Skip to main content

३ करोड़ से ऊपर के घरजग्गा लेन-देन अब केवल कंपनियों के माध्यम से ही होगा

समाचार सारांश

एआई द्वारा तैयार किया गया, संपादकीय समीक्षा के साथ।

  • सरकार ने ३ करोड़ रुपए से ऊपर के घरजग्गा लेन-देन कंपनियों के माध्यम से करना अनिवार्य कर दिया है।
  • भूमि व्यवस्था और अभिलेख विभाग ने केवल अनुमति प्राप्त कंपनियों के जरिए ही घरजग्गा लेन-देन का निर्देश दिया है।
  • मालपोत कार्यालय में बिचौलियों की भागीदारी हटाने के लिए कंपनी अनिवार्य किए जाने से सेवाग्राहियों को सुविधा मिलने की उम्मीद है।

९ वैशाख, काठमांडू। सरकार ने ३ करोड़ रुपए से अधिक मूल्य वाले घरजग्गा के लेन-देन अब कंपनियों के माध्यम से अनिवार्य करने का फैसला किया है। मंगलवार से यह व्यवस्था लागू होगी कि घरजग्गा का लेन-देन केवल अनुमति प्राप्त कंपनियों द्वारा ही किया जाएगा।

लोकतांत्रिक आंदोलन के बाद चुनी गई बहुमत सरकार ने भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई है। इसी नीति के अनुरूप घरजग्गा लेन-देन में बिचौलियों को खत्म करने के लिए कंपनी के माध्यम से लेन-देन करना अनिवार्य किया गया है।

नई सरकार ने कुछ ही दिनों में देश के विभिन्न मालपोत कार्यालयों में बिचौलियों को पुलिस ने नियंत्रित किया था। मालपोत और नापी कार्यालयों में अनावश्यक शुल्क एवं विभिन्न कारणों से काम में देरी होने पर सुधार के लिए घरजग्गा लेन-देन के लिए लाइसेंस प्राप्त कंपनियों को अनिवार्य किया गया है।

भूमि व्यवस्था तथा अभिलेख विभाग ने भी घरजग्गा लेन-देन केवल अनुमति प्राप्त कंपनियों या संघ संस्थाओं के माध्यम से करने का निर्देश दिया है तथा उनकी सूची सार्वजनिक की है। विभाग के अनुसार, उन कंपनियों की संख्या ६ है जिन्हें भू सेवा संचालित करने की अनुमति मिली है। घरजग्गा लेन-देन के लिए अनुमति प्राप्त कुल कंपनियों की संख्या ६९ है, लेकिन काम करने में सक्षम कंपनी केवल ६ हैं।

विभाग ने काठमांडू के कलंकी, चाबहिल, सुनसरी के धरान, बार के सिमरा, मकवानपुर के हेटौंडा, चितवन के भरतपुर और चनौली, कास्की के पोखरा और लेखनाथ, दंग के तुलसीपुर, रुपन्देही के बुटवल मालपोत कार्यालयों को इस व्यवस्था को लागू करने का निर्देश दिया है।

महानगरपालिका और उपमहानगरपालिका क्षेत्रों में ३ करोड़ से अधिक मूल्य वाले घरजग्गा के लेन-देन केवल अनुमति प्राप्त कंपनियों या संघ संस्थाओं के माध्यम से ही करने की व्यवस्था पिछले फाल्गुन से लागू है।

मालपोत नियमावली, २०३६ (आठवीं संशोधन २०८२) की नियम संख्या २३ के अनुसार, अनुमति प्राप्त व्यक्तियों को भू सेवा केन्द्र संचालित कर भू-जानकारी प्रणाली के माध्यम से घरजग्गा लेन-देन करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इस अनुमति के बिना यह निर्देशिका लागू नहीं हो पा रही थी।

मालपोत कार्यालयों में सुविधाकारकों के नाम से कर्मचारी काम करते थे और सीधे सेवा प्राप्तकर्ता से संपर्क नहीं करते थे तथा अतिरिक्त शुल्क लेते थे। कंपनी के अनिवार्य होने से सेवाग्राहियों को आसानी मिलने की उम्मीद की जा रही है।

मालपोत कार्यालय के कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई पर नेपाल लेखापढ़ी कानून व्यवसायी एसोसिएशन के पाटन इकाई ने विरोध जताया था। हालांकि, बिचौलियों के कारण मालपोत कार्यालय में सीधे सेवा लेना कठिन था।

कंपनियों के प्रवेश से मालपोत प्रशासन में सुधार होगा, यह विश्वास है। घरजग्गा खरीद, बिक्री, नाप-जोख आदि कार्यों के लिए मालपोत कार्यालय के बाहर लेखापढ़ी कार्यालय जाना पड़ता है। बिना लेखापढ़ी कार्यालय में जाने पर कर्मचारी काम न करने के लिए सेवाग्राहियों को वापस भेजते हैं, ऐसी शिकायतें आयी हैं।

मालपोत कार्यालय में ‘डोल्मा’ नामक प्रणाली उपयोग में है। यह प्रणाली आम जनता के लिए उपलब्ध नहीं है, लेकिन प्रक्रिया कठिन होने के कारण लेखापढ़ी सहायता लेना आवश्यक हो जाता है।

कम से कम कर्मचारी इस प्रणाली तक पहुँच रखते हैं। मालपोत के सभी कार्य इसी ऑनलाइन प्रणाली से किए जाते हैं। देशभर के सभी मालपोत कार्यालयों में यह सॉफ्टवेयर उपलब्ध है। लेकिन इस प्रणाली को आम लोगों के लिए आसान नहीं माना जाता है, यह मालपोत के कर्मचारियों का कहना है।