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माइतीघर में महतो दंपती का भावुक प्रदर्शन

९ वैशाख, काठमांडू। बहरीन में पार्किंग में गाड़ी साफ करने का काम करने वाले सर्लाही, बरहथवा के भागनारायण महतो और उनकी पत्नी उमाकुमारी देवी की जीवन यात्रा संघर्षपूर्ण रही है। वे सुबह जल्दी उठकर गाड़ी साफ करते थे, जहां उनकी तनख्वाह मात्र ७८ बहरीन डिनर (लगभग ३१ हजार नेपाली रुपए) थी। ग्राहक खुश होने पर वे अतिरिक्त टिप देते, खासकर ईद और रमजान के दौरान वह टिप १५० डिनर तक पहुंच जाती थी। इस प्रकार जुटाए गए पैसों से वे परिवार का पालन-पोषण करते और कुछ रकम सप्तरी में रहने वाली पत्नी को भेजते थे।

सन् २०७२ की बात है – उमाकुमारी को पैसों की ज़रुरत पड़ने पर उन्होंने पड़ोसी निशान मैनाली की मां से डेढ़ लाख रुपये ब्याज सहित ऋण लिया। ऋण लेने के बाद वे आर्थिक जाल में फंस गए। ब्याज के संबंध में जानकारी मिलने पर वे समस्याओं में पड़ गए। निशान मैनाली के परिवार ने २०७४ से लेकर २०७९ तक मिटर ब्याज पर ऋण मांगते हुए जमीनी जमीन को दृष्टिबंधक नाम पर अपने नाम करा लिया। उमाकुमारी ने अपने भाई के नाम से लगभग १० कठ्ठा जमीन का नामांतरण किया था, जो कि भागनारायण ने वर्षों की मेहनत से खरीदी थी।

लेकिन ऋण देने वाले परिवार ने उक्त जमीन पर ‘दृष्टिबंधक’ लगा दिया और चार दिनों के भीतर लालपुर्जा निशान की मां के नाम कर दिया। निरक्षर उमाकुमारी इस बात को समझ नहीं पाईं। कुछ समय बाद ऋण राशि १० लाख रुपये तक पहुंच गई, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई। महतो परिवार ने निशान के परिवार को ६५ लाख रुपये से अधिक राशि दी, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला। उन्होंने अन्य जमीन बेचकर और गांव के लोगों से भी ऋण लेकर भुगतान किया। अभी भी उनका ऋण बहुत बकाया है। शिकायत दर्ज कराने के बावजूद स्थानीय प्रशासन ने निशान की मां को सफाई दी।

२०७९ में अपनी बेटी की शादी के समय भागनारायण को पता चला कि जमीन निशान की मां के नाम पर हो चुकी है। जब बैंक से ऋण लेने गए तो जमीन का नाम किसी और का दिखा, तब वे इस घटना के प्रति सचेत हुए। पुलिस ने उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया और निशान के परिवार ने उल्टे मुकदमे दायर किए। भागनारायण बताते हैं कि इस दौरान ग्रामीणों का पूरा समर्थन मिला था। वे खेत काम करने, रोपाई करने और धान काटकर रखने में गांववालों की मदद करते थे। लेकिन अदालत ने दोनों पक्षों को मिलकर काम करने से रोक दिया है। महतो दंपती न्याय की तलाश में काठमांडू आए हैं और बुधवार को माइतीघर मण्डलामा धरना दे रहे थे। वे पहले भी मिटर ब्याज के खिलाफ आंदोलन कर चुके हैं और प्रधानमंत्री से मिले, फिर भी न्याय नहीं मिला। गृह मंत्री से मिलने पर कार्रवाई का आश्वासन मिला, परंतु न्याय अब तक नहीं हो पाया है।

माइतीघर में धरना देने वाले महतो दंपती भागनारायण ने कहा, “बहरीन, सऊदी और मलेशिया से कमाई गई संपत्ति खत्म हो गई। अब परिवार का पालन-पोषण कठिन हो गया है। सरकार निशान परिवार की संपत्ति की जांच कर सत्य तथ्य सामने लाए।” निशान मैनाली का प्रतिवाद: आरोप निराधार, अदालत ने फैसला दे दिया है। निशान मैनाली ने कहा, “मेरे नाम पर कोई जमीन नहीं है और मैंने किसी का लाखों रुपये नहीं खाए हैं। यदि ऐसा होता तो पुलिस मुझे पहले ही पकड़ लेती।” उन्होंने महतो परिवार के आरोपों को अस्वीकार करते हुए कहा कि वे झूठे दावे कर मामले में फंसा रहे हैं। अदालत ने जमीन का मामला अपना फैसला दे दिया है और कानूनी रूप से जमीन उनका परिवार की है। उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रमाण सहित वापस लेने को भी तैयार होने की बात कही।