सर्वोच्च अदालत ने लम्कीचुहा अस्पताल विवाद में अंतरिम आदेश देने से किया इंकार

१४ वैशाख, धनगढी । लम्कीचुहा अस्पताल को लेकर हुए विवाद में लम्कीचुहा नगरपालिकाद्वारा दायर रिट में सर्वोच्च अदालत ने अंतरिम आदेश देने से इंकार कर दिया है। नगरपालिकाने गत २४ चैत को सर्वोच्च अदालत में रिट दायर करते हुए प्रदेश सरकार द्वारा गठित अस्पताल प्रबंधन समिति तथा संबंधित निर्णय, कार्यवाही और पत्राचार को लागू न करने हेतु अंतरिम आदेश की मांग की थी। रिट में अस्पताल क्षेत्र में अनावश्यक दंगा-फसाद और प्रचार-प्रसार रोकने का भी आदेश मांगा गया था। नगरपालिकाद्वारा यह रिट अधिवक्ता देवीकुमारी जोशी ने दायर की थी।
सुदूरपश्चिम प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलबहादुर शाह, प्रदेश सरकार, संघीय स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मंत्रालय, सामाजिक विकास मंत्रालय, संबंधित मंत्री और सचिव को विपक्षी बनाया गया था। निवेदक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सतिशकृष्ण खरेल एवं अधिवक्ता भेषराज पन्त ने बहस की, जबकि विपक्षी की ओर से सुदूरपश्चिम प्रदेश सरकार के मुख्य न्यायाधिवक्ता ठेकेन्द्रराज जोशी ने प्रतिरक्षा बहस प्रस्तुत की। दोनों पक्षों की बहस के बाद न्यायाधीश सुनिल पोखरेल एवं नित्यानंद पाण्डे की पीठ ने इस रिट के लिए अंतरिम आदेश आवश्यक नहीं होने का निर्णय सुनाया।
सर्वोच्च के इस फैसले के बाद लम्कीचुहा प्रादेशिक अस्पताल के संचालन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। सुदूरपश्चिम प्रदेश सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में अस्पताल संचालन के लिए ढाई करोड़ रुपए से अधिक का बजट पहले ही आवंटित कर दिया है। प्रदेश सरकार ने लम्कीचुहा अस्पताल को प्रादेशिक अस्पताल बनाने का निर्णय लिया था, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन समिति की स्थापना हुई। नगरपालिकाद्वारा यह मान्यता नहीं दी गई कि प्रदेश सरकार ने अस्पताल हस्तांतरित किए बिना समिति बनाई है, जिससे विवाद और बढ़ गया था।





