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सरकार का ध्यान केवल 23 सहकारी संस्थाओं पर, जनता को लौटानी है 2 खरब रुपये की बचत

सरकार ने समस्याग्रस्त सहकारी संस्थाओं के बचतकर्ताओं को उनकी बचत लौटाने के लिए चक्रीय कोष में केवल 25 करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा की है। देशभर में लगभग 32 हजार सहकारी संस्थाओं में करीब 12 खरब रुपये की बचत है और 63 हजार पीड़ितों ने अपने धन की वापसी की मांग की है। सहकारी क्षेत्र में राजनीतिक संरक्षण के कारण समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है, और सरकार बार-बार केवल आश्वासन देती रही है, यह बात पूर्व सचिव गोपीनाथ मैनाली ने कही है।

देश भर में सहकारी संस्थाओं में पैसे जमा करने वाले लाखों लोगों को इन संस्थाओं से अपनी बचत वापस पाने के लिए वर्षों से इंतजार करना पड़ रहा है। इस संबंध में कई कार्यदल बनाए गए, रिपोर्टें तैयार की गईं और कानून में संशोधन भी किए गए, लेकिन जनता को अब तक बचत वापसी की गारंटी नहीं मिल पाई है। जनजाती निकाय (जेनजी) आंदोलन के बाद बहुमत का जनादेश पाकर बनी राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) ने सत्ता में आते ही सौ दिन के भीतर सहकारी पीड़ितों की बचत लौटाने का वादा किया था, लेकिन सहकारी पीड़ित अभी भी बैंक की रकम पाने को लेकर आश्वस्त नहीं हैं।

सरकार ने सहकारी बचतकर्ताओं की रकम लौटाने के लिए चक्रीय कोष में पैसा जमा करने और उसी कोष से बचत लौटाने की घोषणा वित्तीय वर्ष के बजट के माध्यम से की है। लेकिन इस कोष में सरकार ने ‘सीड मनी’ के रूप में मात्र 25 करोड़ रुपये रखने का निर्णय लिया है। समस्याग्रस्त सहकारी संस्थाओं के प्रबंधन समिति कार्यालय के अनुसार बचत वापसी की मांग करने वाले पीड़ितों की संख्या 63 हजार है, जो कि केवल 23 समस्याग्रस्त सहकारी संस्थाओं के बचतकर्ता हैं।

सरकार बार-बार कहती रही है कि सहकारी संस्थाओं का नियमन और निगरानी नेपाल राष्ट्र बैंक को करनी चाहिए, लेकिन नेपाल राष्ट्र बैंक इस जिम्मेदारी से पीछे हटता रहा है। पिछली सरकारों ने राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को बचाने के कारण बचतकर्ताओं की रकम वापस नहीं कर पाई, इसके लिए सहकारी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जिम्मेदारी स्वीकार की। उन्होंने कहा, ‘करीब 90 प्रतिशत सहकारी संस्थाएं राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले लोगों द्वारा संचालित हैं।’