नेपाल में जेन जेड आन्दोलन: आयोग की कार्यवाही की सिफारिश, बालेन को भी हो सकती है परेशानी?

जेन जेड आन्दोलन की जांच के लिए गठित आयोग ने अपनी रिपोर्ट के कार्यान्वयन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सरकार से आगामी सप्ताह में कार्रवाई करने की सिफारिश की है। जांच समिति की संयोजक एवं सदस्य लिली थापा के अनुसार, आगामी बुधवार, वैशाख १६ को आयोग अपनी रिपोर्ट के आधार पर सरकार को कार्रवाई की सिफारिश प्रस्तुत करेगा। “उसी दिन आयोग पत्रकार सम्मेलन करके रिपोर्ट का सारांश भी सार्वजनिक करेगा,” थापा ने बताया। भदौ २३ को पुलिस द्वारा की गई दमनकारी कार्रवाई और २४ को हुई विध्वंसकारी घटनाओं में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व को भी कार्रवाई के लिए सिफारिश की गई है। आयोग सदस्य थापा ने जवाब देते हुए कहा, “दोनों दिनों की घटनाओं के लिए सिफारिशें की गई हैं, कौन-कौन दोषी हैं यह रिपोर्ट में शामिल है।” इससे पहले विशेष अदालत के पूर्व अध्यक्ष गौरीबहादुर कार्की की अगुवाई वाली जाँच आयोग की सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट में २४ तारीख की घटनाओं में शामिल लोगों के विषय में पर्याप्त जांच न किए जाने की आलोचना हो रही है।
आयोग ने वर्तमान प्रधानमंत्री तथा काठमांडू महानगरपालिका के तत्कालीन प्रमुख वालेन्द्र शाह ‘बालेन’ की भूमिका का भी अध्ययन किया है। एक अधिकारी ने संकेत देते हुए कहा, “उनका नाम २४ तारीख और आन्दोलन से पहले की घटनाओं में भी आया है, डिस्कॉर्ड पर हुई चर्चा समेत तमाम मामलों को जांच के निष्कर्ष में शामिल किया गया है।” आयोग के अधिकारियों के अनुसार, बालेन से लेकर रवि लामिछाने सहित अन्य नेताओं के विरुद्ध मानवाधिकार दृष्टिकोण से कार्रवाई के लिए सिफारिश की गई है। हालांकि, रिपोर्ट को आयोग द्वारा पूर्ण रूप से स्वीकार न किए जाने के संकेत भी अधिकारियों ने दिए हैं।
रिपोर्ट के कार्यान्वयन के दौरान यदि वर्तमान प्रधानमंत्री बालेन के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश हुई तो क्या हो सकता है? इस पर बहस छिड़ सकती है। संविधानविद् सूर्य ढुंगेेल के अनुसार यदि गंभीर आरोप हों तो और जांच भी हो सकती है। “विभिन्न जिम्मेदार पदों पर रहे व्यक्तियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे तो उनकी प्रतिक्रिया और जानकारी बेहद महत्वपूर्ण होगी,” उन्होंने कहा।





