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जलवायु न्याय में सभी की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय संवाद का आह्वान

काठमाडौं में आयोजित राष्ट्रीय संवाद ने अपंगता वाले व्यक्तियों की समान भागीदारी सुनिश्चित करते हुए जलवायु न्याय में समावेशी दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से अधिक प्रभावित समुदायों को प्राथमिकता देते हुए जलवायु न्याय में अपंगता वाले व्यक्तियों की समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर का संवाद संपन्न हुआ है। सोमवार को काठमाडौं में आयोजित ‘‘अपंगता समावेशी जलवायु न्याय संबंधी राष्ट्रीय संवाद’’ ने जलवायु नीति से लेकर उसका क्रियान्वयन तक प्रत्येक स्तर पर समावेशी दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक बताया है।

स्विस डिसेबिलिटी एंड डेवलपमेंट कंसोर्टियम द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सीबीएम ग्लोबल, फेयरमेड, एचआई और आईडीए शामिल थे। राष्ट्रीय अपांगता संघ-संस्थाओं के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में सरकारी निकाय, विकास साझेदार, नागरिक समाज, अपंगता अधिकार संबंधित समूह समेत लगभग १०० प्रतिभागी शामिल हुए। कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में स्विट्जरलैंड दूतावास काठमाडौं के चार्ज डी अफेयर्स, म्याथियास मेयर, ने बताया कि जलवायु परिवर्तन सभी पर समान प्रभाव नहीं डालता। उन्होंने विशेष रूप से बाढ़, पहाड़ टूटना, ताप लहर और सूखे जैसी आपदाओं के समय अपंगता वाले व्यक्तियों को अधिक जोखिम झेलना पड़ता है, परंतु नीति निर्माण में उनकी आवाज़ कम सुनाई जाती है, यह बात उन्होंने उजागर की।

कार्यक्रम में सीबीएम ग्लोबल के राष्ट्रीय निर्देशक ने २०२५ में किए गए फोटोवॉइस अध्ययन के महत्व पर प्रकाश डाला। यह अध्ययन अपंगता वाली महिलाओं द्वारा जलवायु चुनौतियों के साथ दैनिक जीवन में संघर्ष को यथार्थ रूप में प्रस्तुत करता है। तस्वीरों के माध्यम से उन्होंने समावेशी नीति, न्यायपूर्ण जलवायु वित्त और समुदाय तक प्रभावी कार्य पहुँचाने की मांग की है। काठमाडौं महानगरपालिकाका विपदा प्रबंधन विभाग के प्रमुख अनिरुद्ध नेपाल ने समावेशी कार्यान्वयन के लिए मजबूत नीति की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण फोटोवॉइस प्रदर्शनी रही। स्विस डिसेबिलिटी एंड डेवलपमेंट कंसोर्टियम, राष्ट्रीय अपंगता संस्थाओं और अपंगता वाले व्यक्तियों द्वारा नेतृत्व संचालित डाइवर्स पार्टनर्स कंसल्टेंसी के सहयोग से बनाई गई इस प्रदर्शनी में बाढ़, सूखा और पहाड़ टूटने जैसी आपदाओं ने अपंगता वाली महिलाओं के जीवन यापन, आवागमन, स्वास्थ्य और सम्मान पर पड़े प्रभाव को प्रस्तुत किया गया था। अध्ययन के नेतृत्वकर्ता सागर प्रसाईं ने बताया कि जलवायु संकट केवल पर्यावरणीय समस्या ही नहीं बल्कि सामाजिक बहिष्कार से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

युवा जलवायु कार्यकर्ता मुना शाक्य ने कहा कि अपंगता वाले लोग, विशेषकर युवा, केवल प्रभावित समुदाय नहीं बल्कि जलवायु अभियान के नेता भी हैं। उन्होंने निर्णय प्रक्रियाओं और नेतृत्व के लिए और अवसरों की आवश्यकता पर जोर दिया। संवाद में भाग लेने वालों ने कहा कि समुदाय स्तर पर जीवनयापन, संरक्षण, पहुंच योग्य राहत केंद्र, जलवायु वित्त तक पहुंच और स्थानीय स्तर से क्रियान्वयन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। तीन समूहगत चर्चा के माध्यम से जलवायु प्रभाव, वित्तीय पहुंच और नीतिगत कमियों पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम ने जलवायु न्याय के बहस को नीति स्तर से जोड़कर समुदाय के वास्तविक जीवन से जोडते हुए आगामी जलवायु कार्यों में ‘किसी को पीछे न छोड़ने’ की प्रतिबद्धता दोहराई है।