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सच्ची क्रांति करुणा से शुरू होती है: रक्षा बम का जवाब

प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह ने बुद्ध जयन्ती पर कहा था कि सच्ची क्रांति ज्ञान से शुरू होती है। लेकिन, जेनजी कार्यकर्ता रक्षा बम ने प्रधानमंत्री के इस कथन का संदर्भ लेते हुए कहा है कि सच्ची क्रांति करुणा से शुरू होती है। काठमांडू के नदी किनारे स्थित सुकुम्बासी बस्ती को सरकार ने डोजर से तोड़ दिया और स्थानीय लोगों को होल्डिंग सेंटर में रखकर मजबूर कर दिया, जिससे यह विषय राष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बन गया है।

१९ वैशाख, काठमांडू – प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह (बालेन) ने बुद्ध जयन्ती के अवसर पर कहा था कि सच्ची क्रांति ‘क’ नहीं बल्कि ‘ज्ञ’ से शुरू होती है, और वह ज्ञान होता है। इसके जवाब में जेनजी कार्यकर्ता रक्षा बम ने लिखा, “सच्ची क्रांति प्रधानमंत्रीजी, ‘क’ से ही शुरू होती है, और वह ‘करुणा’ है।”

सरकार ने बिना स्पष्ट और दीर्घकालीन प्रबंधन योजना के काठमांडू के नदी किनारे स्थित सुकुम्बासी बस्ती को डोजर से तोड़ दिया और वहां रहने वालों को होल्डिंग सेंटर में रखकर असुविधाजनक स्थिति में डाल दिया, जिस कारण यह मुद्दा राष्ट्रीय आलोचना और बहस का विषय बन गया है।

एक तरफ सरकार का नेतृत्व ज्ञान और शांति के दार्शनिक उपदेश देता है, वहीं दूसरी ओर गरीबी और हाशिए पर रहने वाले नागरिकों के आवास तोड़कर उन्हें होल्डिंग सेंटर जैसे असुविधाजनक स्थानों पर छोड़ना विरोधाभास के रूप में देखा जा रहा है। राजनीति और सामाजिक आलोचक इसे मानवीयता और करुणा की कमी बताते हुए प्रधानमंत्री के ज्ञानवाद पर करुणा के आधार पर वैचारिक प्रहार कर रहे हैं।

सुकुम्बासी बस्ती हटाने के सरकारी कदम के खिलाफ नागरिक समाज और युवा कार्यकर्ता सुरक्षित आवास के विकल्प के साथ ही बस्ती खाली करने की मांग कर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। इस विषय पर व्यापक बहस जारी है।