मल की कमी और बीमा भुगतान में देरी से परेशान केरा किसान, मंत्रालय ने सुविधा प्रदान करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की

कृषि तथा पशुपालन विकास मंत्रालय और केला उत्पादन करने वाले किसानों के बीच उत्पादन, विपणन और मल आपूर्ति से संबंधित विषयों पर चर्चा संपन्न हुई है। मंत्रालय ने बीमा, उत्पादन और बाजार प्रबंधन में समन्वयात्मक कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई है। किसानों ने नीतिगत जटिलताएं, मल की कमी और बीमा भुगतान प्रक्रिया में समस्याओं की शिकायत की है।
वर्ष २०७९ साल ७ वैशाख, काठमाण्डू। कृषि तथा पशुपालन विकास मंत्रालय और केला उत्पादक किसानों के बीच क्षेत्रीय स्तर पर चर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें कृषि विकास के लिए किसानों की स्थिरता आवश्यक होने पर जोर दिया गया। कृषि मंत्री गीता चौधरी की उपस्थिति में हुए इस संवाद में घरेलू कृषि उत्पादों को प्राथमिकता देने और आपूर्ति व्यवस्था को पारदर्शी बनाने पर बल दिया गया।
मंत्री चौधरी ने बताया कि विश्व बाजार में रासायनिक मल की कमी के बावजूद नेपाल में इसकी सुगम आपूर्ति के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। काला बाजार नियंत्रण और अनुचित मूल्य वृद्धि को रोकने के लिए सभी संबंधित पक्षों का सहयोग आवश्यक बताया गया। साथ ही, उपभोक्ताओं को प्रभावित न करने के लिए उत्पादन और मार्केटिंग में सरकार आवश्यक सहजीकरण कर रही है, यह स्पष्ट किया गया।
चर्चा के दौरान किसानों ने नीतिगत जटिलताएं, मल की कमी और विपणन संबंधी समस्याओं की शिकायतों का हवाला दिया। विशेष रूप से कृषि बीमा प्रीमियम भरने के बावजूद प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति न मिलने और एक वर्ष बीतने के बाद भी बीमा दावा भुगतान न होने की समस्या पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। केरा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य होते हुए भी आवश्यक तकनीक, मल और नीतिगत समर्थन के अभाव का उल्लेख किया गया। बाजार मूल्य अस्थिरता और सीमा निर्धारण की कमी के कारण किसान संकट में हैं, यह भी बताया गया।
५० लाख रुपये तक के निवेश पर ८० प्रतिशत बीमा सुविधा होने के बावजूद भुगतान प्रक्रिया प्रभावी न होने की शिकायत किसानों ने की। कैलाली के किसान दीपेन्द्र थारू ने निवेश के अनुपात में लाभ न होने की समस्या उठाते हुए कहा कि जब बाजार में आपूर्ति कम होती है तब किसानों को दोषी ठहराने का चलन उचित नहीं है। चितवन के जनकराज पन्त ने नदी किनारे के क्षेत्रों में खेती को बढ़ावा देने के लिए भूमि प्रबंधन की आवश्यकता जताई, जबकि बाराका के किसानों ने कृषि क्षेत्र में युवाओं को आकर्षित करने के लिए ठोस कार्यक्रम की मांग की।
किसानों की शिकायतों को सुनने के बाद कृषि मंत्रालय के सचिव डॉ. राजेन्द्रप्रसाद मिश्र ने बीमा प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए विभिन्न पहलें जारी होने की जानकारी दी। उन्होंने कृषि ज्ञान केंद्र से सिफारिश आने में देरी के कारण क्षतिपूर्ति वितरण प्रभावित होने स्वीकार किया और मल की आपूर्ति बढ़ाने पर जोर दिया, न कि केवल कोटा प्रणाली पर।
पूरे देश में परिचालित लगभग ८०० कृषि तकनीशियनों का प्रभावी प्रयोग आवश्यक बताया गया और सिंचाई व मल संबंधित क्षेत्रों में सरकार द्वारा विभिन्न अनुदान कार्यक्रम संचालित होने की जानकारी दी गई।





