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बाजार में महंगाई और दलालों का प्रभाव: बाजार स्तर निर्धारण समिति की गतिविधियाँ क्या हैं?

पश्चिम एशिया के द्वंद्व ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को अनिश्चितता में डाल दिया है और नेपाल में ईंधन की कीमतों में वृद्धि तथा आपूर्ति संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं। नेपाल के आंतरिक बाजार में दलालों ने कृत्रिम महंगाई और मूल्य अस्थिरता फैला दी है, जिससे उपभोक्ताओं को दोहरे संकट का सामना करना पड़ रहा है। वाणिज्य विभाग ने बाजार स्तर निर्धारण और मूल्य मानदंड बनाने के उद्देश्य से समिति का गठन किया है, जो अंतिम रिपोर्ट तैयार कर मंत्रीालय को सौंपने की तैयारी कर रही है।

वैश्विक राजनीति का केंद्र पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को अनिश्चितता की ओर धकेल दिया है। तेल उत्पादन केंद्रों और प्रमुख व्यापार मार्गों में अवरोध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं और आपूर्ति में देरी हुई है, जिसका आयात-आधारित देश नेपाल पर सीधा प्रभाव पड़ा है। इससे उपभोक्ताओं को दुहरी मार झेलनी पड़ रही है।

वाणिज्य, आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा जारी आंकड़ें दर्शाते हैं कि नेपाली उपभोक्ताओं के लिए चैत्र मास में महंगाई ने चुनौतीपूर्ण स्थिति उत्पन्न की है। रिपोर्ट के अनुसार, चैत्र में सबसे अधिक मूल्य वृद्धि तरकारी बाजार में हुई है। कालिमाटी फल एवं तरकारी बाजार के आधार पर कुछ तरकारियों की कीमत ३०० प्रतिशत से अधिक बढ़ी है।

महंगाई की मूल समस्या कमजोर नियमन और अधूरी छड़ी हुई “बाजार स्तर निर्धारण” है। सरकार वर्षों से “बाजार स्तर निर्धारण” के मुद्दे को उठा रही है, लेकिन यह योजना केवल कागज तक सीमित रह गई है। उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने बाजार में व्याप्त अनियमितताओं और दलालों के जाल को तोड़ने के लिए गठित सरकारी समिति की बैठकें ८ से ९ महीने बीत जाने के बाद भी आयोजित न होने का आरोप लगाया है।