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अस्पतालों में प्रसूति सेवा के दौरान होने वाली हिंसा पर राष्ट्रिय सभा में चर्चा होगी

समाचार सारांश

समीक्षा पश्चात तैयार किया गया।

  • महिला, कानून और विकास मंच द्वारा आयोजित कार्यक्रम में एफडब्लुएलडी के निदेशक सविन श्रेष्ठ ने प्रसूति हिंसा के खिलाफ कानून की कमी की बात कही।

८ वैशाख, काठमांडू। राष्ट्रिय सभा के तहत संघीयता सुदृढ़ीकरण और राष्ट्रिय सरोकार की समिति की अध्यक्ष जयंतीदेवी राई ने प्रसूति हिंसा से संबंधित विषयों पर सम्बंधित मंत्रालय के अधिकारियों को बुलाकर चर्चा करने की बात कही है।

११६वें अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला, कानून और विकास मंच (एफडब्लुएलडी) द्वारा मंगलवार को आयोजित ‘मबाट महिलावाद’ कार्यक्रम में सम्मानजनक मातृत्व सेवा तथा प्रसूति हिंसा से संरक्षण विषय पर सभा अध्यक्ष राई ने इस आशय की बात कही। उन्होंने कहा, ‘निजी अस्पतालों की तुलना में सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवा के दौरान हिंसा अधिक होती है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘ऐसे मामलों पर गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के साथ चर्चा करूंगी।’

हिंसा के खिलाफ कानून निर्माण और लैंगिक समानता के संघर्ष में एफडब्लुएलडी द्वारा नेपाली समाज में निभाई गई भूमिका की उन्होंने प्रशंसा की।

सम्मानजनक प्रसूति सेवा की वर्तमान स्थिति और कार्यक्रम के उद्देश्य पर एफडब्लुएलडी के कार्यकारी निदेशक अधिवक्ता सविन श्रेष्ठ ने प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रसूति सेवा के दौरान हिंसा के मामले में दंडित करने के लिए कानून की कमी है। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र की महिला विरोधी सभी प्रकार के भेदभाव उन्मूलन की महासन्धि (सीईडी) समिति की सातवीं आवधिक रिपोर्ट में भी नेपाल सरकार को कानून बनाने की सिफारिश की गई है।

श्रेष्ठ ने नेपाल में प्रसूति हिंसा के घटनाओं के ‘केस स्टडी’ प्रस्तुत करते हुए पीड़ितों के अनुभवों के माध्यम से कार्यक्रम के उद्देश्य को स्पष्ट किया।

इसी प्रकार, एफडब्लुएलडी के अधिवक्ता दीपेश श्रेष्ठ ने सुरक्षित मातृत्व सेवा और प्रसूति हिंसा से संबंधित वर्तमान वास्तविक स्थिति पर प्रकाश डाला।

प्रसूति सेवा के दौरान किस प्रकार की हिंसा हो सकती है, इस विषय पर वीडियो संदेश और नाटक प्रस्तुत किया गया। बज्रपानी द्वारा प्रस्तुत नाटक में ग्रामीण परिवेश में प्रसूति के दौरान महिलाओं को सामना करनी पड़ने वाली हिंसा को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया।

रविन तामांग के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक में रांहनी लामा, हेमंत मगर, रमिला मोक्तान, अस्मिता मगर, केशव सिंह और शुक्रराज मगर ने अभिनय किया।

कार्यक्रम में एफडब्लुएलडी ने एसआरएचआर यूथ फेलोज को सम्मानित भी किया। दिक्षिका गजमेर, सृष्टि सिंह, प्राथा धमला, ज्योति रायमाझी, राजेश भुजु, निराजन बोहोरा, प्रकाश शाही, सुनिता श्रेष्ठ और शर्मिला गोली को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में कानून के प्रोफेसर, कानून और नर्सिंग के विद्यार्थी, एसआरएचआर यूथ फेलोज, पत्रकार, अधिकारकर्मी, विभिन्न नागरिक समाज संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा प्रजनन स्वास्थ्य विशेषज्ञों की भागीदारी रही।