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क्याटालिस्ट के अंदरूनी हिस्से से ऑक्सीजन प्रवाह की नई खोज

वैज्ञानिकों ने क्याटालिस्ट की केवल सतह ही नहीं, बल्कि उसके अंदरूनी हिस्से से भी ऑक्सीजन के परमाणु प्रवाहित हो रहे हैं, इसका प्रत्यक्ष अवलोकन किया है। डालियान इंस्टिट्यूट ऑफ केमिकल फिजिक्स के शोधकर्ताओं ने ‘बल्क ऑक्सीजन स्पिलओवर’ प्रक्रिया को ‘एन्वायरनमेंटल ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी’ के माध्यम से खोजा है। इस खोज से क्याटालिस्ट की अवधारणा को त्रිआयामी बनाया जाएगा और ऊर्जा उत्पादन तथा पर्यावरणीय स्वच्छता में प्रभावी योगदान मिलेगा। ८ वैशाख, काठमांडू।

वैज्ञानिकों ने क्याटालिस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर वर्षों से चली आ रही मान्यता को चुनौती देते हुए महत्वपूर्ण खोज की है। डालियान इंस्टिट्यूट ऑफ केमिकल फिजिक्स की टीम ने पहली बार प्रत्यक्ष रूप से दिखाया है कि ऑक्सीजन के परमाणु केवल क्याटालिस्ट की सतह से ही नहीं, बल्कि इसके अंदरूनी भाग (बल्क) से भी प्रवाहित हो रहे हैं। ‘नेचर’ जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन से भविष्य में अधिक कुशल और स्मार्ट क्याटालिस्ट विकसित करने के नए मार्ग खुलेंगे।

आमतौर पर माना जाता था कि रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेज करने में केवल क्याटालिस्ट की बाहरी सतह सक्रिय होती है और उसका अंदरूनी भाग निष्क्रिय होता है। लेकिन प्रोफेसर ताओ झांग और यानकियांग हुआंग के नेतृत्व में टीम ने ‘एन्वायरनमेंटल ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी’ का उपयोग करके ऑक्सीजन के परमाणुओं को क्याटालिस्ट की आंतरिक परत से लेकर धातु की सतह तक प्रवाहित होते हुए ट्रैक किया है। वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया को ‘बल्क ऑक्सीजन स्पिलओवर’ नाम दिया है।

टाइटेनियम डाइऑक्साइड की भूमिका को समझने के लिए टीम ने रुथेनियम (Ru) और टाइटेनियम डाइऑक्साइड (TiO2) के मिश्रण का उपयोग किया। टाइटेनियम डाइऑक्साइड में ऑक्सीजन संग्रहण और उत्सर्जन की क्षमता पाई गई। परीक्षण के दौरान यह पाया गया कि ऑक्सीजन के परमाणु सतह से ३ से ५ परतें नीचे से होकर धातु की इंटरफेस तक पहुंचते हैं। प्रोफेसर वेई लियू के अनुसार क्याटालिस्ट की इंटरफेस ‘एटॉमिक गार्ड’ की तरह कार्य करती है और ऑक्सीजन प्रवाह को नियंत्रित करती है।

इस प्रयास का प्रभाव यह है कि लगभग ५० वर्षों तक वैज्ञानिकों का मानना रहा कि धातु और उसके आधारभूत सामग्री के बीच की अंतःक्रिया केवल सतह तक सीमित होती है। लेकिन यह नई खोज क्याटालिस्ट की द्वि-आयामी सतह की अवधारणा को एक त्रि-आयामी ‘सतह – इंटरफेस – अंदरूनी भाग’ के समन्वय में परिवर्तित कर देती है। यह विशेष रूप से ऊर्जा उत्पादन, प्लास्टिक निर्माण और पर्यावरणीय शुद्धता में क्याटालिस्ट की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद करेगी। प्रोफेसर झांग के अनुसार अब लक्ष्य है कि क्याटालिस्ट के अंदरूनी भाग को भी प्रत्यक्ष रूप से रासायनिक प्रतिक्रिया में शामिल कर उत्पादन लागत कम करना और दक्षता में वृद्धि करना।