधार मंत्रालय के कार्य में वन मंत्रालय द्वारा लगाई गई रोक विरोधाभासी है, जिसे सरकार को सुधारने में देरी नहीं करनी चाहिए।
‘हम संस्कृतिवादी हैं। सभी संस्कृतियों का सम्मान करते हैं। कोई भी व्यक्ति अल्पसंख्यक हो या हो, उसकी संस्कृति को दबाया नहीं जाना चाहिए, नष्ट नहीं किया जाना चाहिए,’ उन्होंने कहा, ‘संघीयता मर्मानुसार लागू हो। ऐसी स्थिति न बने कि सभी बातें प्रधानमंत्री से ही पूछी जाएं, मैं वह नहीं चाहता।’







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