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राष्ट्रीय प्रतिबद्धता हेतु सरकार द्वारा सुझाव मांगे जाने पर दलों ने नहीं दी प्रतिक्रिया

समाचार सारांश

EDITORIALLY REVIEWED.

  • सरकार ने शासकीय सुधार पर राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के मसौदे में सत्ताविहीन पांच दलों से सुझाव मांगे थे, लेकिन निर्धारित समय में कोई सुझाव प्राप्त नहीं हुआ।
  • नेपाली कांग्रेस, नेकपा एमाले, नेकपा, श्रम संस्कृति पार्टी और राप्रपा ने सुझाव नहीं देने की जानकारी दी है और कहा कि पार्टी में चर्चा जारी है।
  • सरकार ने आगामी पाँच वर्षों में आर्थिक विकास दर सात प्रतिशत, १५ लाख रोजगार सृजन और स्वास्थ्य बजट ८ प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।

१० वैशाख, काठमाडौं । शासकीय सुधार संबंधी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के मसौदे के लिए सरकार ने विपक्षी दलों से सुझाव मांगे थे, लेकिन निर्धारित समय में किसी दल ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। प्रतिनिधि सभा चुनाव के बाद राष्ट्रीय दल बने ६ दलों के प्रतिबद्धता पत्रों के आधार पर सरकार ने ‘राष्ट्रीय प्रतिबद्धता’ का मसौदा प्रकाशित कर अन्य दलों से सुझाव मांगे थे।

सरकार ने सत्ताविहीन पांच दल—नेपाली कांग्रेस, नेकपा एमाले, नेकपा, श्रम संस्कृति पार्टी और राष्ट्रिय प्रजातन्त्र पार्टी (राप्रपा)—से सुझाव मांगे थे।

नए साल के पहले दिन सरकार ने शासकीय सुधार के लिए सभी दलों के घोषणापत्रों को समेट कर मसौदा तैयार कर दस दिन के भीतर सुझाव देने का आग्रह किया था, लेकिन निर्धारित समय अवधि (वैशाख १०) तक किसी दल ने सुझाव प्रस्तुत नहीं किया।

प्रमुख विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस में इस विषय पर चर्चा जारी है। कांग्रेस प्रवक्ता देवराज चालिसे ने कहा, ‘सरकार से मांगे गए सुझाव नहीं दिए गए हैं, चर्चा जारी है।’

नए सरकार गठन के दिन (चैत १३) मंत्रिपरिषद द्वारा पारित शासकीय सुधार के एक सौ कार्यसूची में तीसरे स्थान पर उल्लेख है कि ‘निर्वाचन में भाग लेने वाले सभी राजनीतिक दलों के घोषणापत्र, वाचापत्र और प्रतिबद्धताएं तैयार कर नेपाल सरकार के सामूहिक स्वामित्व में ली जाएं’।

राष्ट्रीय दलों से प्राप्त सुझावों को सम्मिलित कर तैयार की गई राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के आधार पर आगामी आर्थिक वर्षों के नीति और कार्यक्रम निर्धारित किए जाएंगे और उसके अनुसार नीति, कार्यक्रम व बजट में सुधार होगा।

प्रतिबद्धता के कार्यान्वयन हेतु मंत्रालय और संबंधित निकाय अपने वार्षिक कार्य योजनाओं और बजट में इसे शामिल करेंगे। राष्ट्रीय प्रतिबद्धता में शामिल विषयों को लागू करने के लिए विभिन्न निकायों के बीच समन्वय होगा और प्रधानमंत्री कार्यालय इसका प्रबंधन करेगा।

नेकपा एमाले ने कहा है कि सरकार को पहले विपक्षी दलों से राष्ट्रीय प्रतिबद्धता पर चर्चा कर सुझाव प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए। एमाले के उपाध्यक्ष गुरु बराल ने कहा, ‘मसौदा पर पार्टी में प्रारंभिक चर्चा हुई है, लेकिन सत्ता पक्ष की प्रक्रिया उचित नहीं है। यह मुद्दा चर्चा के बाद तय होना चाहिए, सिर्फ चिट्ठी के जरिए जवाब भेजना पर्याप्त नहीं है। सरकार ने सुझाव की मांग केवल प्रचार के उद्देश्य से की है।’

नेकपा ने कहा कि मसौदे पर सुझाव देना पार्टी की बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं है। नेता देवेंद्र पौडेल ने कहा, ‘सरकार ऐसा प्रतीत नहीं होता कि अन्य दलों की मांग कर रही है। राष्ट्रीय प्रतिबद्धता पर सुझाव देने को लेकर पार्टी में ज्यादा चर्चा नहीं हुई है।’

राष्ट्रिय प्रजातन्त्र पार्टी (राप्रपा) ने भी निर्धारित समय (वैशाख १०) तक सुझाव प्रस्तुत नहीं किए हैं। राप्रपा प्रवक्ता मोहन श्रेष्ठ ने बताया कि पार्टी में चर्चा जारी है।

सरकार द्वारा जारी मसौदे में नेपाल को मध्यम आय वाला देश बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत पाँच वर्षों में आर्थिक विकास दर को सात प्रतिशत तक पहुंचाना है।

प्रति व्यक्ति आय को ३,००० अमेरिकी डॉलर पहुंचाना, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को १०० बिलियन अमेरिकी डॉलर के करीब लाना एवं पाँच वर्षों में गरीबी दर को १० प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य भी मसौदे में शामिल है।

प्रदेश एवं स्थानीय तह के साथ सहयोग कर पाँच वर्षों में अतिरिक्त ३ लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में सिंचाई सुविधा प्रदान करना है। निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी में रासायनिक उर्वरक कारखाना स्थापित करने का भी प्रतिबद्धता पत्र में उल्लेख है। नेपाल आने वाले पर्यटकों की संख्या, प्रवास और खर्च को दोगुना करने का सरकारी लक्ष्य है। २०२७ वर्ष को ‘राष्ट्रीय आरोग्य वर्ष’ के रूप में मनाने का संकल्प भी मसौदे में शामिल है।

आगामी दशक में ३०,००० मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए कानून संशोधन की योजना सरकार ने बताई है। राष्ट्रीय गौरव के परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से कार्यान्वित करने की प्रतिबद्धता भी जाहिर की गई है।

पाँच वर्षों में १५ लाख रोजगार सृजन करने के लक्ष्य के साथ रोजगार हेतु शिक्षा प्रणाली विकसित करने और प्रत्येक स्थानीय तह में कम से कम दो नमूना विद्यालय स्थापित करने की योजना है। स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट हिस्सेदारी को २०८८ तक ८ प्रतिशत तक बढ़ाना लक्ष्य रखा गया है।

संघीय स्तर पर १७ मंत्रालय स्थापित किए जाएंगे और आगामी पाँच वर्षों में सरकारी सेवाओं में २५ प्रतिशत नई जनशक्ति भर्ती की योजना है।

सातों प्रदेशों में अत्याधुनिक खेल सुविधाएं विकसित करने की प्रतिबद्धता भी इसमें शामिल है।