
कुछ रिश्ते अत्यंत ही घनिष्ट होते हैं। ऐसे रिश्तों पर ऐसा लगता है कि वे कभी टुटते नहीं। लेकिन मृत्यु के आगे यह सिद्धांत काम नहीं करता। पर्वत के कुस्मा क्षेत्र की मेघा केसी भी अपने कुत्ते के साथ ऐसे ही करीबी संबंध में थीं। काले रंग और शरीर के कुछ हिस्सों पर भूरा रंग वाला उनका कुत्ता उनके लिए बेहद प्यारा था। वह कुत्ते को ‘काली’ कहकर बुलाती थीं। प्रेम की वजह से कभी-कभी ‘कालु’ भी कहती थीं। उनके लिए कुत्ता बहुत ही अनमोल था, कालु। उसने बचपन से ही इस कुत्ते की परवरिश की थी। सामाजिक संजाल पर साझा की गई कुछ साल पुरानी तस्वीर में काली बहुत छोटा दिखाई देता है और मेघा उस समय वर्तमान की तुलना में बहुत छोटी नजर आती हैं। त्योहारों में भी कुत्ते को टीका लगाया जाता था। और वह हमेशा उसे अपने पास रखती थीं।
लेकिन, कुछ दिन पहले ही काली ने अपनी जान दे दी। वह घर पर नहीं थीं, जब कुत्ते का निधन हुआ था। 11 साल साथ बिताए कुत्ते की मृत्यु के बाद मेघा बहुत दुखी हुईं। क्योंकि उन्होंने कुत्ते को अपनी बेटी समान पला था। उनके परिवार ने भी ये बताया कि 11 वर्षों के दौरान कभी कालु को दुख नहीं दिया गया, जो भी खाना चाहता वह दिया गया, और जहाँ जाना चाहता था वहाँ जाकर आया।
बेटी समान माने जाने वाले कुत्ते की मृत्यु के बाद मेघा ने पूरी विधि से अंतिम संस्कार किया और शोक सभा भी रखी। उन्होंने कुत्ते की आत्मा की शांति के लिए सफेद कपड़ा पहनाया, ज्योत दी, और नमक छिड़का। परिवार के सदस्य के मृत्यु की तरह शोक पूरी तरह मनाया गया। कुत्ते ने सुख-दुःख में साथ देने के लिए उन्होंने ‘काली’ को धन्यवाद दिया। मंगलवार तक कुत्ते की मृत्यु के तीन दिन का शोक भी पूरा कर लिया गया है। नेपाल में कुत्ते की मृत्यु के बाद परिवार के सदस्यों द्वारा शोक सभा रखना यह पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व भी तुलसीपुर के मानपुर के शशीधर पौडेल ने पिछले सावन महीने में नौ दिन तक शोक सभा रखी थी।




