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रासायनिक मल वितरण में नई व्यवस्था लागू, कालाबाजारी करने वालों का लाइसेंस रद्द होगा

कृषि तथा पशुपन्छी विकास मन्त्रालय ने किसानों को रासायनिक मल सहज रूप से उपलब्ध कराने के लिए नई ‘अनुदानको मल वितरण व्यवस्थापन कार्यविधि २०८२’ लागू की है। इस कार्यविधि के तहत मल के कोटा निर्धारण से लेकर वितरण तक की पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करते हुए स्थानीय तहों तक कोटा वितरण की व्यवस्था की गई है। मल वितरण में अनियमितता करने वाले विक्रेताओं का प्रमाणपत्र रद्द किया जाएगा तथा पाँच स्तर की समितियाँ निगरानी और प्रबंधन करेंगी। १८ वैशाख, काठमाडौं।

किसानों को रासायनिक मल की सहज पहुँच देने के उद्देश्य से कृषि तथा पशुपन्छी विकास मन्त्रालय ने नई और कड़ी कार्यविधि जारी की है। १६ वैशाख को कृषिमन्त्री गीता चौधरी ने ‘अनुदानको मल वितरण व्यवस्थापन कार्यविधि २०८२’ के दूसरे संशोधन को मंजूरी दी। कार्यविधि लागू होने के बाद किसानों को रासायनिक मल सरलता से प्राप्त होगा और मल आपूर्ति तथा वितरण प्रणाली व्यवस्थित, पारदर्शी एवं प्रभावी होगी, ऐसी उम्मीद जताई गई है।

कार्यविधि के पूर्ण रूप से लागू होने से कृषि उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि के साथ ही देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी, जिससे समग्र आर्थिक समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा, मन्त्रालय का यह विश्वास है। अब सरकार लागत सहभागिता के आधार पर किसानों को अनुदान के तहत मल उपलब्ध कराएगी। मल वितरण प्रणाली को वैज्ञानिक बनाने के लिए मन्त्रालय ने कोटा निर्धारण हेतु स्पष्ट और गणितीय आधार तय किया है।

मल की कीमतों में हो रही कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने आयात बिंदु पर मल की कीमत निर्धारित की है। अनुदान में दी जाने वाली मल की आयात बिंदु मूल्य यूरिया के लिए प्रति किलो १४ रुपैयाँ, डीएपी के लिए ४३ रुपैयाँ एवं पोटाश के लिए प्रति किलो ३१ रुपैयाँ निर्धारित की गई है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कार्यविधि में कहा गया है, ‘‘स्थानीय तह को स्थानीय समितियों द्वारा तय की गई बिक्री कीमत को स्थानीय तह के कार्यालय और विक्रेताओं के बिक्री केंद्र पर सभी के देखने के लिए चस्पा करने की व्यवस्था करनी होगी।’’