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नेपाल का कृषि क्षेत्र पारंपरिक एवं कम उत्पादकता की जाल में फंसा

अर्थ मंत्रालय द्वारा जारी आर्थिक स्थिति पत्र में नेपाल के कृषि क्षेत्र को अभी भी पारंपरिक अवस्था में माना गया है और इसकी उत्पादकता दक्षिण एशियाई देशों के मुकाबले कम पाई गई है। कुल जनसंख्या का ६२ प्रतिशत कृषि कार्य से जुड़ा हुआ है, फिर भी कृषि क्षेत्र का जीडीपी में योगदान २८.४ प्रतिशत से घटकर २५.२ प्रतिशत हो गया है। स्थिति पत्र में कृषि के आधुनिकीकरण और व्यवसायीकरण को प्राथमिकता देते हुए उत्पादन, आय और निर्यात को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

१४ वैशाख, काठमांडू। स्थिति पत्र के अनुसार पिछले दशक में कृषि क्षेत्र की वार्षिक औसत वृद्धि दर मात्र ३ प्रतिशत रही है। आर्थिक वर्ष २०७२/७३ में कृषि क्षेत्र का जीडीपी योगदान २८.४ प्रतिशत था, जो आव २०८१/८२ में घटकर २५.२ प्रतिशत रह गया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि अर्थव्यवस्था में कृषि के बजाए उद्योगीकरण के बजाय सीधे सेवा क्षेत्र ने विस्तार किया है।

उत्पादकता के संदर्भ में नेपाल की स्थिति दक्षिण एशीय देशों के औसत से कम है। आंकड़ों के अनुसार प्रति हेक्टेयर धान की उत्पादकता ४.१९ टन, गेहूं की ३ टन और मकई की ३.४६ टन है। खेती योग्य भूमि की कम उत्पादकता और पारंपरिक कृषि प्रणाली मुख्य समस्याएं हैं। वर्तमान चुनौतियों का समाधान करने के लिए अर्थ मंत्रालय ने कृषि के आधुनिकीकरण और व्यवसायीकरण को प्राथमिकता दी है।

मंत्रालय के अनुसार कृषि, उद्योग और पर्यटन को मजबूती से जोड़कर ही उत्पादन-संवर्धित रोजगार में वृद्धि सम्भव है। स्थिति पत्र में कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण से उत्पादन, आय और निर्यात को बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं बताई गई हैं। विशेष रूप से उच्च मूल्य वाली फसलें, पशुपालन, बागवानी और कृषि प्रसंस्करण उद्योग, सानिय भौगोलिक विविधता का सदुपयोग कर क्षेत्रीय उत्पादन और ग्रामीण उद्योग विकास में निवेश बढ़ाकर आयात प्रतिस्थापन संभव है। निर्यात किए जाने वाले कच्चे माल पर अधिक निर्भरता और कम तकनीकी उपयोग के कारण औद्योगिक क्षेत्र कमजोर है, इसलिए कृषि के आधुनिकीकरण और व्यवसायीकरण के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाना आवश्यक होता है, जो स्थिति पत्र में स्पष्ट किया गया है।